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Siddharthnagar News: कम ब्याज और अनुदान का सपना दिखाने वाले बना रहे कर्जदार

Fri, 27 Dec 2024 11:10 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2024 11:10 PM IST
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Those dreaming of low interest and grants remain debtors
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। अगर गांव में समूह बनाकर कोई लोन या अनुदान दिलाने का झांसा दे रहा है, तो ऐसे लोगों से सावधान हो जाएं। क्योंकि यह फाइनेंस कंपनियों का एक गिरोह है, जो गरीब तबके की महिलाओं को फंसाता है, और उनके नाम से कई बैंकों से लोन करवा देता है। उन्हें इस बात की जानकारी तब होती है, जब वह लाखों का कर्जदार हो जाता है।
कंपनी या बैंक के एजेंट रुपये की वसूली के लिए धमकाते हैं और बर्तन, मोबाइल और कपड़े उतरवा लेने की धमकी देते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के अलावा जिले के कई हिस्सों में इनका नेटवर्क फैला है। जो गांव में एक शख्स से मजबूर और लाचार लोगों के बारे में जानकारी लेता है। फिर समूह बनाने और कम ब्याज पर लोन व अनुदान की बात बताकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं, और लाखों का कर्जदार बना देते हैं।
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सीमावर्ती क्षेत्र बर्डपुर, लोटन में बड़े पैमाने पर यह धंधा चल रहा है। सदर थाना क्षेत्र के बर्डपुर नंबर-12 कपड़िहवा में 50 से अधिक महिलाएं एक व्यक्ति के कहने पर झांसे में आ गईं। अनुदान दिलाने के नाम पर किसी से डेढ़ लाख तो किसी से दो लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों से निकाल लिए। उन्हें केवल अंगूठा लगाने के बारे में जानकारी है।
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जब पीड़ित महिलाओं से बात हुई तो कोई बेटी के हाथ पीले करने में सहयोग मिलेगा, इसलिए समूह से जुड़ गईं, तो कोई रोजगार शुरू करके परिवार को मजबूत बनाने के सपने को पूरा करने के लिए फंस गई। अब कंपनी वाले रुपये वापस करने का दबाव बना रहे हैं। ऐसे में पीड़ित परिवार परेशान है। जिलाधिकारी को पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
एक प्रकार काम करते हैं जालसाज : फाइनेंस बैंक वाले महिलाओं को किस प्रकार से फंसा रहे हैं। इसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। लोटन क्षेत्र के राजेश मिश्र ने बताया कि उनका जानने वाला एक लड़का यह काम करता है। जोड़ने और कर्ज की रकम दिलाने व वसूली करने पर कमीशन मिलता है।
उसने बताया कि लोटन क्षेत्र में कई बैंक हैं। जिन्होंने अपने-अपने एजेंट रखे हैं। इसमें एक एजेंट को कम से कम पांच गांव दिए जाते हैं। एक गांव में चार से कम नहीं हैं, और उससे अधिक जितनी भी संख्या हो उसका समूह बनाते हैं। इसमें कोषाध्यक्ष और अध्यक्ष नहीं होते हैं। प्रधान और उप प्रधान बनाते हैं, जो उसके दायित्व को देखते हैं। गांव में सदस्य पहुंचते हैं।
चाय-पान की दुकान, ताश खेलने वाले अड्डे पर जाते हैं। यहां गांव के व्यक्ति से मिलेंगे। उससे परिचय बढ़ाएंगे और कुछ खिलाएंगे। फिर सबसे जरूरतमंद या ब्याज पर रुपये लेने वाले या जिसके यहां शादी और अन्य काम हो। उनके बारे में जानकारी लेते हैं।
इसमें उन्हीं को पकड़ते हैं, जिसके यहां लोग अनपढ़ हों, पूछताछ करने वाला न हो। उसी व्यक्ति के सहारे उनके संपर्क में आए।, स्कीम बताएंगे।
जब लगेगा कि दावं काम कर गया तो महिला का आधार कार्ड, बैंक पासबुक अगर है तो और निर्वाचन कार्ड लेते हैं, जबकि पुरुष के आधार कार्ड और बैंक पासबुक की कॉपी लेते हैं।

इसके बाद फाॅर्म भरकर उन्हें 15 दिन और एक माह की किस्त पर लोन देते हैं। इसके बाद अनुदान की बात शुरू करते हैं। एक दस्तावेज पर अंगूठा लगवाते हैं, फिर अनेक बैंक से कर्ज निकलवा लेते हैं। जब कुछ माह बीत जाता है तब, वसूली शुरू होती है। इसमें मनबढ़ई से वसूलीकी जाती है। कई बार रात में धमकाने पहुंच जाते हैं। मोबाइल, टीवी और सामान भी उठा ले जाते हैं। इस प्रकार से यह ब्याज बांटने का धंधा चल रहा है।
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