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Siddharthnagar News: शहर में नहीं है पार्किंग स्थल, विवाह के जश्न में जाम से जूझेगा शहर
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लगन के शुभ मुहुर्त में एडवांस में हो चुकी है शहर के होटलों की बुकिंग
नगर पालिका समेत शहर के अधिकांश होटलों पर नदारत हैं वाहन पार्किंग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विवाह का शुभ मुहुर्त 23 नवंबर से शुरू हो रहा है, जिसके मद्देनजर शहर में स्थित 14 से अधिक होटल, मैरिज हाॅल, पार्टी लॉन व धर्मशाला आदि की बुकिंग एडवांस में हो चुकी है। शहर में स्थित इन विवाह स्थलों के इर्द-गिर्द पार्किंग स्थल नहीं होने के कारण विवाह एवं अन्य समारोहों के समय जुटने वाले वाहनों से अक्सर जाम लग जाता है। इन वैवाहिक स्थलों समेत नगर पालिका की तरफ से भी पार्किंग स्थल का इंतजाम नहीं होने से इस बार भी विवाह समारोहों के समय शहर जाम से जूझेगा।
शहर के गोरखपुर मार्ग किनारे स्थित एक पार्टी लॉन के अंदर समारोह के लिए पर्याप्त जगह है, लेकिन यहां पार्किंग स्थल नहीं होने के कारण विवाह व अन्य समारोह में आने वाले लोग वाहन सड़क किनारे खड़ा कर देते हैं। इसी तरह बांसी और बर्डपुर जाने वाली मुख्य सड़क किनारे स्थित तीन होटलों के पास भी पार्किंग स्थल नहीं होने से यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दौरान सड़क पर वाहनों के कतार लग जाते हैं। जबकि शहर के अंदर संकरी गलियों में भी स्थित वैवाहिक स्थलों पर पार्किंग व्यवस्था नदारत है, जिससे समारोह के दौरान आवागमन करने वालों के साथ ही मोहल्ले के लोगों को भी जाम की समस्या झेलनी पड़ती है। शहरी रामदयाल कहते हैं कि शहर में होने वाले विवाह के बरात के जश्न के समय डीजे पर नाचते-गाते सड़क पर गुजरने के दौरान लोग जाम का सामना करते ही हैं, इसके बाद वैवाहिक स्थल पर पार्किंग नहीं होने से अधिकांश वाहन सड़क पर खड़े हो जाते हैं। नगरवासी संदीप कहते हैं कि इन वैवाहिक स्थलों के संचालकों को पार्किंग स्थल निर्धारित करने के बाद ही समारोहों के लिए बुकिंग करनी चाहिए।
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नपा के पास भी नहीं है पार्किंग स्थल
शहर में पार्किंग स्थलों की अनुपलब्धता का आलम यह है कि नगर पालिका के खुद के भवन के पास भी पार्किंग नहीं है। जबकि नगर पालिका को बिना पार्किंग स्थल चिह्नित कराए ऐसे वैवाहिक स्थलों के संचालन पर अंकुश लगानी चाहिए। शहरवासी जुबेर कहते हैं कि नगर पालिका भवन के सामने ही वाहन खड़ा करने की जगह नहीं होने के कारण लोग सड़क पर ही बाइक व कार आदि खड़ी कर देते हैं। इससे बाजार में जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
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जागेंगे भगवान विष्णु, शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य
सिद्धार्थनगर। दशहरा, दीपावली त्योहारों के बाद अब लोग लगन की तैयारी में जुट गए हैं। पांच महीने बाद भगवान विष्णु 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर योग निंद्रा से जागृत होंगे। देव के उठने के साथ ही एक तरफ जहां चातुर्मास का समापन होगा, वहीं दूसरी तरफ तुलसी शालिग्राम के विवाह के साथ ही विवाह मुहर्त की शुरुआत हो जाएगी। लगन मुहूर्त की शुरुआत 24 नवंबर से होगी, वहीं इसका समापन 13 दिसंबर को होगा। इस बीच कुल 13 दिनों तक बैंड-बाजा-बरात के लिए शुभ मुहूर्त होंगे। पंचांग के अनुसार इस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी का मान संपूर्ण दिन और रात आठ बजकर 21 मिनट तक है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के साथ ही इसी दिन छत्र नामक औदायिक योग है। सूर्योदय की तिथि में एकादशी होने से देवउठनी एकादशी इसी दिन मान्य रहेगा। आचार्य अंबरीष शुक्ल के अनुसार देवउठनी एकादशी व्रत करने से व्रतियों को सहस्रों अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। व्रत के प्रभाव से उसे वीर, पराक्रमी और यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। यह व्रत पापनाशक, पुण्यवर्धक और ज्ञानियों को मुक्तिदायक सिद्ध होता है। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्नता देने वाला और विष्णु धाम की प्राप्ति कराने वाला है। इस व्रत को करने से समस्त तीर्थों का घर में निवास हो जाता है।
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विधि-विधान से होता है तुलसी विवाह
आचार्य योगेश पांडेय के अनुसार कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन ही श्रद्धालु तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के श्रीविग्रह के साथ तुलसी का विवाह धूमधाम से किया जाता है। तुलसी के पौधे को गमला आदि में रखकर उसे सजाकर, उसके चारों ओर ईख का मंडप बनाकर उसके ऊपर ओढ़नी या सुहाग की प्रतीक चुनरी चढ़ाएं। वृक्ष को साड़ी में लपेटकर टुकड़ी पहनाकर उसका शृंगार करें। गणपति आदि देवों के साथ भगवान शालिग्राम का पूजन करें। भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसी को सात परिक्रमा कराएं और आरती के साथ विवाह का उत्सव पूर्ण करें।
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शहर में रहेगी शादियों की धूम
सिद्धार्थनगर। देवउठनी एकादशी यानी 23 नवंबर को शहर समेत जिले में 250 से अधिक विवाह होने है। इसी माह शादी के चार शुभ मुहूर्त भी हैं, जिनके लिए पांच महीने पहले से ही बुकिंग कर ली गई है। इसके बाद दिसंबर में नौ मुहूर्त हैं। नवंबर और दिसंबर में करीब 700 नवयुगल शादी के बंधन में बंधेगे। इसके लिए होटल, मैरिज हाल, पार्टी लॉन, बैंडबाजे, धर्मशाला और टेंट आदि बुक हो चुके हैं। 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ ही शादी के मुहूर्त भी शुरू हो जाएंगे। 23 नवंबर को जनपद में 250 से ज्यादा शादियां होनी हैं। लोगों ने इसे लेकर पहले से ही जेवरात और अन्य सामान की खरीदारी शुरू कर दी थी। शुभ नक्षत्र में शादियों की तैयारी भी पहले से ही करने लगे थे। उसका क्षेत्र के राजू का कहना है कि देवउठनी एकादशी के दिन भतीजे की शादी है। मान्यता है कि इस दिन मुहूर्त की जरूरत नहीं पड़ती।
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शुभ लगन की ये हैं तिथियां
आचार्य योगेश पांडेय के अनुसार भगवान विष्णु पांच माह तक अखंड निद्रा में रहते हैं। भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल पक्ष की हर प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार इसी दिन से समस्त धार्मिक एवं मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। पंचांग के अनुसार नवंबर माह में 24, 27, 28 और 29 को शुभ लगन की तिथियां हैं, जबकि दिसंबर माह में 3, 4, 5, 6, 7, 9, 11, 12 और 13 तारीख को शुभ लगन की तिथियां हैं।
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अब बाजार में लगन की रौनक
दीपावली और छठ पूजा के बाद बाजार में लगन की बहार है। दो दिन बाद ही बैंड बाजा बरात की शुरुआत होनी है। शादियों की तैयारी में कपड़े, गहने सहित अन्य सामानों के खरीदार बढ़ गए हैं। शहर के तेतरी बाजार के कपड़ा वाली गली में ग्राहकों की संख्या बढ़ गई है। कपड़ा व्यापारी अजय कसौधन का कहना है कि लगन से पहले लोग कपड़े की खरीदारी कर रहे हैं, जबकि लगन में यह मांग और बढ़ जाएगी। इसी प्रकार स्वर्ण व्यवसायी मिट्ठू लाल कसौधन ने बताया कि लगन शुरू होने से पहले ही बाजार में बिक्री बढ़ गई है। जिनके घर में शादियां हैं, वे गहने खरीद रहे हैं। इस खरीदारी के कारण ही शहर के रेलवे स्टेशन से सिद्धार्थ तिराहा होते हुए बांसी तिराहा तक शाम को दुकानों से लेकर सड़कों तक लोगों की संख्या अधिक रही।
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नगर पालिका समेत शहर के अधिकांश होटलों पर नदारत हैं वाहन पार्किंग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विवाह का शुभ मुहुर्त 23 नवंबर से शुरू हो रहा है, जिसके मद्देनजर शहर में स्थित 14 से अधिक होटल, मैरिज हाॅल, पार्टी लॉन व धर्मशाला आदि की बुकिंग एडवांस में हो चुकी है। शहर में स्थित इन विवाह स्थलों के इर्द-गिर्द पार्किंग स्थल नहीं होने के कारण विवाह एवं अन्य समारोहों के समय जुटने वाले वाहनों से अक्सर जाम लग जाता है। इन वैवाहिक स्थलों समेत नगर पालिका की तरफ से भी पार्किंग स्थल का इंतजाम नहीं होने से इस बार भी विवाह समारोहों के समय शहर जाम से जूझेगा।
शहर के गोरखपुर मार्ग किनारे स्थित एक पार्टी लॉन के अंदर समारोह के लिए पर्याप्त जगह है, लेकिन यहां पार्किंग स्थल नहीं होने के कारण विवाह व अन्य समारोह में आने वाले लोग वाहन सड़क किनारे खड़ा कर देते हैं। इसी तरह बांसी और बर्डपुर जाने वाली मुख्य सड़क किनारे स्थित तीन होटलों के पास भी पार्किंग स्थल नहीं होने से यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दौरान सड़क पर वाहनों के कतार लग जाते हैं। जबकि शहर के अंदर संकरी गलियों में भी स्थित वैवाहिक स्थलों पर पार्किंग व्यवस्था नदारत है, जिससे समारोह के दौरान आवागमन करने वालों के साथ ही मोहल्ले के लोगों को भी जाम की समस्या झेलनी पड़ती है। शहरी रामदयाल कहते हैं कि शहर में होने वाले विवाह के बरात के जश्न के समय डीजे पर नाचते-गाते सड़क पर गुजरने के दौरान लोग जाम का सामना करते ही हैं, इसके बाद वैवाहिक स्थल पर पार्किंग नहीं होने से अधिकांश वाहन सड़क पर खड़े हो जाते हैं। नगरवासी संदीप कहते हैं कि इन वैवाहिक स्थलों के संचालकों को पार्किंग स्थल निर्धारित करने के बाद ही समारोहों के लिए बुकिंग करनी चाहिए।
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शहर में पार्किंग स्थलों की अनुपलब्धता का आलम यह है कि नगर पालिका के खुद के भवन के पास भी पार्किंग नहीं है। जबकि नगर पालिका को बिना पार्किंग स्थल चिह्नित कराए ऐसे वैवाहिक स्थलों के संचालन पर अंकुश लगानी चाहिए। शहरवासी जुबेर कहते हैं कि नगर पालिका भवन के सामने ही वाहन खड़ा करने की जगह नहीं होने के कारण लोग सड़क पर ही बाइक व कार आदि खड़ी कर देते हैं। इससे बाजार में जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
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जागेंगे भगवान विष्णु, शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य
सिद्धार्थनगर। दशहरा, दीपावली त्योहारों के बाद अब लोग लगन की तैयारी में जुट गए हैं। पांच महीने बाद भगवान विष्णु 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर योग निंद्रा से जागृत होंगे। देव के उठने के साथ ही एक तरफ जहां चातुर्मास का समापन होगा, वहीं दूसरी तरफ तुलसी शालिग्राम के विवाह के साथ ही विवाह मुहर्त की शुरुआत हो जाएगी। लगन मुहूर्त की शुरुआत 24 नवंबर से होगी, वहीं इसका समापन 13 दिसंबर को होगा। इस बीच कुल 13 दिनों तक बैंड-बाजा-बरात के लिए शुभ मुहूर्त होंगे। पंचांग के अनुसार इस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी का मान संपूर्ण दिन और रात आठ बजकर 21 मिनट तक है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के साथ ही इसी दिन छत्र नामक औदायिक योग है। सूर्योदय की तिथि में एकादशी होने से देवउठनी एकादशी इसी दिन मान्य रहेगा। आचार्य अंबरीष शुक्ल के अनुसार देवउठनी एकादशी व्रत करने से व्रतियों को सहस्रों अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। व्रत के प्रभाव से उसे वीर, पराक्रमी और यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। यह व्रत पापनाशक, पुण्यवर्धक और ज्ञानियों को मुक्तिदायक सिद्ध होता है। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्नता देने वाला और विष्णु धाम की प्राप्ति कराने वाला है। इस व्रत को करने से समस्त तीर्थों का घर में निवास हो जाता है।
विधि-विधान से होता है तुलसी विवाह
आचार्य योगेश पांडेय के अनुसार कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन ही श्रद्धालु तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के श्रीविग्रह के साथ तुलसी का विवाह धूमधाम से किया जाता है। तुलसी के पौधे को गमला आदि में रखकर उसे सजाकर, उसके चारों ओर ईख का मंडप बनाकर उसके ऊपर ओढ़नी या सुहाग की प्रतीक चुनरी चढ़ाएं। वृक्ष को साड़ी में लपेटकर टुकड़ी पहनाकर उसका शृंगार करें। गणपति आदि देवों के साथ भगवान शालिग्राम का पूजन करें। भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसी को सात परिक्रमा कराएं और आरती के साथ विवाह का उत्सव पूर्ण करें।
शहर में रहेगी शादियों की धूम
सिद्धार्थनगर। देवउठनी एकादशी यानी 23 नवंबर को शहर समेत जिले में 250 से अधिक विवाह होने है। इसी माह शादी के चार शुभ मुहूर्त भी हैं, जिनके लिए पांच महीने पहले से ही बुकिंग कर ली गई है। इसके बाद दिसंबर में नौ मुहूर्त हैं। नवंबर और दिसंबर में करीब 700 नवयुगल शादी के बंधन में बंधेगे। इसके लिए होटल, मैरिज हाल, पार्टी लॉन, बैंडबाजे, धर्मशाला और टेंट आदि बुक हो चुके हैं। 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ ही शादी के मुहूर्त भी शुरू हो जाएंगे। 23 नवंबर को जनपद में 250 से ज्यादा शादियां होनी हैं। लोगों ने इसे लेकर पहले से ही जेवरात और अन्य सामान की खरीदारी शुरू कर दी थी। शुभ नक्षत्र में शादियों की तैयारी भी पहले से ही करने लगे थे। उसका क्षेत्र के राजू का कहना है कि देवउठनी एकादशी के दिन भतीजे की शादी है। मान्यता है कि इस दिन मुहूर्त की जरूरत नहीं पड़ती।
शुभ लगन की ये हैं तिथियां
आचार्य योगेश पांडेय के अनुसार भगवान विष्णु पांच माह तक अखंड निद्रा में रहते हैं। भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल पक्ष की हर प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार इसी दिन से समस्त धार्मिक एवं मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। पंचांग के अनुसार नवंबर माह में 24, 27, 28 और 29 को शुभ लगन की तिथियां हैं, जबकि दिसंबर माह में 3, 4, 5, 6, 7, 9, 11, 12 और 13 तारीख को शुभ लगन की तिथियां हैं।
अब बाजार में लगन की रौनक
दीपावली और छठ पूजा के बाद बाजार में लगन की बहार है। दो दिन बाद ही बैंड बाजा बरात की शुरुआत होनी है। शादियों की तैयारी में कपड़े, गहने सहित अन्य सामानों के खरीदार बढ़ गए हैं। शहर के तेतरी बाजार के कपड़ा वाली गली में ग्राहकों की संख्या बढ़ गई है। कपड़ा व्यापारी अजय कसौधन का कहना है कि लगन से पहले लोग कपड़े की खरीदारी कर रहे हैं, जबकि लगन में यह मांग और बढ़ जाएगी। इसी प्रकार स्वर्ण व्यवसायी मिट्ठू लाल कसौधन ने बताया कि लगन शुरू होने से पहले ही बाजार में बिक्री बढ़ गई है। जिनके घर में शादियां हैं, वे गहने खरीद रहे हैं। इस खरीदारी के कारण ही शहर के रेलवे स्टेशन से सिद्धार्थ तिराहा होते हुए बांसी तिराहा तक शाम को दुकानों से लेकर सड़कों तक लोगों की संख्या अधिक रही।