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Siddharthnagar News: ठंड के बीच जहरीली हुई हवा, घुट रहा दम
Mon, 12 Jan 2026 11:01 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 12 Jan 2026 11:01 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। तराई में कड़ाके की ठंड से परेशान लोगों पर अब दोहरी मार पड़ने लगी है। जिले की हवा जहरीली होने से लोगों का दम घुटने लगा है। इससे लोगों की सेहत बिगड़ रही है। पिछले एक सप्ताह से कोहरे का घनत्व बढ़ने के साथ प्रदूषण के स्तर में बड़ा उछ़ाल देखने को मिला है। पिछले महीने 150-160 के बीच में रहने वाला एक्यूआई का स्तर पर एक बार फिर 190 के आंकड़े को छू लिया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदूषण के स्तर के हिसाब से सेहत पर असर पड़ता है। एक्यूआई 50 तक रहने पर सामान्य से थोड़ा खराब माना जाता है। 50 से ऊपर जाने के बाद बुजुर्ग और नवजातों की सांस पर असर डालता है। 100 से 150 के बीच पहुंचने के बाद सांस के रोगियों और बच्चों के लिए घातक माना जाता है। मौजूदा समय में एक्यूआई 190 तक पहुंचना बड़ा नुकसानदेह है। विशेषज्ञ लोगों को मॉस्क लगाकर घरों से बाहर निकलने की सलाह दे रहे हैं।
कोहरे ने किया परेशान
शनिवार को कोहरा बहुत ही घना था। दृश्यता दो मीटर तक रही। वहीं, रविवार को चार से पांच मीटर दर्ज की गई। इससे वाहनों की रफ्तार थम सी गई। शहर के बस्ती-ककरहवा मार्ग ओवरब्रिज, अशोक मार्ग घने कोहरे की चपेट में आ गया। कोहरे के कारण आम दिनों की तुलना में सुबह सड़क पर लोगों की संख्या काफी कम नजर आई। वहीं कोहरे का घनत्व बढ़ते ही हवा में धूल, गुबार और धूल के कण लंबे समय तक ठहरने लगे हैं। इसके साथ ही एक्यूआई का स्तर तेजी से बढ़ा, जिससे लोगों का दम घुटने लगा। नगर के अलावा, बांसी, डुमरियागंज, इटवा और शोहरतगढ़ तहसील मुख्यालय के अलावा ग्रामीण इलाके में सुबह से ही सड़कों पर वाहनों का पहिया थम गया।
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वहीं, मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी और ओपीडी की बात करें तो ठंड में अस्थमा के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और निजी नर्सिंग होम में सांस, दमा और एलर्जी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में सांस से जुड़ी शिकायत लेकर 10 से 20 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं।
इमरजेंसी में भी ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इमरजेंसी से जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों के मुताबिक गंभीर रोगियों को कई घंटे तक ऑक्सीजन देना पड़ रहा है। इसमें अधिकांश मरीजों की उम्र 50 से 90 के बीच है। इसमें पुरानी बीमारी की हिस्ट्री है। इसके साथ ही नये मरीज भी पहुंच रहे हैं, जिन्हें सांस में तकलीफ है।
शहर के अशोक मार्ग, एनएच बांसी-बस्ती, ओवरब्रिज, उद्यान और बुद्धा पार्क पर पुलिस लाइन, सरकारी कार्यालय और शहर के मोहल्लों से बड़ी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक पर निकलते हैं, लेकिन बीते 10 दिन से कोहरा और गलन बढ़ने के बाद आवाजाही कम दिख रही है। 50 के पार उम्र के लोग कम हो गए हैं। युवा वर्ग ही निकल रहा है। उनकी भी संख्या कम देखी जा रही है। नियमित वॉक पर निकलने वाले रिटायर कर्मी रामनरेश, उमेश कुमार मिश्र ने बताया कि डॉक्टर ने सुबह निकलने से मना कर दिया है। ठंड में बीपी कम और अधिक होने से हार्ट अटैक होने का खतरा बताया। वहीं, कई दिन ऐसा एहसास हुआ कि नाक और आंख में खुजली हुई। डॉक्टर से बात हुई तो उन्होंने बताया कि यह प्रदूषण का असर है।
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सिद्धार्थनगर। तराई में कड़ाके की ठंड से परेशान लोगों पर अब दोहरी मार पड़ने लगी है। जिले की हवा जहरीली होने से लोगों का दम घुटने लगा है। इससे लोगों की सेहत बिगड़ रही है। पिछले एक सप्ताह से कोहरे का घनत्व बढ़ने के साथ प्रदूषण के स्तर में बड़ा उछ़ाल देखने को मिला है। पिछले महीने 150-160 के बीच में रहने वाला एक्यूआई का स्तर पर एक बार फिर 190 के आंकड़े को छू लिया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदूषण के स्तर के हिसाब से सेहत पर असर पड़ता है। एक्यूआई 50 तक रहने पर सामान्य से थोड़ा खराब माना जाता है। 50 से ऊपर जाने के बाद बुजुर्ग और नवजातों की सांस पर असर डालता है। 100 से 150 के बीच पहुंचने के बाद सांस के रोगियों और बच्चों के लिए घातक माना जाता है। मौजूदा समय में एक्यूआई 190 तक पहुंचना बड़ा नुकसानदेह है। विशेषज्ञ लोगों को मॉस्क लगाकर घरों से बाहर निकलने की सलाह दे रहे हैं।
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कोहरे ने किया परेशान
शनिवार को कोहरा बहुत ही घना था। दृश्यता दो मीटर तक रही। वहीं, रविवार को चार से पांच मीटर दर्ज की गई। इससे वाहनों की रफ्तार थम सी गई। शहर के बस्ती-ककरहवा मार्ग ओवरब्रिज, अशोक मार्ग घने कोहरे की चपेट में आ गया। कोहरे के कारण आम दिनों की तुलना में सुबह सड़क पर लोगों की संख्या काफी कम नजर आई। वहीं कोहरे का घनत्व बढ़ते ही हवा में धूल, गुबार और धूल के कण लंबे समय तक ठहरने लगे हैं। इसके साथ ही एक्यूआई का स्तर तेजी से बढ़ा, जिससे लोगों का दम घुटने लगा। नगर के अलावा, बांसी, डुमरियागंज, इटवा और शोहरतगढ़ तहसील मुख्यालय के अलावा ग्रामीण इलाके में सुबह से ही सड़कों पर वाहनों का पहिया थम गया।
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वहीं, मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी और ओपीडी की बात करें तो ठंड में अस्थमा के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और निजी नर्सिंग होम में सांस, दमा और एलर्जी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में सांस से जुड़ी शिकायत लेकर 10 से 20 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं।
इमरजेंसी में भी ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इमरजेंसी से जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों के मुताबिक गंभीर रोगियों को कई घंटे तक ऑक्सीजन देना पड़ रहा है। इसमें अधिकांश मरीजों की उम्र 50 से 90 के बीच है। इसमें पुरानी बीमारी की हिस्ट्री है। इसके साथ ही नये मरीज भी पहुंच रहे हैं, जिन्हें सांस में तकलीफ है।
शहर के अशोक मार्ग, एनएच बांसी-बस्ती, ओवरब्रिज, उद्यान और बुद्धा पार्क पर पुलिस लाइन, सरकारी कार्यालय और शहर के मोहल्लों से बड़ी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक पर निकलते हैं, लेकिन बीते 10 दिन से कोहरा और गलन बढ़ने के बाद आवाजाही कम दिख रही है। 50 के पार उम्र के लोग कम हो गए हैं। युवा वर्ग ही निकल रहा है। उनकी भी संख्या कम देखी जा रही है। नियमित वॉक पर निकलने वाले रिटायर कर्मी रामनरेश, उमेश कुमार मिश्र ने बताया कि डॉक्टर ने सुबह निकलने से मना कर दिया है। ठंड में बीपी कम और अधिक होने से हार्ट अटैक होने का खतरा बताया। वहीं, कई दिन ऐसा एहसास हुआ कि नाक और आंख में खुजली हुई। डॉक्टर से बात हुई तो उन्होंने बताया कि यह प्रदूषण का असर है।