सिद्धार्थनगर: गलत वैक्सीन लगने के बाद ग्रामीणों ने की खास जांच की मांग, बोले- अब चाहिए एंटीबॉडी टाइटल
20 लोगों को दूसरे डोज में लगा था दूसरी कंपनी का टीकाए औदही कलां के ग्रामीणों ने की सैंपल जांच की मांग
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सिद्धार्थनगर बढ़नी पीएचसी में 14 दिन पहले हुए टीकाकरण में 20 लोगों को दूसरे डोज में दूसरी कंपनी का टीका लगने के बाद अब गांव के लोगों में जागरूकता आई है। ग्रामीणों की ओर से उनकी शरीर की एंटीबॉडी टाइटल जांच की मांग की जा रही है, इस जांच में पता चलेगा कि दो अलग-अलग कंपनियों के टीके लगने के बाद टीकाकरण कराने वाले लोगों के शरीर में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हुई या नहीं।
शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के पीएचसी में हुई लापरवाही के कारण औदही कलां के 20 लोगों को 14 मई को दूसरे डोज में दूसरी कंपनी का टीका लगा दिया गया था। पहली डोज में कोविशिल्ड कंपनी का टीका लगा था, जबकि दूसरी डोज में कोवैक्सीन कंपनी का टीका लगा दिया गया। टीकाकरण में हुई लापरवाही के कारण दूसरे डोज में दूसरी कंपनी का टीका लगवाने की सेहत पर फिलहाल कोई बुरा असर नहीं दिख रहा है।
शुरूआती दौर में इनमें से कुछ लोग दूसरी कंपनी का टीका लगने को लेकर ज्यादा परेशान नहीं हुए, जबकि वे अपनी सेहत की जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीम भी प्रतिदिन उनके संपर्क में है। स्वास्थ्य जांच के बाद ब्लॉक मुख्यालय के कर्मचारी घर-घर फोन लगाकर हालचाल पूछ रहे हैं। इस बाबत सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य निदेशालय की गाइडलाइन के अनुसार एंटीबॉडी जांच के लिए लिखा जाएगा। सभी 20 लोगों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर है, फिलहाल सभी की सेहत ठीक है।
ये हुए जागरूक
राधेश्याम शुक्ल ने बताया कि दूसरी कंपनी का टीका लगा तो एक सप्ताह तक चिंता ज्यादा थी लेकिन कुछ बुरा असर नहीं हुआ। सरकारी विभाग में लापरवाही से हमें दूसरी कंपनी का टीका लगा है। दूसरे डोज की तारीख से 28 दिन बाद मेरी एंटीबॉडी की जांच होनी चाहिए।
गोपाल गुप्ता ने कहा कि टीकाकरण में लापरवाही में डॉक्टर और एएनएम के खिलाफ कार्रवाई से हमें कोई फायदा नहीं हुआ। यह विभाग का काम था, विभाग ने किया। इस टीके का हमारे शरीर पर क्या असर हुआ, इसकी वैज्ञानिक तरीके से होनी चाहिए।
शहाबुद्दीन ने कहा कि दूसरी कंपनी का टीका लगने के बाद हमारे शरीर पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है, लेकिन सैंपल चैक करने के बाद ही पता चलेगा कि इससे शरीर पर क्या प्रभाव हुआ। एंटीबॉडी टाइटल कराना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। यह मांग जायज है।
रामकुमार ने कहा कि एक व्यक्ति को दो कंपनी के टीके लगने के बाद एंटीबॉडी जांच होनी चाहिए। यह शोध का विषय है। सरकार को चाहिए कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के वैज्ञानिकों की राय लेकर हमारे स्वास्थ्य की जांच कराए। हमारे सैंपल को दूसरे शहरों में भेजना चाहिए।