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हड़ताल ने तोड़ दी सरकारी तंत्र की कमर

Tue, 20 Sep 2016 10:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Tue, 20 Sep 2016 10:22 PM IST
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The strike broke the back of the government system
कलेक्ट्रेट में क्रमिक अनशन पर बैठे लेखपाल संघ के लोग। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। लेखपाल संघ 17 अगस्त से आंदोलन की राह पर है। कलमबंद हड़ताल, जुलूस-प्रदर्शन के बाद वह कार्य बहिष्कार कर धरना दे रहे हैं। प्रशासन की सबसे अहम कड़ी लेखपालों के आंदोलन ने राजस्व विभाग को पंगु बना दिया है। पिछले एक माह से तहसीलों से न तो कोई आय, जाति, निवास का प्रमाण पत्र जारी हुआ है और न ही कोई खसरा बना है। भूमि की पैमाइश के लिए लोग गणेश परिक्रमा कर रहे हैं। अनुनय-विनय और हिदायतों के बावजूद लेखपाल अपने निर्णय पर अडिग हैं। नतीजा यह है कि जिले की पांच तहसीलों में जाति, आय, निवास प्रमाण पत्रों के तकरीबन 50 हजार आवेदन लंबित पड़ा है। अकेले सदर तहसील में ही नौ हजार आवेदन धूल फांक रहे हैं।
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छात्र-किसान परेशान हैं। विकल्प के तौर पर प्रशासन अब नए लेखपालों को उतारने की तैयारी में है, मगर इससे भी लोगों को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही। समस्या है कि प्रशिक्षणाधीन लेखपाल जाति, आय, निवास प्रमाण पत्रों की रिपोर्ट कैसे लगाएंगे। भूमि की पैमाइश और खसरा जारी करने का अधिकार भी अभी उन्हें प्रदत्त नहीं है। इस संबंध में सदर के नायब तहसीलदार अश्विनी कुमार ने स्वीकार किया कि नए लेखपालों से प्रमाण पत्र नहीं बनवा सकते, लेकिन उनसे अन्य कार्यालयी काम लिया जाएगा। कानूनगो की मदद से नए लेखपालों को पैमाइश में भी लगाया जाएगा। इससे कुछ हद तक समस्या दूर होगी।
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सिद्धार्थनगर। कुपोषण के खात्मे के लिए 10 अगस्त से प्रदेश में हौसला पोषण मिशन की शुरुआत हुई है। यह योजना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में है, मगर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल ने इसका बंटाधार कर दिया है। दो सितंबर से ही जिले के करीब दो हजार आंगनबाड़ी केंद्रों का ताला नहीं खुला है। गर्म पका-पकाया भोजन बनाने वाला चूल्हा ठंडा पड़ा है। महिलाओं-बच्चों में पोषाहार का वितरण नहीं हो रहा। जिले में साढ़े 16 हजार बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में है।
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पोषाहार न मिलने से इनकी स्थिति और भी बिगड़ रही है। यही हाल गर्भवती महिलाओं की भी है। 20 दिनों से किसी भी गांव में ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस का आयोजन नहीं हुआ है। हड़ताल के चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पल्स पोलियो अभियान व बीएलओ ड्यूटी का भी बहिष्कार कर दिया है। इससे मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य ठप है। बीते रविवार को विशेष दिवस पर बूथों पर पसरा सन्नाटा निर्वाचन कार्य में आ रही दिक्कतों को स्पष्ट कर रहा है। तमाम अड़चनों के बाद भी शासन-प्रशासन से कोई सार्थक संदेश न मिलने से आंदोलन जारी है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अजय कुमार त्रिपाठी भी विभागीय कार्य में अड़चनों को स्वीकार करते हैं। उनका कहना है कि हड़ताल ने पूरी व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है। संघ की मांग शासन स्तर की है, लिहाजा चाह कर भी हम कुछ नहीं कर सकते। इनके मांग पत्र शासन को प्रेषित किया जा चुका है।
सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले में तैनात संविदा कर्मचारी और आशाओं की हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेपटरी कर दिया है। जननी सुरक्षा योजना भगवान भरोसे है। संस्थागत प्रसव के आंकड़े औंधे मुंह गिर रहे हैं। गांवों में टीकाकरण और महिलाओं-बच्चों के स्वास्थ्य जांच की जिम्मेदारी आशाओं के कंधे पर है। हड़ताल के चलते यह व्यवस्था ठप है। उनकी देखभाल प्रभावित है। चौदह वर्ष तक के बच्चों को कृमिनाशक दवा पिलाने का अभियान इसी माह से शुरू हुआ था।

शुरुआती दो-तीन दिनों के बाद दवा का वितरण नहीं हो पा रहा। ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की सभी सेवाएं प्रभावित हैं। सीएमओ डॉ. राजेंद्र कपूर के मुताबिक स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों से शासन को अवगत कराया जा चुका है। यह पूरे प्रदेश की समस्या है। फैसला उच्च स्तर पर होना है। लिहाजा हम विवश हैं।
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