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Siddharthnagar News: विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं
Mon, 12 May 2025 11:50 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 12 May 2025 11:50 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्रेक्षागृह में वैश्विक बौद्ध चिंतन की ऐतिहासिकता एवं समकालीन प्रासंगिकता विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ तथा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में गोष्ठी का सोमवार को शुभारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक मूल्यों के संवर्धन, चरित्र निर्माण एवं सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में एक सक्रिय भागीदार बन गई है।
उन्होंने कहा कि बौद्ध चिंतन को पर्यावरण, तकनीक, नीति निर्माण एवं सामाजिक समरसता से जोड़ने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता और सम्यक दृष्टि जैसे बौद्ध मूल्य शिक्षा प्रणाली का अनिवार्य अंग बनने चाहिए।
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बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. हरीशंकर प्रसाद ने बुद्ध के टेस्ट ऑफ सॉरो की व्याख्या करते हुए चार आर्य सत्यों पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि बौद्ध दर्शन केवल आस्था नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन के मार्गदर्शन का सशक्त माध्यम है।
मुख्य अतिथि विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर की कुलपति प्रो. शोभा गौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्ध दर्शन की शिक्षाएं आज के वैश्विक संघर्षों के समाधान का मार्ग प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने करुणा, अहिंसा, मध्यमार्ग और सम्यक विचार जैसे सिद्धांतों की वर्तमान प्रासंगिकता पर बल दिया।
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्रेक्षागृह में वैश्विक बौद्ध चिंतन की ऐतिहासिकता एवं समकालीन प्रासंगिकता विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ तथा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में गोष्ठी का सोमवार को शुभारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक मूल्यों के संवर्धन, चरित्र निर्माण एवं सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में एक सक्रिय भागीदार बन गई है।
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उन्होंने कहा कि बौद्ध चिंतन को पर्यावरण, तकनीक, नीति निर्माण एवं सामाजिक समरसता से जोड़ने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता और सम्यक दृष्टि जैसे बौद्ध मूल्य शिक्षा प्रणाली का अनिवार्य अंग बनने चाहिए।
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बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. हरीशंकर प्रसाद ने बुद्ध के टेस्ट ऑफ सॉरो की व्याख्या करते हुए चार आर्य सत्यों पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि बौद्ध दर्शन केवल आस्था नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन के मार्गदर्शन का सशक्त माध्यम है।
मुख्य अतिथि विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर की कुलपति प्रो. शोभा गौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्ध दर्शन की शिक्षाएं आज के वैश्विक संघर्षों के समाधान का मार्ग प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने करुणा, अहिंसा, मध्यमार्ग और सम्यक विचार जैसे सिद्धांतों की वर्तमान प्रासंगिकता पर बल दिया।