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Siddharthnagar News: गोल्डन ऑवर में टूट रही रेफरल चेन, सर्पदंश से बढ़ रहा मौत का खतरा

Sat, 22 Aug 2026 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 22 Aug 2026 12:31 AM IST
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The referral chain is breaking down during the golden hour, increasing the risk of death from snakebite.
सिद्धार्थनगर। तराई में बारिश के साथ सर्पदंश के मामले बढ़े हैं। मेडिकल कॉलेज में हर 24 घंटे में औसतन 10 से 12 सर्पदंश पीड़ित पहुंच रहे हैं। इनमें कई गंभीर मरीजों की मौत भी हो जा रही है। चिकित्सकों के मुताबिक गंभीर मामलों में खतरा सिर्फ सांप के जहर से नहीं बल्कि इलाज शुरू होने में होने वाली देरी से भी बढ़ रहा है। गांव से अस्पताल, फिर सीएचसी से उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचने में कई बार गोल्डन ऑवर ही निकल जाता है, जिससे मौत का खतरा बढ़ जाता है।
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पिछले मामलों के आधार पर जानकारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के बाद अब भी कई परिवार पहले ओझा या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। कुछ लोग काटे गए स्थान पर घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। जब मरीज की हालत बिगड़ने लगती है तब अस्पताल ले जाने की शुरुआत होती है। नजदीकी सीएचसी पहुंचने के बाद गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में दो से चार घंटे तक लगने की बात सामने आ रही है।
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विषैले सांप के डसने पर समय पर उपचार शुरू होना बेहद महत्वपूर्ण है। जहर तंत्रिका तंत्र और रक्त संचार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने के बजाय रेफरल की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी होनी चाहिए।
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10 वर्षीय अदनान की नहीं बच सकी जान
- 22 जुलाई की रात नगर पंचायत बढ़नी चाफा में 10 वर्षीय अदनान अपनी मां के साथ सो रहा था। इसी दौरान सांप ने उसे डस लिया। परिजन उसे बेवा सीएचसी लेकर पहुंचे। वहां से उसे बस्ती जिला अस्पताल और फिर बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया। लगातार रेफरल और लंबी दूरी तय करने के दौरान बहुमूल्य समय निकल गया। रास्ते में ही बच्चे की मौत हो गई। यह घटना समय पर उपचार और रेफरल व्यवस्था की गति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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गोल्डन ऑवर यानी शुरुआती एक घंटा
- न्यूरो सर्जन डॉ. आशुतोष शुक्ल के अनुसार गोल्डन ऑवर का मतलब है किसी गंभीर आपात स्थिति के बाद का शुरुआती करीब एक घंटा, जिसमें तुरंत सही चिकित्सा मिलने पर मरीज की जान बचाने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। सर्पदंश के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी मरीज को अस्पताल पहुंचाकर चिकित्सकीय उपचार शुरू कराया जाए, उतना ही गंभीर जटिलताओं और मौत का खतरा कम किया जा सकता है।

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गोल्डन ऑवर में ये करें
- पीड़ित को शांत रखें : घबराहट और अधिक गतिविधि से बचाएं।
- प्रभावित अंग स्थिर रखें : उसे अनावश्यक रूप से हिलाएं-डुलाएं नहीं।
- सीधे अस्पताल जाएं : झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं।
- चीरा न लगाएं : काटे हुए स्थान पर चीरा लगाना या जहर चूसना नुकसानदायक हो सकता है।
- कसकर न बांधें : रस्सी या कपड़े से प्रभावित अंग को कसकर बांधने से बचें।
- सांप पकड़ने की कोशिश न करें : पहचान के लिए सांप के पीछे न जाएं।
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हाई रिस्क गांवों में चाहिए तेज व्यवस्था
- सीएचसी पर 24 घंटे एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
- हाई रिस्क गांवों में आपात स्थिति के लिए एंबुलेंस की त्वरित उपलब्धता हो।
- आशा और एएनएम को सर्पदंश के प्राथमिक प्रबंधन की जानकारी दी जाए।
- गांव स्तर पर झाड़-फूंक के बजाय अस्पताल पहुंचने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए।
- बारिश के मौसम में स्वास्थ्य विभाग हाई रिस्क गांवों की विशेष निगरानी करे।
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बोले जिम्मेदार
- सर्पदंश के मरीज को किसी भी स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय नहीं गंवाना चाहिए। एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता स्वास्थ्य केंद्रों पर सुनिश्चित है। सांप डसने की आशंका होने पर मरीज को तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। बारिश के मौसम में खेतों और घरों के आसपास विशेष सावधानी बरतें।
- डॉ. प्रमोद कुमार, सीएमओ
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