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नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया अटकी
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:34 PM IST
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गरीब जरूरतमंद लोगों को जल्द से जल्द राशन कार्ड उपलब्ध करा उन्हें सस्ते राशन की सुविधा दिलाने की शासन की मंशा को ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। एक साल से चल रही राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया को अब तक पूर्ण रूप नहीं मिल सका है।
आवेदकों से फार्म लेने से लेकर उनके सत्यापन तक का काम समय पर नहीं हुआ। इस पर जिला पूर्ति कार्यालय से भेजे गए आधे-अधूरे राशन कार्ड धारकों को ड्रॉफ्ट प्रारूप में 85 प्रतिशत तक गलतियों से कार्ड बनने की राह दिन-प्रतिदिन और भी लंबी होती ही जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में राशन कार्डों में होने वाली धांधली को रोकने के लिए नए सिरे से राशन कार्डों का सत्यापन कर बनवाने का काम शुरू किया गया था। इसमें पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सत्यापन की जिम्मेदारी कोटेदारों को न देकर विकास खंड अधिकारियों-कर्मचारियों को सौंपी गई, जिससे प्रत्येक गरीब जरूरतमंद को सस्ते राशन का लाभ मिल सके।
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कर्मचारियों ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के करीब 4 लाख 10 हजार से अधिक नागरिकों का सत्यापन कर उनके आवेदन फार्म जिला पूर्ति विभाग को भेजे थे। राशन कार्ड ड्रॉफ्ट प्रारुप वापस विकास खंड कार्यालय को सत्यापन के लिए भेजे गए थे।
ग्रामीण राशन कार्ड प्रभारी के अनुसार इस कार्य के लिए अंतिम तिथि फरवरी दी गई थी, जबकि कार्यालय से भेजे गए लगभग 90 प्रतिशत ड्रॉफ्ट प्रारूप में तमाम त्रुटियां हैं।
सबसे अधिक गलतियां आवेदकों की फोटो में ही है। प्रारुप में नाम किसी आवेदक है तो उसमें फोटो किसी अन्य आवेदक की लगाई गई है। इतना ही नहीं प्रत्येक आवेदक का मोबाइल नंबर अनिवार्य होने के बाद भी अधिकांश प्रारूप बिना मोबाइल नंबर के ही बनाकर भेज दिए गए हैं।
ड्रॉफ्ट प्रारूप में गलतियों के कारण सत्यापन कार्य में लगे खंड विकास अधिकारियों कर्मचारियों को कम समय से समाप्त करने में परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। एक-एक प्रारुप में कई गलतियों के कारण भी इस कार्य में देरी होना स्वाभाविक है।
पूर्ति विभाग की ओर से इन प्रारूपों का सत्यापन अंतिम फरवरी तक कर वापस भेजने को कहा गया था। जिला पूर्ति अधिकारी देवमणि मिश्रा ने बताया कि डाटा फिडिंग में जो गलतियां हुई हैं, उसे ही ठीक करने के लिए दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है। अभी राशन कार्ड का ड्रॉफ्ट प्रारूप भेजा गया है। सत्यापन से वास्तविक कार्ड में गलतियों से बचा जा सकेगा। शेष फार्मों को भी जल्द ही सत्यापन के लिए भेज दिया जाएगा।
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आवेदकों से फार्म लेने से लेकर उनके सत्यापन तक का काम समय पर नहीं हुआ। इस पर जिला पूर्ति कार्यालय से भेजे गए आधे-अधूरे राशन कार्ड धारकों को ड्रॉफ्ट प्रारूप में 85 प्रतिशत तक गलतियों से कार्ड बनने की राह दिन-प्रतिदिन और भी लंबी होती ही जा रही है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में राशन कार्डों में होने वाली धांधली को रोकने के लिए नए सिरे से राशन कार्डों का सत्यापन कर बनवाने का काम शुरू किया गया था। इसमें पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सत्यापन की जिम्मेदारी कोटेदारों को न देकर विकास खंड अधिकारियों-कर्मचारियों को सौंपी गई, जिससे प्रत्येक गरीब जरूरतमंद को सस्ते राशन का लाभ मिल सके।
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कर्मचारियों ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के करीब 4 लाख 10 हजार से अधिक नागरिकों का सत्यापन कर उनके आवेदन फार्म जिला पूर्ति विभाग को भेजे थे। राशन कार्ड ड्रॉफ्ट प्रारुप वापस विकास खंड कार्यालय को सत्यापन के लिए भेजे गए थे।
ग्रामीण राशन कार्ड प्रभारी के अनुसार इस कार्य के लिए अंतिम तिथि फरवरी दी गई थी, जबकि कार्यालय से भेजे गए लगभग 90 प्रतिशत ड्रॉफ्ट प्रारूप में तमाम त्रुटियां हैं।
सबसे अधिक गलतियां आवेदकों की फोटो में ही है। प्रारुप में नाम किसी आवेदक है तो उसमें फोटो किसी अन्य आवेदक की लगाई गई है। इतना ही नहीं प्रत्येक आवेदक का मोबाइल नंबर अनिवार्य होने के बाद भी अधिकांश प्रारूप बिना मोबाइल नंबर के ही बनाकर भेज दिए गए हैं।
ड्रॉफ्ट प्रारूप में गलतियों के कारण सत्यापन कार्य में लगे खंड विकास अधिकारियों कर्मचारियों को कम समय से समाप्त करने में परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। एक-एक प्रारुप में कई गलतियों के कारण भी इस कार्य में देरी होना स्वाभाविक है।
पूर्ति विभाग की ओर से इन प्रारूपों का सत्यापन अंतिम फरवरी तक कर वापस भेजने को कहा गया था। जिला पूर्ति अधिकारी देवमणि मिश्रा ने बताया कि डाटा फिडिंग में जो गलतियां हुई हैं, उसे ही ठीक करने के लिए दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है। अभी राशन कार्ड का ड्रॉफ्ट प्रारूप भेजा गया है। सत्यापन से वास्तविक कार्ड में गलतियों से बचा जा सकेगा। शेष फार्मों को भी जल्द ही सत्यापन के लिए भेज दिया जाएगा।