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परोपकार जीवन का सबसे बड़ा धर्म
ब्यूरो/ अमर उजाला, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 20 Mar 2016 11:24 PM IST
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खेसरहा में चल रहे महायज्ञ के दौरान हुई कथा सुनाते संत।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र के महुलानी कुटी समाधि बाबा के स्थान पर चल रहे विष्णु महायज्ञ में पांचवे दिन कथा वाचक मानस मर्तंड हेमंत तिवारी ने परोपकार को मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म बताया।
चौरीचौरा से आए कथा वाचक ने कहा कि मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा धर्म परोपकार है। इंसान को दूसरे इंसानों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए। मनुष्य को हमेशा ईर्ष्या, द्वेष की भावना से दूर हटकर सदैव नेक कार्य करना चाहिए।
दया और प्रेम से परिपूर्ण व्यक्ति को ही प्रभु की प्राप्ति संभव है। मानस मार्तंड ने कहा कि इंसान के अंदर जैसे-जैसे दया और प्रेम दूर होता जाता है, वैसे-वैसे उसके अंदर क्रूरता और अहंकार का बीज अंकुरित होता है और व्यक्ति पाप कर्म में संलिप्त होने लगता है।
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प्रेम और दया के अभाव में क्रूरता व अहंकार रूपी पौधा विशाल वृक्ष का रूप धारण कर लेता है। व्यक्ति के धार्मिक कर्म भी अहंकार पूर्ण हो जाते हैं, लेकिन जो जीव अपने सत्कर्मों से प्रभु को प्रसन्न कर लेता है, वह मान-सम्मान, सुख-यश व अमरत्व को परिपूर्ण हो जाता है।
मानव को हमेशा नारायण को याद करने के साथ जहां भी धार्मिक अनुष्ठान हो, उसमें सहभागिता देनी चाहिए। इससे ईश्वर प्रसन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि कलयुग में मोक्ष पाने का एक मात्र साधन प्रभु की आराधना है। इस अवसर पर यज्ञ आयोजक देवेंद्र पांडेय, राम संवारे, वीरेंद्र राय, मोहन मिश्रा, सुदामा यादव, अनिल दास, जगदीश पांडेय, जुगुल मिश्रा, शैलेंद्र पांडेय, राजेंद्र पांडेय, बालकृष्ण पांडेय, जय प्रकाश राय, नर्वदा तिवारी आदि मौजूद रहे।
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चौरीचौरा से आए कथा वाचक ने कहा कि मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा धर्म परोपकार है। इंसान को दूसरे इंसानों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए। मनुष्य को हमेशा ईर्ष्या, द्वेष की भावना से दूर हटकर सदैव नेक कार्य करना चाहिए।
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दया और प्रेम से परिपूर्ण व्यक्ति को ही प्रभु की प्राप्ति संभव है। मानस मार्तंड ने कहा कि इंसान के अंदर जैसे-जैसे दया और प्रेम दूर होता जाता है, वैसे-वैसे उसके अंदर क्रूरता और अहंकार का बीज अंकुरित होता है और व्यक्ति पाप कर्म में संलिप्त होने लगता है।
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प्रेम और दया के अभाव में क्रूरता व अहंकार रूपी पौधा विशाल वृक्ष का रूप धारण कर लेता है। व्यक्ति के धार्मिक कर्म भी अहंकार पूर्ण हो जाते हैं, लेकिन जो जीव अपने सत्कर्मों से प्रभु को प्रसन्न कर लेता है, वह मान-सम्मान, सुख-यश व अमरत्व को परिपूर्ण हो जाता है।
मानव को हमेशा नारायण को याद करने के साथ जहां भी धार्मिक अनुष्ठान हो, उसमें सहभागिता देनी चाहिए। इससे ईश्वर प्रसन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि कलयुग में मोक्ष पाने का एक मात्र साधन प्रभु की आराधना है। इस अवसर पर यज्ञ आयोजक देवेंद्र पांडेय, राम संवारे, वीरेंद्र राय, मोहन मिश्रा, सुदामा यादव, अनिल दास, जगदीश पांडेय, जुगुल मिश्रा, शैलेंद्र पांडेय, राजेंद्र पांडेय, बालकृष्ण पांडेय, जय प्रकाश राय, नर्वदा तिवारी आदि मौजूद रहे।