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Siddharthnagar News: जांच करता रह गया स्वास्थ्य विभाग...अस्पताल के साथ संचालक लापता

Thu, 07 Mar 2024 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 07 Mar 2024 11:43 PM IST
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The health department kept investigating...the operator missing along with the hospital.
सिद्धार्थनगर। लोटन कोतवाली क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में एक सप्ताह पहले प्रसूता की मौत के मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि जांच करके तीन दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत कर केस दर्ज कराने का सीएचसी अधीक्षक को निर्देश हुआ था। लेकिन केस दर्ज करना तो दूर उसी कस्बे में अवैध रूप से संचालित अस्पताल की कुंडली तक नहीं खंगाल पाए। जबकि अस्पताल संचालक बोर्ड आदि को लेकर वहां से नदारद हो गया है।
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यह था मामला

लोटन कोतवाली क्षेत्र के एकडेंवा गांव के टोला मैनहिया निवासी अर्जुन की पत्नी अंजनी को 29 फरवरी की सुबह प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे लेकर बनियाडीह प्रसव केंद्र पहुंचे, जहां उपचार के बाद नार्मल डिलीवरी हुई। ब्लीडिंग होने के कारण उसे रेफर कर दिया गया। लेकिन गांव के ही आशा वर्कर के पति परिजनों को बहला फुसलाकर लोटन में संचालित होने वाले निजी अस्पताल पहुंचा दिया। जहां उसकी मौत हो गई थी। मौत का मामला संज्ञान में आने के बाद सीएमओ ने सीएचसी अधीक्षक लोटन के साथ तीन सदस्यीय टीम का गठन करके तीन दिन में जांच करने के निर्देश दिए थे। साथ ही सीएचसी अधीक्षक को अस्पताल संचालक पर केस दर्ज कराने के लिए कहा था। लेकिन घटना के एक सप्ताह बाद भी न तो जांच पूरी हुई और न ही केस दर्ज हुआ।
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जांच में भी झोल की आशंका

सूत्रों के अनुसार, जांच में लगी टीम अभी इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है कि वास्तव में अस्पताल का संचालन कौन करता था। क्योंकि अस्पताल में कई लोग बैठते थे। इसलिए टीम अभी इस नतीजे पर भी नहीं पहुंच पाई है कि मुख्य संचालक कौन है। क्योंकि मौत होने के बाद अगर सीएचसी की टीम ने तेजी दिखाई होती तो शायद सबकुछ मिल जाता। लेकिन जांच में देरी से अस्पताल चलाने वाले न सिर्फ बोर्ड लेकर गए। बल्कि कागज का एक टुकड़ा तक नहीं छोड़े।
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आशा की भूमिका नहीं हुई स्पष्ट

प्रसूता की मौत के मामले में निजी अस्पताल पर भेजने में आशा कार्यकर्ता का नाम आया था। लेकिन आशा की भूमिका स्पष्ट नहीं हुई है। अगर आशा की भूमिका स्पष्ट होती तो यह पुख्ता हो जाता कि यह लोग निजी अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए भेजती हैं।

बहुत खींचतान के बाद अस्पताल हुआ था सीज
जब भी अस्पताल में किसी की मौत होती है तो कार्रवाई में विभाग की शिथिलता उजागर होती है। लगभग चार माह पहले ही लोटन में ही एक अस्पताल में लापरवाही के चलते इसी तरह ही जच्चा व बच्चा की मौत हो गई थी। शिकायत के बाद भी स्वास्थ्य टीम की ओर से अस्पताल पर कार्रवाई की गई। अस्पताल को सील किया गया था।


मामला संज्ञान में आने के बाद खुद मौके पर जांच के लिए गया था। अस्पताल पर नोटिस लगाया था। सीएचसी अधीक्षक के साथ तीन सदस्यों की टीम जांच के लिए गठित की गई है। जांच करके संचालक पर केस दर्ज कराने अधीक्षक को निर्देश दिया गया है। पता करवाते हैं कि अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

-संजय कुमार गुप्ता, डिप्टी सीएमओ
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