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Siddharthnagar News: भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता समाज के लिए उदाहरण
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भनवापुर क्षेत्र के चौखड़ा में श्रीमद्भागवत सुनाते प्रेम शरण शास्त्री। स्रोत विज्ञप्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। ब्लॉक क्षेत्र के चौखड़ा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक प्रेम शरण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन किया। इसको सुनकर श्रद़्धालु मंत्रमुग्ध रह गए।
व्यास प्रेम शरण शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता औरों के लिए उदाहरण बताया। मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र (सखा) श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे।
सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछकर महल की ओर बढ़ने लगे। द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे, सामने सुदामा को देखकर उन्होंने उन्हें अपने सीने से लगा लिया।
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सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया और सुदामा को अपने महल में ले गए।
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भनवापुर। ब्लॉक क्षेत्र के चौखड़ा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक प्रेम शरण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन किया। इसको सुनकर श्रद़्धालु मंत्रमुग्ध रह गए।
व्यास प्रेम शरण शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता औरों के लिए उदाहरण बताया। मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र (सखा) श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे।
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सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछकर महल की ओर बढ़ने लगे। द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे, सामने सुदामा को देखकर उन्होंने उन्हें अपने सीने से लगा लिया।
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सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया और सुदामा को अपने महल में ले गए।