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सोने पर ‘ब्रेक’ का पहला वार: कारीगरों की हथौड़ी हुई धीमी
Wed, 13 May 2026 02:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 13 May 2026 02:41 AM IST
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शहर में स्थित आभूषण दुकान पर खरीददारी करते लोग।
ग्राहक वेट एंड वॉच मोड में, छोटे वर्कशॉप में काम घटने के संकेत
बॉर्डर बेल्ट के सर्राफा बाजारों में भी सुस्ती, बंगाल के कारीगरों की बढ़ी चिंता
सिद्धार्थनगर। नौगढ़ सराफा बाजार में सुबह दुकानें इन दिनों रोज की तरह खुलती हैं। शोकेस में सजे हार, चूड़ियां और मंगलसूत्र पहले की तरह चमकते और साफ किए जाते हैं, लेकिन बाजार की रफ्तार अब बदली-बदली नजर आने लगी है। ग्राहक दुकानों तक पहुंच रहे हैं, डिजाइन देख रहे हैं, दाम पूछ रहे हैं। मगर खरीदारी पर हाथ रोक ले रहे हैं। अभी नहीं, थोड़ा इंतजार करते हैं...। सराफा बाजार के नए ट्रेंड से कारीगरों की हथौड़ी धीमी हुई है।
सोना खरीद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बाजार में यह रुककर देखने वाला रुझान तेज हुआ है, जिसका सबसे पहला असर कारीगरों की रोजी-रोटी पर दिखने लगा है। ऐसे में व्यापारी, कारीगर और ग्राहक सबके मन में उथल-पुथल मची है। हालांकि, व्यापारी कहते हैं कि सराफा बाजार अभी ठहरा नहीं लेकिन रफ्तार जरूर थमी है और अगर यह ठहराव लंबा चला तो सोने की चमक सबसे पहले कारीगरों की जिंदगी से फीकी पड़ती दिखेगी। कारोबारियों का कहना है कि बाजार पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है, लेकिन उसकी चाल जरूर धीमी हुई है। इसका सबसे पहला असर छोटे कारीगरों और ज्वेलरी वर्कशॉप पर दिखाई देने लगा है, जहां काम पूरी तरह ऑर्डर पर टिका होता है।
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शादी की खरीद जारी, निवेश वाली मांग घटी
- सराफा कारोबारियों के मुताबिक शादी-विवाह की जरूरी खरीद अभी जारी है, लेकिन निवेश और अतिरिक्त खरीद टाली जा रही है। नौगढ़ के एक व्यापारी बताते हैं कि ग्राहक पहले तुरंत खरीद का फैसला कर लेते थे, लेकिन अब कई लोग केवल भाव लेकर लौट जा रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो दुकानों में स्टॉक अटक सकता है और नया माल बनवाने के ऑर्डर घट सकते हैं। इसका असर केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होगी।
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सबसे ज्यादा चिंता कारीगरों को
- सराफा बाजार की सुस्ती का सबसे तेज असर छोटे कारीगरों पर पड़ने की आशंका है। शहर और कस्बों के छोटे वर्कशॉप में काम करने वाले सुनार, डिजाइनर और पॉलिश कारीगर रोज मिलने वाले ऑर्डर पर निर्भर रहते हैं। वर्कशॉप में काम करने वाले कारीगरों का कहना है कि उनकी कमाई रोज के काम से चलती है। एक दिन काम कम हुआ तो उसी दिन घर का बजट बिगड़ जाता है। महंगाई के बीच पहले ही काम सीमित है, अब मांग और घटने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटे शहरों में ज्वेलरी सेक्टर केवल व्यापार नहीं, बल्कि हजारों लोगों के अनौपचारिक रोजगार का जरिया है। बाजार की रफ्तार धीमी होने का असर सबसे पहले दिहाड़ी और पीस रेट पर काम करने वाले मजदूरों पर पड़ता है।
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बंगाल के कारीगरों पर भी संकट
- सिद्धार्थनगर के कई ज्वेलरी वर्कशॉप में पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया से आए कारीगर काम करते हैं। ये कारीगर महीनों तक जिले में रहकर गहनों की बारीक डिजाइनिंग और फिनिशिंग का काम करते हैं। मालदा से आए एक कारीगर मुस्ताक बताते हैं कि सीजन में छह से आठ महीने तक यहां काम करते हैं। काम घटा तो गांव लौटना पड़ेगा। व्यापारियों के अनुसार, काम बढ़ने पर बाहर से कारीगर बुलाए जाते हैं, लेकिन सुस्ती आते ही सबसे पहले इन्हीं का काम प्रभावित होता है।
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बॉर्डर बाजारों में भी सतर्कता
- बढ़नी और शोहरतगढ़ जैसे सीमावर्ती बाजारों में भी खरीदारी का रुख बदला हुआ दिखाई दे रहा है। कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक नई खरीद के बजाय पुराने गहनों की अदला-बदली या हल्के गहनों की तरफ ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। युवाओं में हल्के डिजाइन और कम वजन वाली ज्वेलरी की मांग बढ़ रही है। वहीं, निवेश के तौर पर सोना खरीदने वाले ग्राहक फिलहाल वेट एंड वॉच मोड में हैं।
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असर एक नजर में
ग्राहक खरीद टाल रहे
निवेश वाली मांग घटी
छोटे वर्कशॉप में ऑर्डर कम होने की आशंका
कारीगरों की दिहाड़ी पर दबाव
हल्के गहनों की मांग बढ़ी
सीमावर्ती बाजारों में सतर्क कारोबार
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कोट....
फिलहाल बाजार पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन ग्राहकों का रुझान बदलता दिख रहा है। लोग खरीदारी टाल रहे हैं और केवल जरूरी सामान ले रहे हैं। अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो सराफा कारोबार की रफ्तार टूट सकती है।
- मिट्ठू लाल, अध्यक्ष- स्वर्ण व्यवसायी संघ
शादी-ब्याह की जरूरत होने पर थोड़ा बहुत खरीदना पड़ रहा है, लेकिन अतिरिक्त गहनों की खरीद फिलहाल रोक दी है। पहले जैसे तुरंत खरीद का मन नहीं बन रहा, लोग अब सोच-समझकर पैसा खर्च कर रहे हैं।
- सुधा प्रजापति, ग्राहक
ग्राहक दुकानों पर आ रहे हैं, डिजाइन और रेट भी पूछ रहे हैं, लेकिन खरीदारी का फैसला तुरंत नहीं ले रहे। इसका असर छोटे कारोबारियों और वर्कशॉप पर सबसे पहले दिखाई देगा, क्योंकि पूरा काम ऑर्डर पर चलता है।
- रोहन अग्रहरि, व्यवसायी
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बॉर्डर बेल्ट के सर्राफा बाजारों में भी सुस्ती, बंगाल के कारीगरों की बढ़ी चिंता
सिद्धार्थनगर। नौगढ़ सराफा बाजार में सुबह दुकानें इन दिनों रोज की तरह खुलती हैं। शोकेस में सजे हार, चूड़ियां और मंगलसूत्र पहले की तरह चमकते और साफ किए जाते हैं, लेकिन बाजार की रफ्तार अब बदली-बदली नजर आने लगी है। ग्राहक दुकानों तक पहुंच रहे हैं, डिजाइन देख रहे हैं, दाम पूछ रहे हैं। मगर खरीदारी पर हाथ रोक ले रहे हैं। अभी नहीं, थोड़ा इंतजार करते हैं...। सराफा बाजार के नए ट्रेंड से कारीगरों की हथौड़ी धीमी हुई है।
सोना खरीद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बाजार में यह रुककर देखने वाला रुझान तेज हुआ है, जिसका सबसे पहला असर कारीगरों की रोजी-रोटी पर दिखने लगा है। ऐसे में व्यापारी, कारीगर और ग्राहक सबके मन में उथल-पुथल मची है। हालांकि, व्यापारी कहते हैं कि सराफा बाजार अभी ठहरा नहीं लेकिन रफ्तार जरूर थमी है और अगर यह ठहराव लंबा चला तो सोने की चमक सबसे पहले कारीगरों की जिंदगी से फीकी पड़ती दिखेगी। कारोबारियों का कहना है कि बाजार पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है, लेकिन उसकी चाल जरूर धीमी हुई है। इसका सबसे पहला असर छोटे कारीगरों और ज्वेलरी वर्कशॉप पर दिखाई देने लगा है, जहां काम पूरी तरह ऑर्डर पर टिका होता है।
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शादी की खरीद जारी, निवेश वाली मांग घटी
- सराफा कारोबारियों के मुताबिक शादी-विवाह की जरूरी खरीद अभी जारी है, लेकिन निवेश और अतिरिक्त खरीद टाली जा रही है। नौगढ़ के एक व्यापारी बताते हैं कि ग्राहक पहले तुरंत खरीद का फैसला कर लेते थे, लेकिन अब कई लोग केवल भाव लेकर लौट जा रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो दुकानों में स्टॉक अटक सकता है और नया माल बनवाने के ऑर्डर घट सकते हैं। इसका असर केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होगी।
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सबसे ज्यादा चिंता कारीगरों को
- सराफा बाजार की सुस्ती का सबसे तेज असर छोटे कारीगरों पर पड़ने की आशंका है। शहर और कस्बों के छोटे वर्कशॉप में काम करने वाले सुनार, डिजाइनर और पॉलिश कारीगर रोज मिलने वाले ऑर्डर पर निर्भर रहते हैं। वर्कशॉप में काम करने वाले कारीगरों का कहना है कि उनकी कमाई रोज के काम से चलती है। एक दिन काम कम हुआ तो उसी दिन घर का बजट बिगड़ जाता है। महंगाई के बीच पहले ही काम सीमित है, अब मांग और घटने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटे शहरों में ज्वेलरी सेक्टर केवल व्यापार नहीं, बल्कि हजारों लोगों के अनौपचारिक रोजगार का जरिया है। बाजार की रफ्तार धीमी होने का असर सबसे पहले दिहाड़ी और पीस रेट पर काम करने वाले मजदूरों पर पड़ता है।
बंगाल के कारीगरों पर भी संकट
- सिद्धार्थनगर के कई ज्वेलरी वर्कशॉप में पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया से आए कारीगर काम करते हैं। ये कारीगर महीनों तक जिले में रहकर गहनों की बारीक डिजाइनिंग और फिनिशिंग का काम करते हैं। मालदा से आए एक कारीगर मुस्ताक बताते हैं कि सीजन में छह से आठ महीने तक यहां काम करते हैं। काम घटा तो गांव लौटना पड़ेगा। व्यापारियों के अनुसार, काम बढ़ने पर बाहर से कारीगर बुलाए जाते हैं, लेकिन सुस्ती आते ही सबसे पहले इन्हीं का काम प्रभावित होता है।
बॉर्डर बाजारों में भी सतर्कता
- बढ़नी और शोहरतगढ़ जैसे सीमावर्ती बाजारों में भी खरीदारी का रुख बदला हुआ दिखाई दे रहा है। कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक नई खरीद के बजाय पुराने गहनों की अदला-बदली या हल्के गहनों की तरफ ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। युवाओं में हल्के डिजाइन और कम वजन वाली ज्वेलरी की मांग बढ़ रही है। वहीं, निवेश के तौर पर सोना खरीदने वाले ग्राहक फिलहाल वेट एंड वॉच मोड में हैं।
असर एक नजर में
ग्राहक खरीद टाल रहे
निवेश वाली मांग घटी
छोटे वर्कशॉप में ऑर्डर कम होने की आशंका
कारीगरों की दिहाड़ी पर दबाव
हल्के गहनों की मांग बढ़ी
सीमावर्ती बाजारों में सतर्क कारोबार
कोट....
फिलहाल बाजार पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन ग्राहकों का रुझान बदलता दिख रहा है। लोग खरीदारी टाल रहे हैं और केवल जरूरी सामान ले रहे हैं। अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो सराफा कारोबार की रफ्तार टूट सकती है।
- मिट्ठू लाल, अध्यक्ष- स्वर्ण व्यवसायी संघ
शादी-ब्याह की जरूरत होने पर थोड़ा बहुत खरीदना पड़ रहा है, लेकिन अतिरिक्त गहनों की खरीद फिलहाल रोक दी है। पहले जैसे तुरंत खरीद का मन नहीं बन रहा, लोग अब सोच-समझकर पैसा खर्च कर रहे हैं।
- सुधा प्रजापति, ग्राहक
ग्राहक दुकानों पर आ रहे हैं, डिजाइन और रेट भी पूछ रहे हैं, लेकिन खरीदारी का फैसला तुरंत नहीं ले रहे। इसका असर छोटे कारोबारियों और वर्कशॉप पर सबसे पहले दिखाई देगा, क्योंकि पूरा काम ऑर्डर पर चलता है।
- रोहन अग्रहरि, व्यवसायी