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Siddharthnagar News: घर में गूंजती है गौरैया की चहचहाहट
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घोषला बनाते अनवारुल हक। स्रोत विज्ञप्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
शोहरतगढ़। आज विश्व गौरैया दिवस है। बीते वर्षों में इन विलुप्त पंछी के संरक्षण की बात जब भी आती है, तो शोहरतगढ़ विकास क्षेत्र के पल्टादेवी निवासी अनवारुल हक के घर आइए, जहां घोसले में गौरैया की चहचहाहट आपको सुकून देगी। यहां गौरैयों का पूरा संसार देखने को मिल जाएगा। इनके घर में लगभग 100 घोंसलों में गौरैया दिखाई देगी।
इनके घर गौरैया यूं ही नहीं बसी है, इसके पीछे प्यार की मजबूत नींव है। लगन और तपस्या की लंबी यात्रा है। करीब नौ वर्ष पूर्व अनवारुल के घर गौरैया का परिवार कहीं से भटक कर आ गया, तो उनके आगे चावल के दाने बिखेर दिए। चावल गौरैया ने खाए। इन दानों में उनको प्यार दिखा तो महफूज हाथों का दुलार भी।
यह सिलसिला चलता रहा हैं। धीरे-धीरे उनके साथ अन्य गौरैया भी आने लगीं। घर में ही घोंसला बनाने लगीं तो अनवारुल के साथ परिवार ने चिड़ियों के घरों को संवारना शुरू कर दिया।
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ऐसे बढ़ा गौरैया का परिवार : घर में गौरैया की संख्या बढ़े इसको लेकर अनवारुल ने जूते-चप्पल के खाली डिब्बे, घर में बेकार पड़े बोरों से घोंसला बनाना शुरू किया। आठ वर्षों में वह स्वजन की मदद से 120 घोसले बनाकर घर में लगा चुके हैं। इसमें गौरैया व उनका परिवार रहता है।
अनवारुल का गौरैया प्रेम इतना हो चुका है कि वह अपने किसी दोस्त का जन्म दिन होने पर उसे अपने हाथ से बनाया हुआ गौरैया का घोंसला उपहार में देते हैं।
घरवालों के जन्मदिन व अन्य उत्सव के अवसर पर लोगों को घोंसले देते हैं। अनवारुल बताते हैं कि पिछले नौ वर्षों में 100 घोसला लोगों में भी बाट चुके हैं।
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शोहरतगढ़। आज विश्व गौरैया दिवस है। बीते वर्षों में इन विलुप्त पंछी के संरक्षण की बात जब भी आती है, तो शोहरतगढ़ विकास क्षेत्र के पल्टादेवी निवासी अनवारुल हक के घर आइए, जहां घोसले में गौरैया की चहचहाहट आपको सुकून देगी। यहां गौरैयों का पूरा संसार देखने को मिल जाएगा। इनके घर में लगभग 100 घोंसलों में गौरैया दिखाई देगी।
इनके घर गौरैया यूं ही नहीं बसी है, इसके पीछे प्यार की मजबूत नींव है। लगन और तपस्या की लंबी यात्रा है। करीब नौ वर्ष पूर्व अनवारुल के घर गौरैया का परिवार कहीं से भटक कर आ गया, तो उनके आगे चावल के दाने बिखेर दिए। चावल गौरैया ने खाए। इन दानों में उनको प्यार दिखा तो महफूज हाथों का दुलार भी।
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यह सिलसिला चलता रहा हैं। धीरे-धीरे उनके साथ अन्य गौरैया भी आने लगीं। घर में ही घोंसला बनाने लगीं तो अनवारुल के साथ परिवार ने चिड़ियों के घरों को संवारना शुरू कर दिया।
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ऐसे बढ़ा गौरैया का परिवार : घर में गौरैया की संख्या बढ़े इसको लेकर अनवारुल ने जूते-चप्पल के खाली डिब्बे, घर में बेकार पड़े बोरों से घोंसला बनाना शुरू किया। आठ वर्षों में वह स्वजन की मदद से 120 घोसले बनाकर घर में लगा चुके हैं। इसमें गौरैया व उनका परिवार रहता है।
अनवारुल का गौरैया प्रेम इतना हो चुका है कि वह अपने किसी दोस्त का जन्म दिन होने पर उसे अपने हाथ से बनाया हुआ गौरैया का घोंसला उपहार में देते हैं।
घरवालों के जन्मदिन व अन्य उत्सव के अवसर पर लोगों को घोंसले देते हैं। अनवारुल बताते हैं कि पिछले नौ वर्षों में 100 घोसला लोगों में भी बाट चुके हैं।