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15 हजार हेक्टेयर होगा कालानमक धान का रकबा

Fri, 13 May 2022 11:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 11:48 PM IST
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The area of black paddy will be 15 thousand hectares
15 हजार हेक्टेयर होगा कालानमक धान का रकबा
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सिद्धार्थनगर। किसानों की आय को बढ़ाने के लिए कालामनक धान की खेती का रकबा बढ़ाया जाएगा। जिले के 15 हजार हेक्टेयर भूमि पर कालानमक की खेती का लक्ष्य रखा गया है। एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत चयनित कालानमक के रकबे को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकारी गोदामों पर बीज भी आ गया है, जिसे 54 रुपये 95 पैसे प्रति किलो के हिसाब से किसान खरीद सकेंगे।
प्रदेश में योगी सरकार जब पहली बार सत्ता में आई तो सभी जनपदों में होने वाले उत्पाद को प्रोत्साहन देने और उसकी ब्रांडिंग के लिए एक जनपद एक उत्पाद के तहत जोड़ा गया। इसमें सिद्धार्थनगर में कालानमक धान को एक जनपद एक उत्पाद के लिए चयनित किया गया। वर्ष 2019 में कालानमक के ओडीओपी में चयनित होने के बाद लगातार खेती के रकबे को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2019 में ढाई हजार हेक्टेयर भूमि पर कालानमक धान की खेती होती थी।
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अब 12 से 13 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। कालानमक चावल के लिए पूर्व डीएम दीपक मीणा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हाल ही में सम्मानित हुए थे। इधर, जिले में कालानमक धान के खेती के लिए रकबा बढ़ाने पर और जोर दिया जा रहा है, जिससे किसानों को ज्यादा लाभ हो। कृषि विभाग के मुताबिक, इस वर्ष रकबा बढ़ाकर 15 हजार हेक्टेयर पहुंचाने का लक्ष्य है। दो से तीन हजार हेक्टेयर भूमि बढ़ने से किसानों की आय बढ़ेगी।
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इस प्रकार बढ़ाएंगे रकबा
रकबा और बढ़े तथा सरकार की मंशा के अनुरूप किसानों की आय दोगुना हो, उसके लिए अधिक से अधिक किसानों को खेती से जोड़ा जाएगा। हर जगह समिति बनाई जाएगी। कृषि विभाग से जुड़े लोग किसानों के संपर्क में रहेंगे। वे फसल को समय-समय पर देखेंगे और फसल होने तक दवाओं के छिड़काव आदि के बारे में जानकारी देंगे। रकबा बढ़े और किसान प्रोत्साहित हों, उसके लिए धान का प्रचार-प्रसार भी करेंगे। किसानों को लाभ मिलेगा।
सीमा क्षेत्र के इलाके में बढ़ा रहा है रकबा
मूल रूप से अभी तक सीमावर्ती क्षेत्र के बर्डपुर, लोटन और शोहरतगढ़ खेती होती आ रही है। पहले जोगिया और नौगढ़ ब्लॉक क्षेत्र के बड़े हिस्से पर कालानमक धान की खेती होती थी। एक जनपद में चयनित होने के बाद इन ब्लॉक क्षेत्रों में भी रकबा बढ़ रहा है।
अपनी नर्सरी में तैयार हुई बीज
कालानमक धान का रकबा बढ़ाने के लिए जिले के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में तैयार हुई मूल प्रजाति के कालानमक धान का 60 क्विंटल बीज की सरकारी गोदाम पर आपूर्ति हुई है। यहां किसानों को 54 रुपये 95 पैसे प्रति किलो की दर से बीज मिलेगा। पहले किसान अपने ही घर के बीज का इस्तेमाल करते थे।

कालानमक धान एक जनपद एक उत्पाद में चयनित है। इसका रकबा बढ़े और किसानों की आय बेहतर हो सके। इसके लिए प्रचार-प्रसार करके किसानों को जागरूक किया जाएगा। इस वर्ष 15 हजार हेक्टेयर रकबा करने का लक्ष्य है। कालानमक धान का बीज गोदामों पर भेज दिया गया है। वहां से किसान खरीद सकेंगे। इसी मिट्टी पर तैयार किया गया बीज है, जो उपयोगी है और पैदावार बढ़ेगी।
- सीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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