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Siddharthnagar News: फर्जी अस्पतालों व जांच केंद्रों के लिए बनी टाॅस्क फोर्स
Mon, 06 Nov 2023 01:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 06 Nov 2023 01:15 AM IST
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अवैध अस्पताल संचालकों और मरीजों को पहुंचाने में सहयोग करने वाले माफिया पर होगी कार्रवाई
अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों में दम तोड़ रहे मरीज
सिद्धार्थनगर। अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पतालों में मरीजों की मौत और हंगामे के बाद प्रशासन ने निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुहिम छेड़ दी है। जनपद में बिना लाइसेंस के संचालित होने वाले अस्पतालों की जांच करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए तहसील स्तर पर और मुख्यालय पर टीम गठित की गई है।
मुख्यालय की टीम पूरे जनपद जबकि तहसील स्तरीय टीम अपने-अपने तहसील में अभियान चलाकर कार्रवाई करेगी। एक ही दिन में जिले की टीम ने अवैध रूप से संचालित हो रहे पांच अस्पतालों और क्लीनिक को पकड़ा। सभी को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने के निर्देश हुए हैं।
यह महज दो ब्लॉक क्षेत्रों की चेकिंग में सामने आया है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि जिले में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से अस्पताल और जांच केंद्र चल रहे हैं। यहां आर्थिक शोषण तो हो ही रहा है मरीजों की जान भी जा रही है।
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हर चौराहे और ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों का बड़ा-बड़ा बोर्ड लगाकर मरीज माफिया मरीजों को झांसे में ले रहे हैं। इसके बाद उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं। अप्रशिक्षित चिकित्सकों के इलाज से लोगों की जान जा रही है।
मुख्यालय पर अफसरों की नाक के नीचे संचालित हो रहे अवैध अस्पताल में बिना जरूरत ऑपरेशन से प्रसूता और नवजात की मौत हो गई। वहीं, एक माह पहले लोटन में बिना कागजात के चल रहे अस्पताल में ऑपरेशन कर देने से एक महिला की जान चली गई। जांच में अस्पताल बिना कागजात के फर्जी तरीके से संचालित पाए गए। इन मामलों में कार्रवाई होने के साथ ही जांच चल रही है।
इसके बाद भी जनपद में बड़े पैमाने पर ऐसे मानकविहीन अस्पताल संचालित हो रहे हैं। जहां मरीजों का आर्थिक शोषण करने के साथ ही अप्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा इलाज और ऑपरेशन करने से मरीजों की जान जा रही है। अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पतालों की जांच करके उनपर कार्रवाई करने के लिए जिला स्तर पर एक टीम बनी है। साथ ही तहसील स्तर पर भी टाॅस्क फोर्स गठित हुई है, जो क्षेत्र के सभी अस्पताल और जांच केंद्र का मानक देखेंगे। मानकविहीन और बिना कागजात के संचालित होते पाए जाने पर केंद्र सील करने के साथ ही संचालक पर केस दर्ज किया जाएगा।
जिला स्तर पर काम करने वाली टीम के लीडर नोडल डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता की जांच में एक ही दिन में नौगढ़ तहसील क्षेत्र में हुई जांच में पांच अस्पताल और क्लीनिक अवैध रूप से संचालित मिले हैं। अगर जांच सही से हुई तो 200 से अधिक अस्पताल और जांच केंद्र पकड़ में आएंगे। ऐसा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है।
तहसील स्तरीय टीम के एसडीएम बनाए गए हैं अध्यक्ष
तहसील स्तर पर गठित की गई जांच टीम में संबंधित तहसील के एसडीएम को मुख्य जिम्मेदार बनाया गया है। इसके अलावा जिला स्तरीय स्वास्थ्य टीम के डॉक्टर व संबंधित क्षेत्र के सीएचसी के अधीक्षक शामिल हैं। जांच के दौरान सभी लोग मौजूद रहेंगे और कार्रवाई करेंगे।
मौके पर जाने वाले टीम करेगी यह जांच
अस्पताल में पहुंचने वाली टीम अस्पताल के पंजीकरण संबंधित कागजात देखेगी। अस्पताल का पंजीकरण किसके लिए है और क्या चल रहा है। मेडिकल स्टोर का लाइसेंस न होते हुए भी मेडिकल स्टोर, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड तो संचालित नहीं हो रहा है। चिकित्सक का बोर्ड लगा है कि नहीं। जिस चिकित्सक का नाम बोर्ड पर अंकित है मौजूद हैं कि नहीं। वहीं, मरीजों के भर्ती करने सहित अन्य मानक की जांच करेंगे। इसके साथ ही अल्ट्रासाउंड और पैथाेलाॅजी की जांच करते समय यह देखेंगे जांच करने वाले रेडियालॉजी हैं कि नहीं। केंद्र बिना रेडियाेलॉजी के तो नहीं चल रहा है। मशीन मानक पूरा कर रही है या नहीं। इसके अलावा अन्य नियमों के बारे में जांच होगी। इसमें गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई के साथ ही जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, बिना पंजीकरण के संचालित होते मिलने पर सील करने के साथ ही केस दर्ज भी दर्ज कराया जाएगा।
कोट
अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पताल और जांच केंद्र पर कार्रवाई के लिए टाॅस्क फोर्स गठित की गई है। इसमें जिला मुख्यालय और तहसील स्तर पर अलग-अलग टीमें गठित हुई हैं। यह टीम जांच करके अवैध रूप से संचालित पाए जाने पर सील करने के साथ ही केस दर्ज करवाएगी।
-डॉ. नरेंद्र वाजपेयी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सिद्धार्थनगर
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अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों में दम तोड़ रहे मरीज
सिद्धार्थनगर। अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पतालों में मरीजों की मौत और हंगामे के बाद प्रशासन ने निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुहिम छेड़ दी है। जनपद में बिना लाइसेंस के संचालित होने वाले अस्पतालों की जांच करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए तहसील स्तर पर और मुख्यालय पर टीम गठित की गई है।
मुख्यालय की टीम पूरे जनपद जबकि तहसील स्तरीय टीम अपने-अपने तहसील में अभियान चलाकर कार्रवाई करेगी। एक ही दिन में जिले की टीम ने अवैध रूप से संचालित हो रहे पांच अस्पतालों और क्लीनिक को पकड़ा। सभी को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने के निर्देश हुए हैं।
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यह महज दो ब्लॉक क्षेत्रों की चेकिंग में सामने आया है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि जिले में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से अस्पताल और जांच केंद्र चल रहे हैं। यहां आर्थिक शोषण तो हो ही रहा है मरीजों की जान भी जा रही है।
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हर चौराहे और ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों का बड़ा-बड़ा बोर्ड लगाकर मरीज माफिया मरीजों को झांसे में ले रहे हैं। इसके बाद उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं। अप्रशिक्षित चिकित्सकों के इलाज से लोगों की जान जा रही है।
मुख्यालय पर अफसरों की नाक के नीचे संचालित हो रहे अवैध अस्पताल में बिना जरूरत ऑपरेशन से प्रसूता और नवजात की मौत हो गई। वहीं, एक माह पहले लोटन में बिना कागजात के चल रहे अस्पताल में ऑपरेशन कर देने से एक महिला की जान चली गई। जांच में अस्पताल बिना कागजात के फर्जी तरीके से संचालित पाए गए। इन मामलों में कार्रवाई होने के साथ ही जांच चल रही है।
इसके बाद भी जनपद में बड़े पैमाने पर ऐसे मानकविहीन अस्पताल संचालित हो रहे हैं। जहां मरीजों का आर्थिक शोषण करने के साथ ही अप्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा इलाज और ऑपरेशन करने से मरीजों की जान जा रही है। अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पतालों की जांच करके उनपर कार्रवाई करने के लिए जिला स्तर पर एक टीम बनी है। साथ ही तहसील स्तर पर भी टाॅस्क फोर्स गठित हुई है, जो क्षेत्र के सभी अस्पताल और जांच केंद्र का मानक देखेंगे। मानकविहीन और बिना कागजात के संचालित होते पाए जाने पर केंद्र सील करने के साथ ही संचालक पर केस दर्ज किया जाएगा।
जिला स्तर पर काम करने वाली टीम के लीडर नोडल डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता की जांच में एक ही दिन में नौगढ़ तहसील क्षेत्र में हुई जांच में पांच अस्पताल और क्लीनिक अवैध रूप से संचालित मिले हैं। अगर जांच सही से हुई तो 200 से अधिक अस्पताल और जांच केंद्र पकड़ में आएंगे। ऐसा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है।
तहसील स्तरीय टीम के एसडीएम बनाए गए हैं अध्यक्ष
तहसील स्तर पर गठित की गई जांच टीम में संबंधित तहसील के एसडीएम को मुख्य जिम्मेदार बनाया गया है। इसके अलावा जिला स्तरीय स्वास्थ्य टीम के डॉक्टर व संबंधित क्षेत्र के सीएचसी के अधीक्षक शामिल हैं। जांच के दौरान सभी लोग मौजूद रहेंगे और कार्रवाई करेंगे।
मौके पर जाने वाले टीम करेगी यह जांच
अस्पताल में पहुंचने वाली टीम अस्पताल के पंजीकरण संबंधित कागजात देखेगी। अस्पताल का पंजीकरण किसके लिए है और क्या चल रहा है। मेडिकल स्टोर का लाइसेंस न होते हुए भी मेडिकल स्टोर, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड तो संचालित नहीं हो रहा है। चिकित्सक का बोर्ड लगा है कि नहीं। जिस चिकित्सक का नाम बोर्ड पर अंकित है मौजूद हैं कि नहीं। वहीं, मरीजों के भर्ती करने सहित अन्य मानक की जांच करेंगे। इसके साथ ही अल्ट्रासाउंड और पैथाेलाॅजी की जांच करते समय यह देखेंगे जांच करने वाले रेडियालॉजी हैं कि नहीं। केंद्र बिना रेडियाेलॉजी के तो नहीं चल रहा है। मशीन मानक पूरा कर रही है या नहीं। इसके अलावा अन्य नियमों के बारे में जांच होगी। इसमें गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई के साथ ही जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, बिना पंजीकरण के संचालित होते मिलने पर सील करने के साथ ही केस दर्ज भी दर्ज कराया जाएगा।
कोट
अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पताल और जांच केंद्र पर कार्रवाई के लिए टाॅस्क फोर्स गठित की गई है। इसमें जिला मुख्यालय और तहसील स्तर पर अलग-अलग टीमें गठित हुई हैं। यह टीम जांच करके अवैध रूप से संचालित पाए जाने पर सील करने के साथ ही केस दर्ज करवाएगी।
-डॉ. नरेंद्र वाजपेयी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सिद्धार्थनगर