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Siddharthnagar News: 98 वें बलिदान दिवस पर स्वामी श्रद्धानंद को याद किया
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-बांसी कस्बे के एक मैरिज हाल में कार्यक्रम का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। समाज सुधारक स्वामी श्रद्धानंद के 98 वें बलिदान दिवस पर सोमवार को कस्बा स्थित एक मैरिज हाल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आरएसएस गोरक्षप्रांत के सह प्रांत प्रचारक सुरजीत ने दीप प्रज्ज्वलित किया और उसके बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया।
उन्होंने कहा कि पंजाब प्रांत में जन्मे स्वामी श्रद्धानंद के समय विधर्मियों का बोल बाला था। अन्याय से व्यथित स्वामी जी शिक्षा ग्रहण करते हुए आर्यसमाज से जुड़ गए। वर्ष 1902 में मैकाले शिक्षा पद्धति के विरोध में उन्होंने गुरुकुल की स्थापना हरिद्वार में की और समाज व शिक्षा में सुधार के साथ घर वापसी का कार्य भी कराया। धर्म जागरण समन्वय प्रांत प्रमुख तारकेश्वर ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के बाद भी उनका मिशन थमा नहीं। उनके बताए रास्ते पर चलकर आज भी कार्य किया जा रहा है।
इस दौरान सभाजीत, रामचंद्र मुंशी, राजकुमार अग्रहरि, तुलसी राम, राकेश दूबे, सर्वज्ञ पांडेय, अनुपमा सिंह, अशोक अग्रहरि, रुकुम सिंह, रंजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। समाज सुधारक स्वामी श्रद्धानंद के 98 वें बलिदान दिवस पर सोमवार को कस्बा स्थित एक मैरिज हाल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आरएसएस गोरक्षप्रांत के सह प्रांत प्रचारक सुरजीत ने दीप प्रज्ज्वलित किया और उसके बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया।
उन्होंने कहा कि पंजाब प्रांत में जन्मे स्वामी श्रद्धानंद के समय विधर्मियों का बोल बाला था। अन्याय से व्यथित स्वामी जी शिक्षा ग्रहण करते हुए आर्यसमाज से जुड़ गए। वर्ष 1902 में मैकाले शिक्षा पद्धति के विरोध में उन्होंने गुरुकुल की स्थापना हरिद्वार में की और समाज व शिक्षा में सुधार के साथ घर वापसी का कार्य भी कराया। धर्म जागरण समन्वय प्रांत प्रमुख तारकेश्वर ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के बाद भी उनका मिशन थमा नहीं। उनके बताए रास्ते पर चलकर आज भी कार्य किया जा रहा है।
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इस दौरान सभाजीत, रामचंद्र मुंशी, राजकुमार अग्रहरि, तुलसी राम, राकेश दूबे, सर्वज्ञ पांडेय, अनुपमा सिंह, अशोक अग्रहरि, रुकुम सिंह, रंजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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