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सोनौली में सुविधा पर्ची, ककरहवा में भंसार

Sun, 10 Jul 2022 11:21 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 10 Jul 2022 11:21 PM IST
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Suvidha slip in Sonauli, Bhansar in Kakarhwa
सोनौली में सुविधा पर्ची, ककरहवा में भंसार
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ककरहवा (सिद्धार्थनगर)। ककरहवा सीमा के रास्ते गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी जाने वाले भारतीय पर्यटकों को अब जेब ढीली करनी पड़ रही है। पर्यटकों को मोटरसाइकिल या चार पहिया वाहन से लुंबिनी तक जाने के लिए अब भंसार बनवाने की जरूरत पड़ रही है। वहीं, महराजगंज में सोनौली सीमा पर निर्धारित समय तक सुविधा पर्ची के माध्यम से वाहनों को बिना भंसार के नेपाल सीमा में प्रवेश करने की अनुमति मिल रही है।
लुंबिनी स्थित कालीदह नेपाल भंसार पर सुविधा पर्ची नहीं बनने की वजह से लुंबिनी जाने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी कमी भी आ रही है। बावजूद इसके, अब तक नेपाल सरकार ने पुन: यहां से सुविधा पर्ची बनाने पर विचार नहीं किया है। भारत-नेपाल के बीच एक समझौते के तहत ककरहवा सीमा के रास्ते लुंबिनी तक जाने के लिए भारतीयों को मोटरसाइकिल या चार पहिया वाहन का भंसार बनवाने की जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन कोरोना संक्रमण काल समाप्त होने के बाद सीमा खुली तो बीते फरवरी से नेपाल ने ककरहवा सीमा पर सभी वाहनों के लिए भंसार अनिवार्य कर दिया।
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नेपाल से भारत आने वालों को नौगढ़ तक जाने के लिए कोई शुल्क देने की जरूरत नहीं थी। भारत तो अब भी अपने पूर्व समझौते का पालन कर रहा है। नेपाल सरकार ने समझौते से हटकर ककरहवा सीमा पर भंसार बनवाने का नियम लागू कर दिया है। अब इस रास्ते लुंबिनी तक जाने के लिए भी भारतीय पर्यटकों को मोटरसाइकिल के लिए 150 नेपाली रुपये तथा चार पहिया वाहन के लिए 500 नेपाली रुपये देकर भंसार जमा करना पड़ रहा है। नेपाल सरकार के इस रवैये के कारण भारत के सीमा क्षेत्र के लोगों में काफी रोष है।
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पर्यटकों की संख्या में फिर आने लगी कमी आ रही है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा लुंबिनी गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से लुंबिनी की पहचान वैश्विक स्तर पर और बढ़ी। उसके बाद यहां पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई थी। कस्टम अधीक्षक अंगद ने बताया कि नेपाल से भारत में प्रवेश करने वाले वाहनों का सीमा शुल्क नहीं लिया जाता है। फरवरी 2022 से नेपाल सीमा में लुंबिनी के लिए सुविधा पर्ची बंद हो गई है।

घट रही है वाहनों की तादाद
पहले ककरहवा के रास्ते प्रतिदिन औसतन 65 से 75 चार पहिया वाहन ककरहवा के रास्ते नेपाल जाते थे। अब यह संख्या फिर घट कर 40-50 तक पहुंच गई है। ककरहवा के रमेश जायसवाल, संजय अग्रहरि, जवाहर लाल वर्मा, पिंटू तिवारी, प्रेम कौशल ने बताया कि ककरहवा सीमा पर लुंबिनी के लिए भी भंसार शुरू होने से दिक्कत आ रही है। सीमावर्ती इलाके में भारत व नेपाल के लोगों के बीच रिश्तेदारी है।
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