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जलमग्न गांवों में नहीं पहुंची मदद

Sat, 30 Jul 2016 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Sat, 30 Jul 2016 10:35 PM IST
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Submerged villages did not help
नाव से सुरक्षित स्‍थान जाते उसका क्षेत्र के ग्राम भलूहा के बाढ़ पीड़ित। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन लगातार राहत सामग्री भेजने के दावे कर रहा है, जबकि हकीकत इससे इतर है। बांसी तहसील क्षेत्र के मैरुंड हुए गांवों में चार दिनों बाद भी कोई मदद नहीं पहुंची है। ग्रामीण भूजा के भरोसे हैं। इसका इंतजाम भी उन्हें खुद करना पड़ रहा है। भूख से व्याकुल लोगों में प्रशासन के प्रति कड़ी नाराजगी है तो जिंदा रहने की चुनौती भी। मैरुंड हुए इन गांवों में आवागमन के लिए लगाई गई नाव भी अपर्याप्त हैं। दो-दो गांव के लिए एक नाव लगाई गई है। नगवा गांव में तो अब तक कोई मदद नहीं पहुंची है। हालांकि इन तमाम शिकायतों के बावजूद सरकारी तंत्र हर गांव में मदद पहुंचाने का राग अलाप रहा है।
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जिले में सबसे ज्यादा कहर राप्ती और बूढ़ी राप्ती का है। दोनों नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण पांच तहसील क्षेत्र के 50 गांव मैरुंड चिह्नित किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि इन गांवों में लगातार राहत सामग्री भेजवाई जा रही है। खाद्य पदार्थ, दवा, पानी की आपूर्ति जारी है। शनिवार को इन गांवों में मदद के लिए विभिन्न संस्थाएं पहुंची तो प्रशासन की नाकामी की अलग तस्वीर नजर आई।
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पीड़ितों ने एक स्वर में चार दिनों से कोई मदद न मिलने का दुखड़ा रोया। राप्ती-बूढ़ी राप्ती के कछार में स्थित बांसी के कम्हरिया खुर्द, कम्हरिया बुजुर्ग, डडिया, भगौतापुर, नवतलापाल गांव की स्थिति बदतर है। डडिया, यहां दो गांवों के लिए एक नाव लगाई गई है। नगवा गांव में मदद पहुंचानी तो दूर अब तक कोई नाव भी सुलभ नहीं हो पाई है। प्रभावित गांव की मालती, कुंदन चौधरी, रामू, रामायन, राजेश का कहना है कि अब तक प्रशासन को कोई व्यक्ति नहीं आया।
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खुद भूजा भूनकर पेट भर रहे हैं। इस गांव में शनिवार को दोपहर बाद लेखपाल पहुंचा। इस संबंध में सीडीओ अखिलेश तिवारी का कहना था कि पहली प्राथमिकता बाढ़ पर नियंत्रण की थी। अब पानी स्थिर होने के बाद गांवों में टीम राहत सामग्री के साथ पहुंचाई जा रही है।
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