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कुछ व्रती लेटते हुए घाट तक पहुंचे
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कटरिया बाबू में रामजानकी मन्दिर के सामने छठ की पूजा करने के लिए एक किलोमीटर लेटते हुए जाती श्रद्ध
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
कुछ व्रती लेटते हुए घाट तक पहुंचे
तुलसियापुर। क्षेत्र के रविवार शाम धार्मिक माहौल बन गया। पूजा की बहंगी लेकर श्रद्धालु दोपहर बाद नदियों और पोखरों की ओर चल पड़े। गीत गाती महिलाओं की टोलियां भी घाटों पर पहुंचने लगीं। व्रती महिलाएं नंगे पांव जा रही थी। कुछ लोग साष्टांग लेटते हुए घाटों तक पहुंचे। निर्जल व्रतधारी महिलाएं नदी में कमर भर पानी में खड़ी हो गईं। इंतजार था तो सूर्य के नारंगी होने का। जैसे ही वह क्षण आया दूध और जल से अर्घ्य दिया गया और आरती उतारी गई। सूर्योपासना के लोक पर्व छठ के चौथे दिन रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया।
रास्ते भर छठ के गीत गाए जाते रहे। पूरा क्षेत्र ही गीतों से गूंजता रहा। बढ़नी ब्लॉक के पिकौरा के पास घोरही नदी के तट व परसा में एनएच के किनारे स्वर्गीय रीता देवी छठ घाट औदही कलां, चरिहवां, मानपुर, परसा, मदरहिया, केवटलिया, जलापुरवा, तुलसियापुर, पड़रिया, अहिरौला आदि गांवों के श्रद्धालुओं से पट गया। पहले से बनाई गई वेदियों पर गन्ने का मंडप तैयार किया गया। गोधूलि बेला में आरती के दीपों से घाट जगमग हो गए। घरों और घाटों पर रतजगा चलता रहा। सबको सूर्योदय की प्रतीक्षा थी। सोमवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद 36 घंटे तक चले निर्जल व्रत का पारण होगा।
सरयू नहर के किनारे मेले जैसा दृश्य
पथरा। छठ पर्व पर रविवार को क्षेत्र के सरयू नहर पर मेले जैसा दृश्य उपस्थित हो गया। नहर के दोनों तरफ रंग-बिरंगी वेदियां सजाकर व्रती महिलाएं पूजा कीं। शाम ढलने से पहले श्रद्धालुओं का जत्था सरयू नहर की तरफ बढ़ने लगा। अस्ताचलगामी सूर्य को नमन कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। राज कुमार चौरसिया, ग्राम प्रधान मक्खन लाल, ग्राम प्रधान अखिलेश सिंह, बाबा जगदीश दास, सोनू दूबे, रमेश विश्वकर्मा, हरिओम पांडेय मौजूद थे।
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तुलसियापुर। क्षेत्र के रविवार शाम धार्मिक माहौल बन गया। पूजा की बहंगी लेकर श्रद्धालु दोपहर बाद नदियों और पोखरों की ओर चल पड़े। गीत गाती महिलाओं की टोलियां भी घाटों पर पहुंचने लगीं। व्रती महिलाएं नंगे पांव जा रही थी। कुछ लोग साष्टांग लेटते हुए घाटों तक पहुंचे। निर्जल व्रतधारी महिलाएं नदी में कमर भर पानी में खड़ी हो गईं। इंतजार था तो सूर्य के नारंगी होने का। जैसे ही वह क्षण आया दूध और जल से अर्घ्य दिया गया और आरती उतारी गई। सूर्योपासना के लोक पर्व छठ के चौथे दिन रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया।
रास्ते भर छठ के गीत गाए जाते रहे। पूरा क्षेत्र ही गीतों से गूंजता रहा। बढ़नी ब्लॉक के पिकौरा के पास घोरही नदी के तट व परसा में एनएच के किनारे स्वर्गीय रीता देवी छठ घाट औदही कलां, चरिहवां, मानपुर, परसा, मदरहिया, केवटलिया, जलापुरवा, तुलसियापुर, पड़रिया, अहिरौला आदि गांवों के श्रद्धालुओं से पट गया। पहले से बनाई गई वेदियों पर गन्ने का मंडप तैयार किया गया। गोधूलि बेला में आरती के दीपों से घाट जगमग हो गए। घरों और घाटों पर रतजगा चलता रहा। सबको सूर्योदय की प्रतीक्षा थी। सोमवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद 36 घंटे तक चले निर्जल व्रत का पारण होगा।
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सरयू नहर के किनारे मेले जैसा दृश्य
पथरा। छठ पर्व पर रविवार को क्षेत्र के सरयू नहर पर मेले जैसा दृश्य उपस्थित हो गया। नहर के दोनों तरफ रंग-बिरंगी वेदियां सजाकर व्रती महिलाएं पूजा कीं। शाम ढलने से पहले श्रद्धालुओं का जत्था सरयू नहर की तरफ बढ़ने लगा। अस्ताचलगामी सूर्य को नमन कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। राज कुमार चौरसिया, ग्राम प्रधान मक्खन लाल, ग्राम प्रधान अखिलेश सिंह, बाबा जगदीश दास, सोनू दूबे, रमेश विश्वकर्मा, हरिओम पांडेय मौजूद थे।
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