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Siddharthnagar News: तुलसी साहित्य लोकमंगल, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा
Wed, 19 Aug 2026 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 19 Aug 2026 11:23 PM IST
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- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में तुलसी जयंती पर गोष्ठी, रामचरितमानस के मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता पर हुई चर्चा
सिद्धार्थनगर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, गोरक्षप्रांत और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर हिंदी विभाग में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने तुलसी साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता, रामचरितमानस में निहित मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता, लोकमंगल और राष्ट्रीय चेतना पर विचार रखे।
हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. हरीश कुमार शर्मा ने कहा कि तुलसीदास की रचनाएं आज भी समाज के लिए प्रासंगिक और उपयोगी हैं। उन्होंने लोकमंगल की जिस भावना को साहित्य में अभिव्यक्त किया, वह सदियों तक अनुकरणीय रहेगी। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता, स्त्री-गरिमा, नैतिकता और लोक कल्याण का व्यापक चिंतन दिखाई देता है।
अध्यक्षता करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सत्येंद्र कुमार दुबे ने कहा कि तुलसीदास ने मानवीय संवेदनाओं और प्रवृत्तियों को आधार बनाकर साहित्य की रचना की। वैज्ञानिक और तकनीकी युग में भी उनका साहित्य समाज को सकारात्मक दिशा देने में सक्षम है। रामचरितमानस में प्रेम, करुणा, त्याग, मर्यादा और लोकमंगल की भाव भूमि दिखाई देती है।
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अंग्रेजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हृदय कांत पांडेय ने कहा कि राम राष्ट्र की मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और आदर्श के प्रतीक हैं। रामचरितमानस में राष्ट्रीय चेतना के साथ आदर्श शासन, आदर्श समाज और लोक कल्याण की परिकल्पना दिखाई देती है। सूचना और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने कहा कि तुलसी की वाणी और विचार आज भी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपयोगी हैं। विद्यार्थियों को व्यक्तिगत विकास के साथ समाज और राष्ट्र के विकास के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए।
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने तुलसी के लोकमंगल चिंतन को समकालीन बताया। भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल गुप्ता ने कहा कि तुलसी साहित्य सामाजिक समरसता और सहिष्णुता की भावना को मजबूत करता है। हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रेनू त्रिपाठी ने कहा कि तुलसी साहित्य मानवता, नैतिकता, करुणा और जीवन-मूल्यों की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में छात्राओं पुष्पा, शशिकला यादव, किरण लोधी, सानिया अग्रहरि, शृंखला यादव और कुशल त्रिपाठी ने भी विचार रखे। संचालन एमए के विद्यार्थी अतुल उपाध्याय ने किया। आभार डाॅ. जय सिंह यादव ने जताया। इस दौरान विभिन्न विभागों के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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सिद्धार्थनगर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, गोरक्षप्रांत और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर हिंदी विभाग में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने तुलसी साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता, रामचरितमानस में निहित मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता, लोकमंगल और राष्ट्रीय चेतना पर विचार रखे।
हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. हरीश कुमार शर्मा ने कहा कि तुलसीदास की रचनाएं आज भी समाज के लिए प्रासंगिक और उपयोगी हैं। उन्होंने लोकमंगल की जिस भावना को साहित्य में अभिव्यक्त किया, वह सदियों तक अनुकरणीय रहेगी। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता, स्त्री-गरिमा, नैतिकता और लोक कल्याण का व्यापक चिंतन दिखाई देता है।
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अध्यक्षता करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सत्येंद्र कुमार दुबे ने कहा कि तुलसीदास ने मानवीय संवेदनाओं और प्रवृत्तियों को आधार बनाकर साहित्य की रचना की। वैज्ञानिक और तकनीकी युग में भी उनका साहित्य समाज को सकारात्मक दिशा देने में सक्षम है। रामचरितमानस में प्रेम, करुणा, त्याग, मर्यादा और लोकमंगल की भाव भूमि दिखाई देती है।
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अंग्रेजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हृदय कांत पांडेय ने कहा कि राम राष्ट्र की मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और आदर्श के प्रतीक हैं। रामचरितमानस में राष्ट्रीय चेतना के साथ आदर्श शासन, आदर्श समाज और लोक कल्याण की परिकल्पना दिखाई देती है। सूचना और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने कहा कि तुलसी की वाणी और विचार आज भी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपयोगी हैं। विद्यार्थियों को व्यक्तिगत विकास के साथ समाज और राष्ट्र के विकास के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए।
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने तुलसी के लोकमंगल चिंतन को समकालीन बताया। भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल गुप्ता ने कहा कि तुलसी साहित्य सामाजिक समरसता और सहिष्णुता की भावना को मजबूत करता है। हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रेनू त्रिपाठी ने कहा कि तुलसी साहित्य मानवता, नैतिकता, करुणा और जीवन-मूल्यों की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में छात्राओं पुष्पा, शशिकला यादव, किरण लोधी, सानिया अग्रहरि, शृंखला यादव और कुशल त्रिपाठी ने भी विचार रखे। संचालन एमए के विद्यार्थी अतुल उपाध्याय ने किया। आभार डाॅ. जय सिंह यादव ने जताया। इस दौरान विभिन्न विभागों के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।