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Siddharthnagar News: मानसून की विदाई में तीन सप्ताह बचे, 34 फीसदी बारिश का कोटा बाकी
Thu, 10 Sep 2026 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:11 AM IST
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कलेक्ट्रेट के सामने बारिश के दौरान लाइट जलाकर आवागमन करते वाहन
- 8 सितंबर तक 597 मिमी बारिश, सामान्य 906.2 मिमी के मुकाबले 309.2 मिमी कम
- विदाई से पहले बारिश के कुछ और दौर की उम्मीद, अगले दिनों में 25 मिमी तक बारिश का अनुमान
सिद्धार्थनगर। मानसून की विदाई का समय करीब आ रहा है। सीजन के अब करीब तीन सप्ताह शेष हैं। एक जून से आठ सितंबर तक जिले में 597 मिमी बारिश दर्ज की गई है जबकि इस अवधि तक सामान्य बारिश 906.2 मिमी होनी चाहिए थी। सामान्य के मुकाबले 309.2 मिमी बारिश कम हुई है यानी 34 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। बचे दिनों में इतनी बारिश होने के बाद कोटा पूरा हो पाएगा।
इस बार मानसून के दौरान बारिश का वितरण भी एक जैसा नहीं रहा। कई चरणों में जिले के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई लेकिन लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से कुल आंकड़ा सामान्य से पीछे रह गया। अब सितंबर के बचे दिनों में होने वाली बारिश ही वर्षा की कमी को कुछ हद तक पूरा कर सकती है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश के कुछ और दौर की संभावना जताई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दिनों में करीब 25 मिमी तक बारिश होने का अनुमान है। यदि अनुमान के मुताबिक बारिश होती है तो इससे कुल वर्षा के आंकड़े में कुछ सुधार जरूर आएगा लेकिन सामान्य बारिश के स्तर तक पहुंचने के लिए इससे कहीं अधिक बारिश की जरूरत होगी।
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अब मौसम पर किसानों के साथ-साथ कृषि विभाग की भी नजर है। जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पांडेय के अनुसार सितंबर में होने वाली बारिश से खेतों में नमी की स्थिति बेहतर हो सकती है। धान की फसल के लिए यह बारिश उपयोगी साबित हो सकती है। वहीं, यदि बारिश सामान्य से कम रही तो मानसून समाप्त होने के बाद भी जिले में वर्षा घाटा बना रहेगा।
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विदाई से पहले बारिश पर नजर
- मानसून सीजन सामान्य तौर पर एक जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। ऐसे में आठ सितंबर के बाद बारिश के लिए करीब तीन सप्ताह का समय अभी बचा है। इसी अवधि में होने वाली बारिश जिले के अंतिम मानसूनी आंकड़े को तय करेगी। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश के कुछ दौर बन सकते हैं। जानकार बताते हैं कि यदि सितंबर के बचे दिनों में लगातार बारिश होती है तो जिले में वर्षा घाटा कम होने के साथ खेतों में नमी भी बढ़ेगी। खासकर धान की फसल के लिए सितंबर की बारिश महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहीं, बारिश का लंबा अंतराल रहने पर किसानों को सिंचाई के दूसरे साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
इस बार मानसून के दौरान जून और जुलाई के कई चरणों में अपेक्षाकृत कम बारिश दर्ज होने से वर्षा घाटा बढ़ा। बाद में हुई बारिश से स्थिति में कुछ सुधार आया लेकिन सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए पर्याप्त बारिश नहीं हो सकी। अब मानसून की विदाई से पहले अच्छी बारिश होती है तो घाटे की भरपाई की उम्मीद मजबूत होगी।
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नजर आंकड़ों पर
सामान्य बारिश : 906.2 मिमी
वास्तविक बारिश : 597 मिमी
बारिश की कमी : 309.2 मिमी
सामान्य से कमी : 34 फीसदी
मानसून सीजन : 1 जून से 30 सितंबर
शेष समय : करीब तीन सप्ताह
आगामी दिनों में संभावित बारिश : 25 मिमी तक
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- विदाई से पहले बारिश के कुछ और दौर की उम्मीद, अगले दिनों में 25 मिमी तक बारिश का अनुमान
सिद्धार्थनगर। मानसून की विदाई का समय करीब आ रहा है। सीजन के अब करीब तीन सप्ताह शेष हैं। एक जून से आठ सितंबर तक जिले में 597 मिमी बारिश दर्ज की गई है जबकि इस अवधि तक सामान्य बारिश 906.2 मिमी होनी चाहिए थी। सामान्य के मुकाबले 309.2 मिमी बारिश कम हुई है यानी 34 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। बचे दिनों में इतनी बारिश होने के बाद कोटा पूरा हो पाएगा।
इस बार मानसून के दौरान बारिश का वितरण भी एक जैसा नहीं रहा। कई चरणों में जिले के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई लेकिन लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से कुल आंकड़ा सामान्य से पीछे रह गया। अब सितंबर के बचे दिनों में होने वाली बारिश ही वर्षा की कमी को कुछ हद तक पूरा कर सकती है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश के कुछ और दौर की संभावना जताई है।
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मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दिनों में करीब 25 मिमी तक बारिश होने का अनुमान है। यदि अनुमान के मुताबिक बारिश होती है तो इससे कुल वर्षा के आंकड़े में कुछ सुधार जरूर आएगा लेकिन सामान्य बारिश के स्तर तक पहुंचने के लिए इससे कहीं अधिक बारिश की जरूरत होगी।
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अब मौसम पर किसानों के साथ-साथ कृषि विभाग की भी नजर है। जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पांडेय के अनुसार सितंबर में होने वाली बारिश से खेतों में नमी की स्थिति बेहतर हो सकती है। धान की फसल के लिए यह बारिश उपयोगी साबित हो सकती है। वहीं, यदि बारिश सामान्य से कम रही तो मानसून समाप्त होने के बाद भी जिले में वर्षा घाटा बना रहेगा।
विदाई से पहले बारिश पर नजर
- मानसून सीजन सामान्य तौर पर एक जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। ऐसे में आठ सितंबर के बाद बारिश के लिए करीब तीन सप्ताह का समय अभी बचा है। इसी अवधि में होने वाली बारिश जिले के अंतिम मानसूनी आंकड़े को तय करेगी। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश के कुछ दौर बन सकते हैं। जानकार बताते हैं कि यदि सितंबर के बचे दिनों में लगातार बारिश होती है तो जिले में वर्षा घाटा कम होने के साथ खेतों में नमी भी बढ़ेगी। खासकर धान की फसल के लिए सितंबर की बारिश महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहीं, बारिश का लंबा अंतराल रहने पर किसानों को सिंचाई के दूसरे साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
इस बार मानसून के दौरान जून और जुलाई के कई चरणों में अपेक्षाकृत कम बारिश दर्ज होने से वर्षा घाटा बढ़ा। बाद में हुई बारिश से स्थिति में कुछ सुधार आया लेकिन सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए पर्याप्त बारिश नहीं हो सकी। अब मानसून की विदाई से पहले अच्छी बारिश होती है तो घाटे की भरपाई की उम्मीद मजबूत होगी।
नजर आंकड़ों पर
सामान्य बारिश : 906.2 मिमी
वास्तविक बारिश : 597 मिमी
बारिश की कमी : 309.2 मिमी
सामान्य से कमी : 34 फीसदी
मानसून सीजन : 1 जून से 30 सितंबर
शेष समय : करीब तीन सप्ताह
आगामी दिनों में संभावित बारिश : 25 मिमी तक