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Siddharthnagar News: खेत है ही नहीं, खाद से लहलहाई कालाबाजारी की फसल
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सिद्धार्थनगर। खाद के लिए जिले में मचे हाहाकार के बीच शुरू हुई जांच में चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। जांच में 20 ऐसे किसानों के नाम सामने आए हैं जिनके पास खेती के लिए जमीन ही नहीं है जबकि उनके नाम से 50 बोरी तक खाद की खरीद रिकॉर्ड में दर्ज है। कालाबाजारी को सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया है। 99 किसानों के रकबे की जांच में 77 संदिग्ध मिले हैं।
प्रशासन के तमाम दावों के बीच जिले में खाद की किल्लत बरकरार है। एक-एक बोरी के लिए किसान किसान समितियों पर मशक्कत करते नजर आ रहे हैं। कृषि मंत्री के निरीक्षण में निजी दुकान में खाद की बिक्री में अनियमितता उजागर हो चुकी है।
इसके बाद जिलाधिकारी ने अधिक खाद खरीदने वाले किसानों और बिक्री करने वाले दुकानदारों की रैंडम जांच करने के निर्देश दिए थे। जिला कृषि अधिकारी की रिपोर्ट पर जून और जुलाई में अधिक मात्रा में खाद खरीदने वाले ऐसे 99 किसानों के नाम सामने आए, जिनके नाम से 30 से 50 बोरी तक खाद की खरीद हुई थी। इनके रकबे की जांच शुरू हुई तो पता चला कि इनमें 20 किसानों के नाम कृषि योग्य भूमि ही नहीं।
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इन किसानों ने खुद कालाबाजारी के लिए खाद रख ली या फिर दुकानदार ने खेल किया, अब यह जांच में सामने आएगा। खाद बिक्री करने वाले 45 दुकानदारों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है। जिनके नाम से खेत ही नहीं हैं, उन्होंने खाद कैसे खरीदी है, इसकी जानकारी मांगी गई है। जवाब मिलने के बाद गड़बड़ी की पुष्टि होने पर केस दर्ज कराया जाएगा। मामला सामने आने के बाद अन्य दुकानदारों की सांसें अटक गई हैं।
धंधेबाजों ने व्यवस्था का निकाल लिया तोड़ : खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए बिक्री का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था की गई है। रजिस्टर में एंट्री के साथ ऑनलाइन भी डाटा अपडेट किया जाना है। किसान का मोबाइल नंबर, आधार नंबर भी दर्ज करना होता है। जब दुकानों की जांच की गई तो खाद के उपलब्ध स्टॉक और दर्ज रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। खाद के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ दुकानदारों ने दो रजिस्टर रखे हैं। एक में काम करते हैं जबकि दूसरा दिखाने के लिए पूरे आकड़े के साथ रखते हैं।
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प्रशासन के तमाम दावों के बीच जिले में खाद की किल्लत बरकरार है। एक-एक बोरी के लिए किसान किसान समितियों पर मशक्कत करते नजर आ रहे हैं। कृषि मंत्री के निरीक्षण में निजी दुकान में खाद की बिक्री में अनियमितता उजागर हो चुकी है।
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इसके बाद जिलाधिकारी ने अधिक खाद खरीदने वाले किसानों और बिक्री करने वाले दुकानदारों की रैंडम जांच करने के निर्देश दिए थे। जिला कृषि अधिकारी की रिपोर्ट पर जून और जुलाई में अधिक मात्रा में खाद खरीदने वाले ऐसे 99 किसानों के नाम सामने आए, जिनके नाम से 30 से 50 बोरी तक खाद की खरीद हुई थी। इनके रकबे की जांच शुरू हुई तो पता चला कि इनमें 20 किसानों के नाम कृषि योग्य भूमि ही नहीं।
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इन किसानों ने खुद कालाबाजारी के लिए खाद रख ली या फिर दुकानदार ने खेल किया, अब यह जांच में सामने आएगा। खाद बिक्री करने वाले 45 दुकानदारों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है। जिनके नाम से खेत ही नहीं हैं, उन्होंने खाद कैसे खरीदी है, इसकी जानकारी मांगी गई है। जवाब मिलने के बाद गड़बड़ी की पुष्टि होने पर केस दर्ज कराया जाएगा। मामला सामने आने के बाद अन्य दुकानदारों की सांसें अटक गई हैं।
धंधेबाजों ने व्यवस्था का निकाल लिया तोड़ : खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए बिक्री का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था की गई है। रजिस्टर में एंट्री के साथ ऑनलाइन भी डाटा अपडेट किया जाना है। किसान का मोबाइल नंबर, आधार नंबर भी दर्ज करना होता है। जब दुकानों की जांच की गई तो खाद के उपलब्ध स्टॉक और दर्ज रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। खाद के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ दुकानदारों ने दो रजिस्टर रखे हैं। एक में काम करते हैं जबकि दूसरा दिखाने के लिए पूरे आकड़े के साथ रखते हैं।