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Siddharthnagar News: रजिस्टर और स्टाॅक में अंतर से होता है खेल

Mon, 18 Aug 2025 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 18 Aug 2025 11:27 PM IST
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Siddharthnagar News : The game is played due to the difference between register and stock
- डीएम के निरीक्षण में अनियमितता सामने आने पर 12 दुकानदारों पर दर्ज हुआ था केस, कृषि मंत्री के निरीक्षण में खुली पोल
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सिद्धार्थनगर। जिले में खाद की किल्लत और कालाबाजारी के मामले में जिलाधिकारी के ताबड़तोड़ छाते और निरीक्षण में बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर हुई थी। इसमें एक्शन लेते हुए डीएम ने 12 दुकानदारों पर केस दर्ज करवाया था। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही रविवार को लोटन कस्बे में खाद की दुकान के निरीक्षण में गड़बड़ी करने की पोल ही खुल गई। बिना खाद लिए ही किसान के नाम से खाद खारिज करने की बात सामने आई। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस प्रकार की गड़बड़ी करके खाद की कालाबाजारी की गई होगी। तभी जनपद में खाद की किल्लत हो गई और डीएम को टीम बनाकर फील्ड में उतारना पड़ा। अगर जांच हो तो बड़े पैमाने पर गोलमाल उजागर होगा।
सामने आया अनियमितता का सच

धान की रोपाई के बीच खाद की मांग बढ़ी तो किसान परेशान हो उठे। समितियों पर लंबी कतार लगने लगी, इसके बाद भी किसानों को यूरिया और डीएपी नहीं मिल पा रहा था। जब हाहाकर मचा और किल्लत होने लगी तो जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर खुद मैदान में उतर गए। धड़ाधड़ निजी दुकानों की जांच शुरु की तो सारे नियम और कायदे हवा में मिले। स्टाॅक रजिस्टर में कुछ और मौके पर कुछ और कागजों में असमानता, रजिस्टर और मशीन के कार्य में अंतर सहित कई खामियां उजागर हुई। इसके बाद एक-एक करके 12 निजी दुकानदारों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज करवाया। इसमें एक आरोपी दुकानदार जेल भी गया। जबकि, दो केस पहले ही दर्ज हुए थे जो बार्डर पर नेपाल में तस्करी के लिए रखा हुआ मिला था। केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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ऑनलाइन दर्ज होना है बिक्री का रिकॉर्ड
खाद की कालाबाजारी न हाेने पाए इसे रोकने के लिए वितरण में डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। इसमें रजिस्टर में इंट्री के साथ ऑनलाइन भी अपडेट करना है। किसान का मोबाइल नंबर, आधार कार्ड नंबर भी दर्ज करना होता है। लेकिन, जब दुकानों की जांच की गई तो खाद के मौजूद स्टॉक और अभिलेख में अंतर पाया गया। सूत्रों की मानें तो दो प्रकार के रजिस्टर रखे जाते हैं, जिसमें इंट्री की जाती है। एक रजिस्टर को सरकारी विभाग को दिखाया जाता है। जबकि, दूसरे से काम किया जाता है। पूरी अनियमितता बताने और गड़बड़ी करने के खेल को विभागीय गठजोड़ में किया जाता है। वहीं, विभाग से जुड़े लोगों की माने तो आवंटन से लेकर वितरण तक में नियमित जांच होती है। बिक्री और मौजूदा स्टॉक देखा जाता है, बाकायदा उसे नोट किया जाता है। अगर इतना हो रहा था तो अनियमितता कैसी हो रही थी। अगर नहीं किया जा रहा था तो कहीं न कहीं विभागीय लोगों की जानकारी में चल रहा था। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि गड़बड़ी करने में पूरा सहयोग है। कमोबेश पूरे जनपद में इसी प्रकार से गड़बड़ी की गई है, तभी खाद के लिए किसानों को किल्लत से जूझना पड़ रहा है।
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