{"_id":"68a36a313787c7842a051200","slug":"siddharthnagar-news-testing-and-vaccination-are-necessary-during-pregnancy-superintendent-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1003-143017-2025-08-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"गर्भावस्था के दौरान जांच व टीकाकरण जरूरी: अधीक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गर्भावस्था के दौरान जांच व टीकाकरण जरूरी: अधीक्षक
Mon, 18 Aug 2025 11:30 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 18 Aug 2025 11:30 PM IST
विज्ञापन
-भनवापुर के सीएचसी सिरसिया में पीएसएमए के तहत आयोजित शिविर में 194 गर्भवतियों की हुई जांच
भनवापुर। क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में सोमवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। इसमें 194 गर्भवतियों को परामर्श दिया गया, जिसमें से 25 गर्भवतियों में उच्च जोखिम के लक्षण पाए गए। 15 में खून की कमी पाए जाने के कारण आयरन-सुक्रोज की डोज दी गई।
अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्त चाप, मधुमेह, फीटस के बेड़े होने, गंभीर एनिमिया, प्लेसेंटा का विकृत व नीचे होने से गर्भवती महिलाओं में जान का खतरा बना रहता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान सोनोग्राफी और चिकित्सीय परामर्श के साथ इलाज बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में उच्च जोखिम वाले खतरे के लक्षण की पहचान जरूरी है, जिससे समय से चिकित्सीय प्रबंधन से जच्चा व बच्चा दोनों को सुरक्षित किया जा सकता है। इस दौरान डॉ. एलबी यादव, डॉ. अनवारूद्दीन, विनय कुमार भारती, अजय पांडेय, ज्योति, प्रेम त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
भनवापुर। क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में सोमवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। इसमें 194 गर्भवतियों को परामर्श दिया गया, जिसमें से 25 गर्भवतियों में उच्च जोखिम के लक्षण पाए गए। 15 में खून की कमी पाए जाने के कारण आयरन-सुक्रोज की डोज दी गई।
अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्त चाप, मधुमेह, फीटस के बेड़े होने, गंभीर एनिमिया, प्लेसेंटा का विकृत व नीचे होने से गर्भवती महिलाओं में जान का खतरा बना रहता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान सोनोग्राफी और चिकित्सीय परामर्श के साथ इलाज बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में उच्च जोखिम वाले खतरे के लक्षण की पहचान जरूरी है, जिससे समय से चिकित्सीय प्रबंधन से जच्चा व बच्चा दोनों को सुरक्षित किया जा सकता है। इस दौरान डॉ. एलबी यादव, डॉ. अनवारूद्दीन, विनय कुमार भारती, अजय पांडेय, ज्योति, प्रेम त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन