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Siddharthnagar News: अहिल्या उद्धार, ताड़का वध का मंचन देखकर हर्षित हुए श्रद्धालु

Sat, 27 Sep 2025 08:13 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 27 Sep 2025 08:13 PM IST
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Siddharthnagar News : Tarka vadh manchan during Ramlila
- भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के गोपिया में चल रहे श्रीरामलीला
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भनवापुर। क्षेत्र के गोपिया में स्वतंत्र जन सेवा और दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में चल रहे रामलीला कार्यक्रम के दूसरे दिन बृहस्पतिवार की रात अहिल्या उद्धार, ताड़का वध की लीला का मंचन हुआ। इसे देखकर श्रद्धालु हर्षित हो गए।

श्रीराम जन्म से आगे दिखाया गया, गुरु वशिष्ठ की ओर से चारों पुत्रों का नामकरण राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के रूप में किया जाता है। उधर विश्वामित्र क्या करते हैं, जहां मारीच और सुबाहु उनका यज्ञ नष्ट कर देते हैं। विश्वामित्र को एहसास होता है कि भगवान विष्णु ने राम के रूप में राजा दशरथ के यहां अवतार लिया है और वह अयोध्या पहुंते हैं। राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा के लिए मांगते हैं। राजा दशरथ से इन्कार करते हैं, लेकिन बाद में गुरु वशिष्ट के कहने पर राम लक्ष्मण को उनको सौंप देते हैं। विश्वामित्र राम लक्ष्मण को लेकर तारक बन में पहुंचते हैं या उन्हें भयंकर राक्षसी ताड़का मिलती है। रामचंद एक ही बाण में उसे मार डालते हैं।
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विश्वामित्र राम लक्ष्मण को लेकर अपने आश्रम में पहुंचते हैं, जहां यह तो होता है। तब तक मारीच और सुबाहु अपनी सेना लेकर पहुंचते हैं राम और लक्ष्मण सभी राक्षसों का वध कर देते हैं। मारीच को बिना नौक का बाण मारकर लंका भेज देते हैं विश्वामित्र का यज्ञ संपन्न हो जाता है कि राजा जनक एक ब्राह्मण से विश्वामित्र के पास बुलावा पत्र भेजते हैं, जिसमें सीता स्वयंवर की बात कही गई थी। विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुर की ओर चल देते हैं कि रास्ते में पत्थर की शिला मिलती है। रामचंद्र उसके बारे में पूछते हैं तब विश्वामित्र कहते हैं कि यह गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या है जो पति के शाप से पत्थर को गई है। इस शिला पर अपना चरण लगा दीजिए, जैसे रामचंद्र चरण स्पर्श करते हैं कि पत्थर की शिला नारी बन जाती है और भगवान का गुणगान करते हुए चली जाती है। विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण जनकपुर पहुंचते हैं, जहां पर राजा जनक उनकी अगवानी करते हैं। इस अवसर पर सुशील पांडेय, मनीष पांडेय, लवकुश यादव, विजय यादव, शिव कुमार गुप्ता, कल्लू, मान बाबू, सहजराम आदि मौजूद रहे।
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