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Siddharthnagar News: निगरानी ने बचाई गर्भवतियों की जान, मृत्युदर में 50 प्रतिशत की गिरावट
Thu, 16 Oct 2025 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 16 Oct 2025 11:56 PM IST
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भनवापुर क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में पीएसएमए शिविर में गर्भवती महिलाओं का जांच कर सुझाव देती च
सिद्धार्थनगर। जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेज में वार रूम की स्थापना के बाद मातृ मृत्यु दर में 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
इसमें वार रूम से मदद लेने वाली महिलाओं ने इसे सकारात्मक व उपयोगी पहल बताया है। उनका कहना है कि विषम परिस्थिति में कॉल करने के बाद दवा इलाज के साथ सारी सुविधाएं मिलीं। सभी महिलाएं और उनके बच्चे स्वस्थ हाल में मिले।
जिले में गलत इलाज, समय से अस्पताल न पहुंचने या फिर किसी माध्यम से निजी अस्पताल, गलत ऑपरेशन और ब्लड की कमी और जांच न होने के कारण गर्भवतियां दम तोड़ दे रही थीं। इसको लेकर हंगामा होता था। वहीं, सरकार के लाखों के प्रयास के बाद मौजूदा भी इसमें कमी नहीं आ रही थी। इसके बाद जिला स्तर पर इस मामले में प्रयास किया गया। जिलाधिकारी ने जनपद और सीएचसी स्तर पर वार रूम बनाया। इसमें 24 घंटे की ड्यूटी लगाई गई।
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सीएचसी सिरसिया के अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा, के अनुसार, वार रूम में 24 घंटे रोस्टर के अनुसार प्रशिक्षित कर्मी की ड्यूटी लगाई जाती है तथा कर्मी को गर्भवतियों के नाम व मोबाइल नंबर उपलब्ध करवाए जाते हैं। गर्भवतियों से उच्च जोखिम के लक्षण की जानकारी ली जाती है।
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इसमें वार रूम से मदद लेने वाली महिलाओं ने इसे सकारात्मक व उपयोगी पहल बताया है। उनका कहना है कि विषम परिस्थिति में कॉल करने के बाद दवा इलाज के साथ सारी सुविधाएं मिलीं। सभी महिलाएं और उनके बच्चे स्वस्थ हाल में मिले।
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जिले में गलत इलाज, समय से अस्पताल न पहुंचने या फिर किसी माध्यम से निजी अस्पताल, गलत ऑपरेशन और ब्लड की कमी और जांच न होने के कारण गर्भवतियां दम तोड़ दे रही थीं। इसको लेकर हंगामा होता था। वहीं, सरकार के लाखों के प्रयास के बाद मौजूदा भी इसमें कमी नहीं आ रही थी। इसके बाद जिला स्तर पर इस मामले में प्रयास किया गया। जिलाधिकारी ने जनपद और सीएचसी स्तर पर वार रूम बनाया। इसमें 24 घंटे की ड्यूटी लगाई गई।
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सीएचसी सिरसिया के अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा, के अनुसार, वार रूम में 24 घंटे रोस्टर के अनुसार प्रशिक्षित कर्मी की ड्यूटी लगाई जाती है तथा कर्मी को गर्भवतियों के नाम व मोबाइल नंबर उपलब्ध करवाए जाते हैं। गर्भवतियों से उच्च जोखिम के लक्षण की जानकारी ली जाती है।