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Siddharthnagar News: एसएनसीयू हाउसफुल...24 बेड पर 26 बच्चे भर्ती
Thu, 18 Dec 2025 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 18 Dec 2025 12:05 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद
सिद्धार्थनगर। पिछले कई दिन से एसएनसीयू वार्ड में नवजात शिशुओं की संख्या बढ़ गई है। पैदा होने के बाद नहीं रोने और समय से पहले जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती करना पड़ रहा है। इससे एसएनसीयू वार्ड फुल हो गया है।
इसमें सीधे आने वाले मरीजों के अलावा निजी और सीएचसी से रेफर किए गए बच्चे भी शामिल हैं। बुधवार को भर्ती बच्चों की संख्या 26 रही।
मेडिकल कॉलेज में बीमार होने वाले नवजात शिशुओं को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करके इलाज किया जाता है। इसमें वह बच्चे शामिल हैं, जिनका जन्म के समय वजन कम है, पीलिया या सांस फूलने की समस्या होती है।
मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में 24 बेड हैं, वर्तमान में लगातार नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, जॉन्डिस दूध न पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इनमें कई ऐसे नवजात भी हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिन के लिए इस वार्ड में रखना पड़ रहा है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता चौधरी ने बताया कि वार्ड में आने वाले नवजात का इलाज किया जा रहा है। वर्तमान समय में इनकी संख्या बढ़ी है, लेकिन प्रतिदिन चार से पांच नवजात स्वस्थ होकर घर भी जा रहे हैं।
प्राचार्य प्रो. राजेश मोहन ने बताया कि एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात का बेहतर ढंग से इलाज किया जाता है। शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। लगभग सभी बच्चे स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं।ड
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इसमें सीधे आने वाले मरीजों के अलावा निजी और सीएचसी से रेफर किए गए बच्चे भी शामिल हैं। बुधवार को भर्ती बच्चों की संख्या 26 रही।
मेडिकल कॉलेज में बीमार होने वाले नवजात शिशुओं को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करके इलाज किया जाता है। इसमें वह बच्चे शामिल हैं, जिनका जन्म के समय वजन कम है, पीलिया या सांस फूलने की समस्या होती है।
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मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में 24 बेड हैं, वर्तमान में लगातार नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, जॉन्डिस दूध न पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इनमें कई ऐसे नवजात भी हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिन के लिए इस वार्ड में रखना पड़ रहा है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता चौधरी ने बताया कि वार्ड में आने वाले नवजात का इलाज किया जा रहा है। वर्तमान समय में इनकी संख्या बढ़ी है, लेकिन प्रतिदिन चार से पांच नवजात स्वस्थ होकर घर भी जा रहे हैं।
प्राचार्य प्रो. राजेश मोहन ने बताया कि एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात का बेहतर ढंग से इलाज किया जाता है। शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। लगभग सभी बच्चे स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं।ड