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Siddharthnagar News: वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल करने के प्रमाण की तलाश, खुदाई फिर शुरू
Sat, 24 Jan 2026 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 24 Jan 2026 12:03 AM IST
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नेपाल के प्राचीन कपिलवस्तु जिले स्थित तिलौराकोट में होता उत्खनन कार्य। स्रोत विज्ञप्ति
- सीमा से सटे नेपाल के तिलौराकोट में शुरू हुआ खोदाई का कार्य
खुनुवां। नेपाल के प्राचीन कपिलवस्तु जिले स्थित ऐतिहासिक तिलौराकोट महल को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल कराने के लिए आवश्यक सबूत जुटाने के उद्देश्य से इस वर्ष एक बार फिर खोदाई और शोध कार्य शुरू कर दिया गया है। पिछले वर्ष पेरिस (फ्रांस) में हुई अंतरराष्ट्रीय स्मारक व स्थल परिषद की बैठक में तिलौराकोट को सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन और प्रमाण मांगे जाने के बाद इसे रेफर कर दिया गया था। इसी क्रम में अब फिर इसकी खोदाई की जा रही है।
तिलौराकोट को राजा शुद्धोधन का महल माना जाता है, जहां भगवान बुद्ध के रूप में प्रसिद्ध सिद्धार्थ गौतम ने 29 वर्ष का समय बिताया था। इसके साक्ष्य तलाशने के लिए यूके की डरहम यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की टीम द्वारा नेपाल के पुरातत्व विभाग और लुंबिनी डेवलपमेंट ट्रस्ट के सहयोग से खोदाई की जा रही है। यह शोध कार्य लगभग 20 दिन तक चलने की संभावना है। पुरातत्व विभाग की निदेशक सौभाग्य प्रधानंका ने बताया कि पिछले वर्ष पेरिस भेजे गए डोजियर के आधार पर तिलौराकोट से जुड़े और ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा था। उन्हीं सबूतों को जुटाने के लिए इस वर्ष दोबारा खोदाई और रिसर्च शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल खोजे गए सेंट्रल कॉम्प्लेक्स की इस बार विस्तार से खोदाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछली बैठक में तिलौराकोट से मिले प्रमाणों को सकारात्मक माना गया था, लेकिन और साक्ष्य मांगते हुए प्रस्ताव को रेफर कर दिया गया। अब उन्हीं अतिरिक्त प्रमाणों को एकत्र कर दोबारा वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल कराने का प्रस्ताव जमा किया जाएगा।
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संभावित वर्ल्ड हेरिटेज साइड में शामिल
पुरातत्व विभाग के अनुसार नेपाल की 15 संभावित वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की सूची में तिलौराकोट को प्रमुख स्थान पर शामिल किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिलने से तिलौराकोट के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक पहचान को मजबूती मिलेगी। खोदाई से जुड़े एक इंटरैक्शन कार्यक्रम में कपिलवस्तु के मुख्य जिला अधिकारी जनार्दन गौतम ने कहा कि मास्टर प्लान के अनुरूप तिलौराकोट का संरक्षण और प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इसे एक आकर्षक दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
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खुनुवां। नेपाल के प्राचीन कपिलवस्तु जिले स्थित ऐतिहासिक तिलौराकोट महल को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल कराने के लिए आवश्यक सबूत जुटाने के उद्देश्य से इस वर्ष एक बार फिर खोदाई और शोध कार्य शुरू कर दिया गया है। पिछले वर्ष पेरिस (फ्रांस) में हुई अंतरराष्ट्रीय स्मारक व स्थल परिषद की बैठक में तिलौराकोट को सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन और प्रमाण मांगे जाने के बाद इसे रेफर कर दिया गया था। इसी क्रम में अब फिर इसकी खोदाई की जा रही है।
तिलौराकोट को राजा शुद्धोधन का महल माना जाता है, जहां भगवान बुद्ध के रूप में प्रसिद्ध सिद्धार्थ गौतम ने 29 वर्ष का समय बिताया था। इसके साक्ष्य तलाशने के लिए यूके की डरहम यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की टीम द्वारा नेपाल के पुरातत्व विभाग और लुंबिनी डेवलपमेंट ट्रस्ट के सहयोग से खोदाई की जा रही है। यह शोध कार्य लगभग 20 दिन तक चलने की संभावना है। पुरातत्व विभाग की निदेशक सौभाग्य प्रधानंका ने बताया कि पिछले वर्ष पेरिस भेजे गए डोजियर के आधार पर तिलौराकोट से जुड़े और ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा था। उन्हीं सबूतों को जुटाने के लिए इस वर्ष दोबारा खोदाई और रिसर्च शुरू की गई है।
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उन्होंने कहा कि पिछले साल खोजे गए सेंट्रल कॉम्प्लेक्स की इस बार विस्तार से खोदाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछली बैठक में तिलौराकोट से मिले प्रमाणों को सकारात्मक माना गया था, लेकिन और साक्ष्य मांगते हुए प्रस्ताव को रेफर कर दिया गया। अब उन्हीं अतिरिक्त प्रमाणों को एकत्र कर दोबारा वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल कराने का प्रस्ताव जमा किया जाएगा।
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संभावित वर्ल्ड हेरिटेज साइड में शामिल
पुरातत्व विभाग के अनुसार नेपाल की 15 संभावित वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की सूची में तिलौराकोट को प्रमुख स्थान पर शामिल किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिलने से तिलौराकोट के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक पहचान को मजबूती मिलेगी। खोदाई से जुड़े एक इंटरैक्शन कार्यक्रम में कपिलवस्तु के मुख्य जिला अधिकारी जनार्दन गौतम ने कहा कि मास्टर प्लान के अनुरूप तिलौराकोट का संरक्षण और प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इसे एक आकर्षक दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया जाए।