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Siddharthnagar News: संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में सुनाया रुक्मिणी विवाह का प्रसंग
Tue, 27 Oct 2026 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:19 PM IST
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- उद्धव संवाद और रुक्मिणी विवाह की कथा सुनकर भक्त हुए भाव विभोर
चिल्हिया। क्षेत्र के बरगदवा चौराहे पर चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन सोमवार शाम कथा वाचक आचार्य महेंद्र नाथ दुबे ने उद्धव संवाद और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना और मानव कल्याण के लिए अवतार लिया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथा वाचक ने बताया कि राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बाल्यकाल से ही भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मानकर उनकी आराधना करती थीं। हालांकि, उनका भाई रुक्मिणी का विवाह राजा शिशुपाल से कराना चाहता था। इससे दुखी होकर रुक्मिणी ने सुदेव नामक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भेजा। उन्होंने संदेश में श्रीकृष्ण से उन्हें स्वीकार करने और किसी अन्य से विवाह न करने की इच्छा व्यक्त की।
कथा के अनुसार, जब रुक्मिणी पार्वती पूजन के लिए मंदिर पहुंची, उसी समय भगवान श्रीकृष्ण उन्हें अपने साथ ले गए। बाद में रीति-रिवाज के साथ दोनों का विवाह संपन्न हुआ। विवाह प्रसंग सुनते ही श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
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कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान शौर्य यादव, विष्णु यादव, अंजनी यादव, आदित्य, अमन, परमात्मा, जयराम और वीरेंद्र वर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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चिल्हिया। क्षेत्र के बरगदवा चौराहे पर चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन सोमवार शाम कथा वाचक आचार्य महेंद्र नाथ दुबे ने उद्धव संवाद और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना और मानव कल्याण के लिए अवतार लिया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथा वाचक ने बताया कि राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बाल्यकाल से ही भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मानकर उनकी आराधना करती थीं। हालांकि, उनका भाई रुक्मिणी का विवाह राजा शिशुपाल से कराना चाहता था। इससे दुखी होकर रुक्मिणी ने सुदेव नामक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भेजा। उन्होंने संदेश में श्रीकृष्ण से उन्हें स्वीकार करने और किसी अन्य से विवाह न करने की इच्छा व्यक्त की।
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कथा के अनुसार, जब रुक्मिणी पार्वती पूजन के लिए मंदिर पहुंची, उसी समय भगवान श्रीकृष्ण उन्हें अपने साथ ले गए। बाद में रीति-रिवाज के साथ दोनों का विवाह संपन्न हुआ। विवाह प्रसंग सुनते ही श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
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कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान शौर्य यादव, विष्णु यादव, अंजनी यादव, आदित्य, अमन, परमात्मा, जयराम और वीरेंद्र वर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।