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Siddharthnagar News: नारद मोह की लीला के मंचन से गूंजा रामलीला परिसर
Tue, 27 Oct 2026 11:17 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:17 PM IST
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- बढ़नी चाफा में 11 दिवसीय रामलीला का शुभारंभ, तपस्या और अहंकार प्रसंग का हुआ मंचन
डुमरियागंज। नगर पंचायत बढ़नी चाफा के रामदीन जूनियर हाईस्कूल परिसर में आदर्श रामलीला समिति की ओर से 11 दिवसीय रामलीला का शुभारंभ सोमवार रात हुआ। पहले दिन नारद मोह प्रसंग का मंचन किया गया। कलाकारों ने नारद जी की तपस्या, कामदेव पर विजय और फिर अहंकार के कारण हुए मोहभंग की कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। मंचन देखकर दर्शक भावविभोर हो गए।
कार्यक्रम का उद्घाटन डुमरियागंज के तहसीलदार अजय कुमार मौर्य ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर किया। नगर पंचायत अध्यक्ष धर्मराज वर्मा और समिति अध्यक्ष रामनेवास यादव ने अंगवस्त्र भेंटकर मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इसके बाद अयोध्या धाम से आए कलाकारों और स्थानीय कलाकारों ने नारद मोह प्रसंग का मंचन शुरू किया।
तपस्या से डोला इंद्र का सिंहासन
मंचन में दिखाया गया कि देवर्षि नारद कठोर तपस्या में लीन हो जाते हैं। उनकी तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है। इससे चिंतित इंद्र उनकी तपस्या भंग कराने के लिए अप्सराओं और अन्य सेवकों को भेजते हैं, लेकिन वे सफल नहीं होते। अंत में कामदेव भी नारद जी की तपस्या भंग करने का प्रयास करते हैं, मगर उन्हें भी सफलता नहीं मिलती।
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अहंकार टूटने पर हुआ अपनी भूल का एहसास
कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद नारद जी के मन में अहंकार उत्पन्न हो जाता है। वह अपनी तपस्या और सामर्थ्य का बखान ब्रह्मा जी, भगवान विष्णु और भगवान शिव के सामने करते हैं। भगवान विष्णु उनके मन में पनप रहे अहंकार को समझ जाते हैं और उसे दूर करने के लिए लीला रचते हैं।
कथा में आगे स्वयंवर का प्रसंग आता है। नारद जी सुंदर रूप पाने की इच्छा से स्वयंवर में पहुंचते हैं, लेकिन भगवान विष्णु की लीला से उनका मुख वानर जैसा हो जाता है। इस कारण उन्हें उपहास का सामना करना पड़ता है। घटना से उनका अहंकार चूर हो जाता है और उन्हें अपनी भूल का एहसास होता है। कलाकारों ने अभिनय और संवादों के माध्यम से इस प्रसंग को जीवंत बना दिया। रामलीला देखने के लिए मौजूद दर्शक अंत तक मंचन से जुड़े रहे।
इस मौके पर राजकुमार गुप्ता, मनीष श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, तिलकराम कसौधन, ध्रुवराज वर्मा, कपिल देव गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। नगर पंचायत बढ़नी चाफा के रामदीन जूनियर हाईस्कूल परिसर में आदर्श रामलीला समिति की ओर से 11 दिवसीय रामलीला का शुभारंभ सोमवार रात हुआ। पहले दिन नारद मोह प्रसंग का मंचन किया गया। कलाकारों ने नारद जी की तपस्या, कामदेव पर विजय और फिर अहंकार के कारण हुए मोहभंग की कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। मंचन देखकर दर्शक भावविभोर हो गए।
कार्यक्रम का उद्घाटन डुमरियागंज के तहसीलदार अजय कुमार मौर्य ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर किया। नगर पंचायत अध्यक्ष धर्मराज वर्मा और समिति अध्यक्ष रामनेवास यादव ने अंगवस्त्र भेंटकर मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इसके बाद अयोध्या धाम से आए कलाकारों और स्थानीय कलाकारों ने नारद मोह प्रसंग का मंचन शुरू किया।
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तपस्या से डोला इंद्र का सिंहासन
मंचन में दिखाया गया कि देवर्षि नारद कठोर तपस्या में लीन हो जाते हैं। उनकी तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है। इससे चिंतित इंद्र उनकी तपस्या भंग कराने के लिए अप्सराओं और अन्य सेवकों को भेजते हैं, लेकिन वे सफल नहीं होते। अंत में कामदेव भी नारद जी की तपस्या भंग करने का प्रयास करते हैं, मगर उन्हें भी सफलता नहीं मिलती।
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अहंकार टूटने पर हुआ अपनी भूल का एहसास
कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद नारद जी के मन में अहंकार उत्पन्न हो जाता है। वह अपनी तपस्या और सामर्थ्य का बखान ब्रह्मा जी, भगवान विष्णु और भगवान शिव के सामने करते हैं। भगवान विष्णु उनके मन में पनप रहे अहंकार को समझ जाते हैं और उसे दूर करने के लिए लीला रचते हैं।
कथा में आगे स्वयंवर का प्रसंग आता है। नारद जी सुंदर रूप पाने की इच्छा से स्वयंवर में पहुंचते हैं, लेकिन भगवान विष्णु की लीला से उनका मुख वानर जैसा हो जाता है। इस कारण उन्हें उपहास का सामना करना पड़ता है। घटना से उनका अहंकार चूर हो जाता है और उन्हें अपनी भूल का एहसास होता है। कलाकारों ने अभिनय और संवादों के माध्यम से इस प्रसंग को जीवंत बना दिया। रामलीला देखने के लिए मौजूद दर्शक अंत तक मंचन से जुड़े रहे।
इस मौके पर राजकुमार गुप्ता, मनीष श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, तिलकराम कसौधन, ध्रुवराज वर्मा, कपिल देव गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।