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कपिलवस्तु संग्रहालय में स्थापित हो पिपरहवा के अवशेष : सांसद
Wed, 10 Dec 2025 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 10 Dec 2025 11:36 PM IST
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सांसद जगदंबिका पाल ने बुधवार को नियम 377 के तहत लोकसभा में उठाया मुद्दा
सिद्धार्थनगर। सांसद जगदंबिका पाल ने बुधवार को नियम 377 के तहत लोकसभा में पिपरहवा अवशेषों की वापसी एवं जिले में स्थापना का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा भगवान बुद्ध से संबंधित पिपरहवा अवशेषों की वापसी में किए गए ऐतिहासिक प्रयासों की सराहना करते हुए इन्हें उनके मूल स्थल कपिलवस्तु संग्रहालय सिद्धार्थनगर में स्थापित किए जाने का अनुरोध किया।
सांसद ने लोकसभा में कहा कि सिद्धार्थनगर के पिपरहवा क्षेत्र में 1898 में खोजे गए ये पावन अवशेष भारत और विश्वभर के करोड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पूजनीय धरोहर हैं। उन्होंने स्मरण दिलाया कि मई 2025 में जब ये अवशेष हांगकांग की सोथवे की नीलामी सूची में शामिल किए गए थे। तब यह भारत की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा के लिए गंभीर चुनौती थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने त्वरित और निर्णायक हस्तक्षेप करते हुए नीलामी को रुकवाया और अवशेषों को सम्मानपूर्वक भारत वापस लाकर विश्व को सांस्कृतिक संप्रभुता का सशक्त संदेश दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि इन अवशेषों को भूटान में आयोजित विशेष प्रदर्शनी के लिए भेजना भारत-भूटान मैत्री, बौद्ध विरासत संरक्षण और हमारी साझा आध्यात्मिक परंपराओं को नई ऊंचाई देने वाला कदम है। जो वैश्विक स्तर पर भारत की उभरती सॉफ्ट पावर का स्पष्ट उदाहरण है। अंत में उन्होंने आग्रह किया कि इन पवित्र अवशेषों को उनके मूल स्थल पर पुनः स्थापित किया जाए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और बौद्ध परिपथ को नया प्रोत्साहन मिलेगा और सिद्धार्थनगर वैश्विक बौद्ध मानचित्र पर अपने योग्य स्थान को प्राप्त करेगा।
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सिद्धार्थनगर। सांसद जगदंबिका पाल ने बुधवार को नियम 377 के तहत लोकसभा में पिपरहवा अवशेषों की वापसी एवं जिले में स्थापना का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा भगवान बुद्ध से संबंधित पिपरहवा अवशेषों की वापसी में किए गए ऐतिहासिक प्रयासों की सराहना करते हुए इन्हें उनके मूल स्थल कपिलवस्तु संग्रहालय सिद्धार्थनगर में स्थापित किए जाने का अनुरोध किया।
सांसद ने लोकसभा में कहा कि सिद्धार्थनगर के पिपरहवा क्षेत्र में 1898 में खोजे गए ये पावन अवशेष भारत और विश्वभर के करोड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पूजनीय धरोहर हैं। उन्होंने स्मरण दिलाया कि मई 2025 में जब ये अवशेष हांगकांग की सोथवे की नीलामी सूची में शामिल किए गए थे। तब यह भारत की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा के लिए गंभीर चुनौती थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने त्वरित और निर्णायक हस्तक्षेप करते हुए नीलामी को रुकवाया और अवशेषों को सम्मानपूर्वक भारत वापस लाकर विश्व को सांस्कृतिक संप्रभुता का सशक्त संदेश दिया।
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उन्होंने यह भी कहा कि इन अवशेषों को भूटान में आयोजित विशेष प्रदर्शनी के लिए भेजना भारत-भूटान मैत्री, बौद्ध विरासत संरक्षण और हमारी साझा आध्यात्मिक परंपराओं को नई ऊंचाई देने वाला कदम है। जो वैश्विक स्तर पर भारत की उभरती सॉफ्ट पावर का स्पष्ट उदाहरण है। अंत में उन्होंने आग्रह किया कि इन पवित्र अवशेषों को उनके मूल स्थल पर पुनः स्थापित किया जाए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और बौद्ध परिपथ को नया प्रोत्साहन मिलेगा और सिद्धार्थनगर वैश्विक बौद्ध मानचित्र पर अपने योग्य स्थान को प्राप्त करेगा।
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