फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Siddharthnagar News: Palta Devi Temple was established by the Pandavas, devotees also come from Nepal

Siddharthnagar News: पल्टा देवी मंदिर की पांडवों ने की थी स्थापना, नेपाल से भी आते हैं श्रद्धालु

Mon, 22 Sep 2025 10:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 22 Sep 2025 10:57 PM IST
विज्ञापन
Siddharthnagar News: Palta Devi Temple was established by the Pandavas, devotees also come from Nepal
चिल्हिया के पल्टदेवी मंदिर की साफ-सफाई करते मंदिर कमेटी लोग। संवाद
शोहरतगढ़। शारदीय नवरात्र को शक्तिपीठ पल्टादेवी की सफाई की गई। मंदिर मंदिर परिसर सहित आसपास जगहों कि सफाई कर सजाया गया। सोमवार से नौ दिन तक आदि शक्ति पल्टादेवी की पूजा व मेले की धूम रहेगी और दशहरा के दिन मेला लगेगा। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। मां की पूजा करने लिए पड़ोसी देश नेपाल से भी लोग बड़ी संख्या में आते हैं।
विज्ञापन

जानकारों के मुताबिक, किंवदंती है कि पांडवों ने आदि शक्ति मां पल्टादेवी की स्थापना की थी। मां पल्टादेवी के दर्शन के लिए पड़ोसी देश नेपाल व दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं और मन्नतें मांगते हैं। साल के सभी दिन मां के दरबार में भक्तों की भीड़ रहती है। यहां हलवा व पूरी भी चढ़ाई जाती है। मंदिर की पुरानी ईंटें इसकी प्राचीनता की गवाही देती हैं। जमुआर नदी के पास स्थित मां पल्टादेवी का ऐतिहासिक मंदिर महाभारत कालीन है।
विज्ञापन

पांडवों का यही भाग्योदय हुआ, जिसके बाद से ही इस मंदिर का नाम पल्टादेवी पड़ गया और पल्टादेवी भाग्य की अधिष्ठात्री देवी के रूप में स्थापित हो गई। वर्तमान में इस मंदिर को शक्ति पीठ का दर्जा मिला हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस स्थान पर भगवान शिव तथा अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं। यह मंदिर लंबे समय से भक्तों की आस्था का प्रतीक है। इस मंदिर में प्रदेश के बलरामपुर, गोंडा, बस्ती, संतकबीरनगर, महराजगंज, गोरखपुर आदि के अलावा पड़ोसी देश नेपाल के श्रद्धालु भारी संख्या में आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता।

मुंडन कराने आते हैं लोग: यहां पर स्थित सरोवर में स्नान का अपना अलग ही महत्व है। दूर-दूर से लोग यहां बच्चों का मुंडन आदि कराने के लिए आते हैं। माना जाता है कि जिन बच्चों का मुंडन संस्कार यहां मां के दरबार में होता है, वे यशस्वी एवं दीर्घायु होने के साथ ही कुल का नाम रोशन करते हैं। चैत नवरात्र में यहां नौ दिन मेला लगता है। मंदिर के प्रांगण में झूला, सर्कस, जलपान, खिलौने, और नारियल चुनरी की दुकानें सजी हुई हैं, जिसमें आए हुए श्रद्धालु मां का आशीर्वाद लेने के बाद मेले का लुप्त और मनोरंजन करते हैं।ज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed