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Siddharthnagar News: हल्लौर में शब्बेदारी, मर्सिया मजलिस में गूंजा कर्बला का पैगाम
Thu, 20 Aug 2026 11:08 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:08 PM IST
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- देर रात तक नौहाख्वानी और मातम, अकीदतमंदों ने दी इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हल्लौर कस्बे के नौबहारगंज मोहल्ले में बुधवार रात नफीस हल्लौरी और उनके भाइयों की ओर से शब्बेदारी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मर्सिया मजलिस आयोजित हुई, जिसमें जाकिर जमाल हैदर करबलाई ने कर्बला का वाकया विस्तार से बयान किया। देर रात तक अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी और मातम कर हजरत इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
शब्बेदारी की शुरुआत मर्सियाख्वान हैदरे कर्रार और उनके सहयोगियों की मर्सियाख्वानी से हुई। इसके बाद मजलिस को संबोधित करते हुए जाकिर जमाल हैदर करबलाई ने कहा कि कर्बला केवल एक जंग नहीं बल्कि इंसाफ, सब्र और सच्चाई की सबसे बड़ी मिसाल है। उन्होंने बताया कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके परिजन, विशेषकर बीमार इमाम सज्जाद पर यजीदी लश्कर ने अत्याचार की सारी सीमाएं पार कर दी थीं।
मजलिस के अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन की शहादत का दर्दनाक मंजर बयान किया, जिसे सुनकर उपस्थित अकीदतमंद गमगीन हो उठे। इसके बाद अंजुमन फरोग-ए-मातम और अंजुमन गुलदस्ता-ए-मातम के मातमी दस्तों ने पूरी शिद्दत के साथ नौहाख्वानी और सीनाजनी की। कार्यक्रम का संचालन अजीम हल्लौरी ने किया।
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इस अवसर पर नफीस हल्लौरी, नायाब हल्लौरी, जलाल हैदर, हसन ताकीब, आले रजा, बेताब, शानू रिजवी, नफासत रिजवी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
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सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हल्लौर कस्बे के नौबहारगंज मोहल्ले में बुधवार रात नफीस हल्लौरी और उनके भाइयों की ओर से शब्बेदारी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मर्सिया मजलिस आयोजित हुई, जिसमें जाकिर जमाल हैदर करबलाई ने कर्बला का वाकया विस्तार से बयान किया। देर रात तक अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी और मातम कर हजरत इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
शब्बेदारी की शुरुआत मर्सियाख्वान हैदरे कर्रार और उनके सहयोगियों की मर्सियाख्वानी से हुई। इसके बाद मजलिस को संबोधित करते हुए जाकिर जमाल हैदर करबलाई ने कहा कि कर्बला केवल एक जंग नहीं बल्कि इंसाफ, सब्र और सच्चाई की सबसे बड़ी मिसाल है। उन्होंने बताया कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके परिजन, विशेषकर बीमार इमाम सज्जाद पर यजीदी लश्कर ने अत्याचार की सारी सीमाएं पार कर दी थीं।
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मजलिस के अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन की शहादत का दर्दनाक मंजर बयान किया, जिसे सुनकर उपस्थित अकीदतमंद गमगीन हो उठे। इसके बाद अंजुमन फरोग-ए-मातम और अंजुमन गुलदस्ता-ए-मातम के मातमी दस्तों ने पूरी शिद्दत के साथ नौहाख्वानी और सीनाजनी की। कार्यक्रम का संचालन अजीम हल्लौरी ने किया।
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इस अवसर पर नफीस हल्लौरी, नायाब हल्लौरी, जलाल हैदर, हसन ताकीब, आले रजा, बेताब, शानू रिजवी, नफासत रिजवी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।