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Siddharthnagar News: करवाचौथ पर बाजारों में रौनक, नई पीढ़ी भी निभा रही परंपरा
Sat, 24 Oct 2026 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:19 PM IST
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- सोलह शृंगार से पूजा की तैयारियों तक दिख रहा उत्साह, कुछ परिवारों में पति भी रख रहे व्रत
सिद्धार्थनगर। करवा चौथ का त्योहार महिलाओं के लिए व्रत और पूजा के साथ प्रेम, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है। सिद्धार्थनगर शहर से लेकर बांसी, डुमरियागंज, इटवा और शोहरतगढ़ तक त्योहार को लेकर उत्साह है। बाजारों में साड़ियों, चूड़ियों, मेहंदी, बिंदी और पूजा सामग्री की खरीदारी हो रही है। महिलाएं सोलह शृंगार के साथ पर्व मनाने की तैयारियों में जुटी हैं।
पारंपरिक परिधानों में जयपुरिया और लहरिया साड़ियों की पसंद से लेकर सजने-संवरने के नए तरीकों तक, त्योहार के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। नई पीढ़ी की महिलाएं भी इस परंपरा को अपने अंदाज में निभा रही हैं। किसी के लिए यह पति की लंबी उम्र की कामना का पर्व है, तो किसी के लिए दांपत्य जीवन में प्रेम और समर्पण को मजबूत करने का अवसर।
बदलते समय के साथ कुछ परिवारों में पति भी पत्नी के साथ व्रत रख रहे हैं। इससे त्योहार में आपसी सहयोग, सम्मान और साथ निभाने की भावना को बढ़ावा मिल रहा है। महिलाओं का कहना है कि परंपराओं का महत्व तभी और बढ़ जाता है, जब उन्हें आपसी समझ और खुशी के साथ निभाया जाए।
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बबिता : परंपरा से जुड़ाव का त्योहार
करवा चौथ हमारी परंपरा और परिवार से जुड़ा त्योहार है। इस दिन व्रत रखने के साथ पूजा-पाठ और सोलह शृंगार की तैयारियों में अलग ही उत्साह रहता है। परिवार के साथ त्योहार मनाने से इसकी खुशी और बढ़ जाती है।
कृतिका : नई पीढ़ी में भी कायम है उत्साह
समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके जरूर बदले हैं लेकिन करवा चौथ को लेकर महिलाओं का उत्साह आज भी बना हुआ है। हम अपनी परंपराओं को निभाने के साथ त्योहार को यादगार बनाने की कोशिश करते हैं।
सिम्मी : साथ निभाने का प्रतीक है करवा चौथ
मेरे लिए करवा चौथ सिर्फ व्रत रखने का दिन नहीं बल्कि पति-पत्नी के बीच प्यार और विश्वास को महसूस करने का अवसर है। एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना और जीवन में साथ निभाना सबसे ज्यादा मायने रखता है।
प्रिया : पति का साथ बढ़ाता है खुशी
अगर पति भी पत्नी की भावनाओं को समझते हुए व्रत में साथ दें, तो त्योहार की खुशी और बढ़ जाती है। जरूरी यह है कि परंपरा को दबाव के बजाय आपसी समझ, सम्मान और खुशी के साथ निभाया जाए।
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सिद्धार्थनगर। करवा चौथ का त्योहार महिलाओं के लिए व्रत और पूजा के साथ प्रेम, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है। सिद्धार्थनगर शहर से लेकर बांसी, डुमरियागंज, इटवा और शोहरतगढ़ तक त्योहार को लेकर उत्साह है। बाजारों में साड़ियों, चूड़ियों, मेहंदी, बिंदी और पूजा सामग्री की खरीदारी हो रही है। महिलाएं सोलह शृंगार के साथ पर्व मनाने की तैयारियों में जुटी हैं।
पारंपरिक परिधानों में जयपुरिया और लहरिया साड़ियों की पसंद से लेकर सजने-संवरने के नए तरीकों तक, त्योहार के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। नई पीढ़ी की महिलाएं भी इस परंपरा को अपने अंदाज में निभा रही हैं। किसी के लिए यह पति की लंबी उम्र की कामना का पर्व है, तो किसी के लिए दांपत्य जीवन में प्रेम और समर्पण को मजबूत करने का अवसर।
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बदलते समय के साथ कुछ परिवारों में पति भी पत्नी के साथ व्रत रख रहे हैं। इससे त्योहार में आपसी सहयोग, सम्मान और साथ निभाने की भावना को बढ़ावा मिल रहा है। महिलाओं का कहना है कि परंपराओं का महत्व तभी और बढ़ जाता है, जब उन्हें आपसी समझ और खुशी के साथ निभाया जाए।
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बबिता : परंपरा से जुड़ाव का त्योहार
करवा चौथ हमारी परंपरा और परिवार से जुड़ा त्योहार है। इस दिन व्रत रखने के साथ पूजा-पाठ और सोलह शृंगार की तैयारियों में अलग ही उत्साह रहता है। परिवार के साथ त्योहार मनाने से इसकी खुशी और बढ़ जाती है।
कृतिका : नई पीढ़ी में भी कायम है उत्साह
समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके जरूर बदले हैं लेकिन करवा चौथ को लेकर महिलाओं का उत्साह आज भी बना हुआ है। हम अपनी परंपराओं को निभाने के साथ त्योहार को यादगार बनाने की कोशिश करते हैं।
सिम्मी : साथ निभाने का प्रतीक है करवा चौथ
मेरे लिए करवा चौथ सिर्फ व्रत रखने का दिन नहीं बल्कि पति-पत्नी के बीच प्यार और विश्वास को महसूस करने का अवसर है। एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना और जीवन में साथ निभाना सबसे ज्यादा मायने रखता है।
प्रिया : पति का साथ बढ़ाता है खुशी
अगर पति भी पत्नी की भावनाओं को समझते हुए व्रत में साथ दें, तो त्योहार की खुशी और बढ़ जाती है। जरूरी यह है कि परंपरा को दबाव के बजाय आपसी समझ, सम्मान और खुशी के साथ निभाया जाए।