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Siddharthnagar News: ध्रुव चरित्र की कथा सुनकर हर्षित हुए श्रोता
Wed, 09 Sep 2026 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 09 Sep 2026 12:03 AM IST
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चिल्हिया। राधा कृष्ण मंदिर के परिसर आईटीआई कॉलेज विवेकानंद नगर भीमपार नौगढ़ में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक आचार्य संतोष शुक्ल ने ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रोता हर्षित हो गए।
कथावाचक आचार्य संतोष शुक्ल ने कहा कि उत्तानपाद की दो पत्नियां थीं। सुनीति और सुरुचि। सुनिति के बेटे का नाम ध्रुव था और सुरुचि के बेटे का नाम उत्तम था। एक बार उत्तानपाद सिंहासन पर बैठे हुए थे। ध्रुव भी खेलते हुए राजमहल में पहुंच गए। उस समय उनकी अवस्था पांच वर्ष की थी, उत्तम राजा उत्तानपाद की गोदी में बैठा हुआ था। ध्रुव भी राजा की गोदी में चढ़ने का प्रयास करने लगे। उन्होंने कहा कि सुरुचि को अपने सौभाग्य का इतना अभिमान था कि उसने ध्रुव को डांटकर कहा कि गोद में चढ़ने का तेरा अधिकार नहीं है।
ध्रुव रोते हुए अपनी मां के पास आए। मां को सारी व्यथा सुनाई। तब ध्रुव की मां सुनिति ने कहा कि भगवान तुझ पर कृपा करेंगे। तुझे प्रेम से बुलाएंगे। गोद में भी बिठाएंगे। अब तुम वन में जाकर नारायण का भजन करो। कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि बालक ध्रुव मां का आदेश प्राप्त करके चल पड़े। नगर से बाहर निकलते ही उनको देवर्षि नारद मिल गए। देवर्षि द्वारा दिए गए मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जप करते हुए तीन माह के घोर तपस्या के उपरांत जगत के पालनहार श्रीहरि भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए। व्यास जी ने कहा कि साध्य के लिए साधन की नितांत आवश्यकता है। प्रसंग सुनकर लोग भाव विभोर हो गए और जय-जयकार करने लगे।
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कथावाचक आचार्य संतोष शुक्ल ने कहा कि उत्तानपाद की दो पत्नियां थीं। सुनीति और सुरुचि। सुनिति के बेटे का नाम ध्रुव था और सुरुचि के बेटे का नाम उत्तम था। एक बार उत्तानपाद सिंहासन पर बैठे हुए थे। ध्रुव भी खेलते हुए राजमहल में पहुंच गए। उस समय उनकी अवस्था पांच वर्ष की थी, उत्तम राजा उत्तानपाद की गोदी में बैठा हुआ था। ध्रुव भी राजा की गोदी में चढ़ने का प्रयास करने लगे। उन्होंने कहा कि सुरुचि को अपने सौभाग्य का इतना अभिमान था कि उसने ध्रुव को डांटकर कहा कि गोद में चढ़ने का तेरा अधिकार नहीं है।
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ध्रुव रोते हुए अपनी मां के पास आए। मां को सारी व्यथा सुनाई। तब ध्रुव की मां सुनिति ने कहा कि भगवान तुझ पर कृपा करेंगे। तुझे प्रेम से बुलाएंगे। गोद में भी बिठाएंगे। अब तुम वन में जाकर नारायण का भजन करो। कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि बालक ध्रुव मां का आदेश प्राप्त करके चल पड़े। नगर से बाहर निकलते ही उनको देवर्षि नारद मिल गए। देवर्षि द्वारा दिए गए मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जप करते हुए तीन माह के घोर तपस्या के उपरांत जगत के पालनहार श्रीहरि भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए। व्यास जी ने कहा कि साध्य के लिए साधन की नितांत आवश्यकता है। प्रसंग सुनकर लोग भाव विभोर हो गए और जय-जयकार करने लगे।
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