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Siddharthnagar News: 77 लाख से बनेगा कृषक प्रशिक्षण और सहायता केंद्र
Fri, 10 Oct 2025 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 10 Oct 2025 01:08 AM IST
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सिद्धार्थनगर। एक जनपद एक उत्पाद के तहत जिले के लिए चयनित कालानमक को बढ़ावा देने के लिए कृषक प्रशिक्षण और सहायता केंद्र का निर्माण होगा। डीएम डॉ. राजागणपति आर की पहल पर इस केंद्र के निर्माण के लिए राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने अपनी सांसद निधि से 76.97 लाख रुपये आवंटित किए हैं। इसके निर्माण से जिले में कालानमक की खेती करने वाले किसानों को उचित मूल्य के साथ अपने उत्पादन की बिक्री करने का केंद्र मिल जाएगा।
जिले में कालानमक की खेती को बढ़ावा देने और उसके निर्यात के लिए जिला प्रशासन व शासन की तरफ से कई पहल की जा रही है। इसी के तहत जिला प्रशासन की तरफ से किसानों को अपने उपज की अच्छी कीमत दिलाने और उन्हें खेती में प्रोत्साहित करने के लिए एक केंद्र के निर्माण की पहल की गई है।
इसी के तहत शहर के अशोक मार्ग पर कालानमक के लिए मार्ट का निर्माण किया जाएगा। परियोजना निदेशक नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने बताया कि जिले के किसानों को अपने उपज कालानमक के उचित मूल्य से क्रय करने के लिए इस केंद्र में दुकानों का निर्माण किया जाएगा। बनने वाली दुकानों में कालानमक चावल की विभिन्न किस्मों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिससे किसान अपने उत्पादन की गुणवत्ता के आधार पर क्रय क्षमता बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी लगा सकेंगे।
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इसी भवन में किसानों के प्रशिक्षण और कार्यशाला के लिए एक सभागार का भी निर्माण होगा। इसी के तहत राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने केंद्र के निर्माण के लिए धन आवंटित करने संबंधी पत्र जिलाधिकारी को भेजा है। साथ ही परियोजना निदेशक को प्रतिलिपि की है।
विशिष्ट गुणवत्ता बनी कालानमक की पहचान : कालानमक को भगवान बुद्ध से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि यह बौद्ध काल (600 ईसा पूर्व) से उगाया जा रहा है और इसे बुद्ध का महाप्रसाद कहा जाता है। यह अपनी विशिष्ट मीठी सुगंध के लिए प्रसिद्ध है जो पकने पर पूरे घर तक पहुंच जाती है।
यह जिंक, आयरन, प्रोटीन, ओमेगा-3, ओमेगा-6 और बीटा कैरोटीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो इसे हृदय और त्वचा के लिए लाभकारी बनाते हैं। इसकी खेती अक्सर जैविक तरीके से की जाती है, जिससे यह कीटनाशकों और उर्वरकों से मुक्त होता है। ी
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जिले में कालानमक की खेती को बढ़ावा देने और उसके निर्यात के लिए जिला प्रशासन व शासन की तरफ से कई पहल की जा रही है। इसी के तहत जिला प्रशासन की तरफ से किसानों को अपने उपज की अच्छी कीमत दिलाने और उन्हें खेती में प्रोत्साहित करने के लिए एक केंद्र के निर्माण की पहल की गई है।
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इसी के तहत शहर के अशोक मार्ग पर कालानमक के लिए मार्ट का निर्माण किया जाएगा। परियोजना निदेशक नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने बताया कि जिले के किसानों को अपने उपज कालानमक के उचित मूल्य से क्रय करने के लिए इस केंद्र में दुकानों का निर्माण किया जाएगा। बनने वाली दुकानों में कालानमक चावल की विभिन्न किस्मों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिससे किसान अपने उत्पादन की गुणवत्ता के आधार पर क्रय क्षमता बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी लगा सकेंगे।
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इसी भवन में किसानों के प्रशिक्षण और कार्यशाला के लिए एक सभागार का भी निर्माण होगा। इसी के तहत राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने केंद्र के निर्माण के लिए धन आवंटित करने संबंधी पत्र जिलाधिकारी को भेजा है। साथ ही परियोजना निदेशक को प्रतिलिपि की है।
विशिष्ट गुणवत्ता बनी कालानमक की पहचान : कालानमक को भगवान बुद्ध से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि यह बौद्ध काल (600 ईसा पूर्व) से उगाया जा रहा है और इसे बुद्ध का महाप्रसाद कहा जाता है। यह अपनी विशिष्ट मीठी सुगंध के लिए प्रसिद्ध है जो पकने पर पूरे घर तक पहुंच जाती है।
यह जिंक, आयरन, प्रोटीन, ओमेगा-3, ओमेगा-6 और बीटा कैरोटीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो इसे हृदय और त्वचा के लिए लाभकारी बनाते हैं। इसकी खेती अक्सर जैविक तरीके से की जाती है, जिससे यह कीटनाशकों और उर्वरकों से मुक्त होता है। ी