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सुविधा : नवजातों को सी-पैप से मिलेगी सांस, आसान होगा इलाज
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में अब नवजात शिशुओं को सांस संबंधी परेशानी होने पर बेहतर उपचार मिल सकेगा। इसके लिए यूनिट में छह सी-पैप (कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर) मशीनें स्थापित की गई हैं। इससे समय से पहले जन्म लेने वाले और कम वजन वाले बच्चों को विशेष लाभ मिलेगा।
मेडिकल कॉलेज में 24 बेड का एसएनसीयू संचालित है। इसमें समय से पहले जन्म लेने वाले, कम वजन और सांस संबंधी परेशानी से पीड़ित नवजातों को भर्ती कर उपचार दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से भी ऐसे बच्चों को यहां रेफर किया जाता है।
अब तक सांस की गंभीर समस्या होने पर कई नवजातों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता था। छह सी-पैप मशीनें लगने से अब ऐसे बच्चों को यहीं श्वसन सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे यूनिट की उपचार क्षमता भी बढ़ेगी। एसएनसीयू में हर सप्ताह 15 से 20 प्रीमेच्योर नवजात भर्ती होते हैं। इनमें कई बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है। नई मशीनों से जरूरत के अनुसार उन्हें श्वसन सहायता दी जा सकेगी। इससे गंभीर नवजातों के उपचार में सहूलियत होगी और दूसरे चिकित्सा संस्थानों तक रेफर करने की नौबत कम आएगी।
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मेडिकल कॉलेज में 24 बेड का एसएनसीयू संचालित है। इसमें समय से पहले जन्म लेने वाले, कम वजन और सांस संबंधी परेशानी से पीड़ित नवजातों को भर्ती कर उपचार दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से भी ऐसे बच्चों को यहां रेफर किया जाता है।
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अब तक सांस की गंभीर समस्या होने पर कई नवजातों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता था। छह सी-पैप मशीनें लगने से अब ऐसे बच्चों को यहीं श्वसन सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे यूनिट की उपचार क्षमता भी बढ़ेगी। एसएनसीयू में हर सप्ताह 15 से 20 प्रीमेच्योर नवजात भर्ती होते हैं। इनमें कई बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है। नई मशीनों से जरूरत के अनुसार उन्हें श्वसन सहायता दी जा सकेगी। इससे गंभीर नवजातों के उपचार में सहूलियत होगी और दूसरे चिकित्सा संस्थानों तक रेफर करने की नौबत कम आएगी।
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