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बिना निमंत्रण वहां न जाएं, जहां अपने इष्ट का अपमान हो: डॉ. बृजेश शुक्ल
Tue, 27 Oct 2026 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:21 PM IST
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औराताल। बनगाई नानकार गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास डॉ. बृजेश शुक्ल ने सती चरित्र और ध्रुव चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। बच्चों को बचपन से ही भक्ति और अच्छे संस्कारों की सीख देनी चाहिए।
कथा व्यास ने सती चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव के मना करने के बावजूद सती अपने पिता दक्ष के यहां यज्ञ में पहुंच गईं। वहां उन्हें और भगवान शिव को अपमानित होना पड़ा। इससे आहत होकर सती ने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए। उन्होंने कहा कि जहां अपने इष्ट या गुरु के अपमान की आशंका हो, वहां बिना निमंत्रण नहीं जाना चाहिए, भले ही वह अपने पिता का घर ही क्यों न हो।
ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सौतेली मां सुरुचि के अपमानित करने पर भी माता सुनीति ने धैर्य बनाए रखा। परिवार को सुरक्षित रखने के लिए संयम और धैर्य जरूरी है। ध्रुव ने तपस्या से भगवान श्रीहरि को प्रसन्न किया। इससे प्रेरणा मिलती है कि भक्ति के लिए उम्र बाधा नहीं है। बचपन में दिए गए संस्कार जीवन को सही दिशा देते हैं।
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इस अवसर पर मुख्य यजमान राम प्यारे उपाध्याय सहित तारे, नरेंद्र, शिवकुमार, अवधेश, शिवेंद्र, शनि देवल और झिनकू आदि मौजूद रहे।
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कथा व्यास ने सती चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव के मना करने के बावजूद सती अपने पिता दक्ष के यहां यज्ञ में पहुंच गईं। वहां उन्हें और भगवान शिव को अपमानित होना पड़ा। इससे आहत होकर सती ने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए। उन्होंने कहा कि जहां अपने इष्ट या गुरु के अपमान की आशंका हो, वहां बिना निमंत्रण नहीं जाना चाहिए, भले ही वह अपने पिता का घर ही क्यों न हो।
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ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सौतेली मां सुरुचि के अपमानित करने पर भी माता सुनीति ने धैर्य बनाए रखा। परिवार को सुरक्षित रखने के लिए संयम और धैर्य जरूरी है। ध्रुव ने तपस्या से भगवान श्रीहरि को प्रसन्न किया। इससे प्रेरणा मिलती है कि भक्ति के लिए उम्र बाधा नहीं है। बचपन में दिए गए संस्कार जीवन को सही दिशा देते हैं।
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इस अवसर पर मुख्य यजमान राम प्यारे उपाध्याय सहित तारे, नरेंद्र, शिवकुमार, अवधेश, शिवेंद्र, शनि देवल और झिनकू आदि मौजूद रहे।