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Siddharthnagar News: बीडीओ ने लगाई झूठी रिपोर्ट परिनिंदा और प्रतिकूल प्रविष्टि
Wed, 21 Jan 2026 11:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 21 Jan 2026 11:16 PM IST
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सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना में असत्य व भ्रामक आख्या प्रस्तुत करना खंड विकास अधिकारी (जोगिया) को भारी पड़ गया। आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायत में सच्चाई छिपाने और फर्जीवाड़े पर लीपापोती करने के आरोप सिद्ध होने पर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारी को परिनिंदा के साथ विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी है।
जानकारी के अनुसार, आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतकर्ता जोगिया के ग्राम नगरा निवासी रेखा पत्नी शिवराज ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत में ब्लॉक अधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ अपात्र व्यक्ति को दिलाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास अधिकारी जोगिया को जांच सौंपी गई, जिन्होंने सात जनवरी को शिकायत को असत्य व निराधार बताते हुए रिपोर्ट लगा दी। शिकायतकर्ता के असंतोष पर आईजीआरएस प्रभारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि न्यूनतम एक स्तर ऊपर के अधिकारी से जांच कराई जाए, लेकिन इसके बावजूद खंड विकास अधिकारी ने 13 जनवरी को वही पुरानी आख्या दोहराकर मामला दबाने की कोशिश की।
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शिकायतकर्ता की लगातार आपत्ति के बाद परियोजना निदेशक, डीआरडीए से जांच कराई गई। परियोजना निदेशक ने 16 जनवरी को जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपा, जिसमें शिकायत को पूरी तरह सत्य पाई और लाभार्थी बताए गए प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए अपात्र घोषित कर दिया। इससे स्पष्ट हो गया कि पूर्व में प्रस्तुत आख्या न सिर्फ गलत थी बल्कि जानबूझकर भ्रामक तरीके से लगाई गई।
जिलाधिकारी ने इस पूरे प्रकरण को आईजीआरएस जैसे जनहित और जवाबदेही वाले पोर्टल की गंभीर अवहेलना मानते हुए खंड विकास अधिकारी के कृत्य पर सख्त नाराजगी जताई और विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने के आदेश दिए।
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जानकारी के अनुसार, आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतकर्ता जोगिया के ग्राम नगरा निवासी रेखा पत्नी शिवराज ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत में ब्लॉक अधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ अपात्र व्यक्ति को दिलाया गया।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास अधिकारी जोगिया को जांच सौंपी गई, जिन्होंने सात जनवरी को शिकायत को असत्य व निराधार बताते हुए रिपोर्ट लगा दी। शिकायतकर्ता के असंतोष पर आईजीआरएस प्रभारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि न्यूनतम एक स्तर ऊपर के अधिकारी से जांच कराई जाए, लेकिन इसके बावजूद खंड विकास अधिकारी ने 13 जनवरी को वही पुरानी आख्या दोहराकर मामला दबाने की कोशिश की।
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शिकायतकर्ता की लगातार आपत्ति के बाद परियोजना निदेशक, डीआरडीए से जांच कराई गई। परियोजना निदेशक ने 16 जनवरी को जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपा, जिसमें शिकायत को पूरी तरह सत्य पाई और लाभार्थी बताए गए प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए अपात्र घोषित कर दिया। इससे स्पष्ट हो गया कि पूर्व में प्रस्तुत आख्या न सिर्फ गलत थी बल्कि जानबूझकर भ्रामक तरीके से लगाई गई।
जिलाधिकारी ने इस पूरे प्रकरण को आईजीआरएस जैसे जनहित और जवाबदेही वाले पोर्टल की गंभीर अवहेलना मानते हुए खंड विकास अधिकारी के कृत्य पर सख्त नाराजगी जताई और विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने के आदेश दिए।