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Siddharthnagar News: बांस बल्ली से मिलेगा छुटकारा... बदले जाएंगे जर्जर तार
Thu, 06 Nov 2025 12:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 06 Nov 2025 12:14 AM IST
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शहर के पुरानी नौगढ़ कस्बे में बांस बल्ली के सहारे बिजली के तार। संवाद
- 20 करोड़ की लागत से होगा काम, 2.5 लाख आबादी होगी लाभान्वित
- गांव से लेकर शहर तक बिजली निगम करा रहा सर्वे, जल्द शुरू होगा कार्य
सिद्धार्थनगर। शहर से गांव तक में लोगों को बांस-बल्ली वाले पोल और जर्जर तार से हादसे का डर नहीं सताएगा। 20 करोड़ की लागत से जिले के शहर और कस्बों समेत दो सौ अधिक गांवों के बांस-बल्ली वाले पोल और जर्जर तार बदले जाएंगे। इससे 2.5 लाख से अधिक आबादी लाभान्वित होगी। इसके अलावा जिन मजरों का अब तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। वहां भी बिजली पहुंचाई जाएगी। इसके लिए बिजली निगम के कर्मचारी सर्वे में जुट गए हैं।
शहर के पुरानी नौगढ़ में भगतसिंह नगर के कई घरों में बांस बल्ली के सहारे बिजली सप्लाई होने से हर समय लोगों को हादसे का डर सताता है। यहां बिजली पोल से डेढ़ सौ मीटर से अधिक दूरी पर लोगों के घर तक सप्लाई देने के लिए तार को बांस-बल्ली के सहारे पहुंचाया गया है, जिससे इस मार्ग से गुजरने के दौरान लटक रहे बिजली के तार से हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसा ही हाल शहर के खजुरिया मोहल्ले का है, जहां पर कई उपभोक्ताओं के घर तक बांस बल्ली के सहारे बिजली सप्लाई दी जा रही है। जिले के अन्य कस्बों और गांवों में भी जर्जर बिजली पोल और तार से सप्लाई हो रही है। अब इन समस्याओं से लोगों को जल्द ही छुटकारा मिल जाएगा।
बिजली निगम की ओर से बांस-बल्ली से निर्गत लंबी दूरी के कनेक्शनों पर लोहे, पत्थर के पोल लगाए जाएंगे। शासन के निर्देश के बाद बिजली निगम विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पोल लगाने वाले क्षेत्रों का विवरण दर्ज करने के लिए निर्देशित किए हैं। विद्युत एक्सईएन ज्ञान प्रकाश ने बताया कि कई जगहों पर लोग जुगाड़ से बांस-बल्ली के सहारे केबल खींचकर बिजली जला रहे हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद योजना के तहत जिले के ऐसे मजरों के घरों तक बिजली पहुंचाने की कवायद शुरू की गई। इसके बाद केंद्रीय विद्युत मंत्रालय से स्वीकृति मिलने पर यहां विद्युतीकरण का कार्य शुरू हुआ। इस चरण में मजरे और मकानों का सर्वे शुरू किया जा रहा है। इस कार्य के लिए टीमें के हर बिजली घर पर टीमें बनाई गईं हैं।
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नई कॉलोनियों और मजरों का भी होगा विद्युतिकरण
जिले में तीन खंडीय कार्यालय हैं। इन वितरण खंडों में विभिन्न भार के लगभग चार लाख से अधिक उपभोक्ता हैं। समय के साथ आबादी बढ़ने से गांव और शहर में नए मजरे और काॅलोनियां बनती जा रही हैं। विद्युतीकरण न होने से लोग कनेक्शन लेने के बाद खुद बांस बल्ली के सहारे तार खींचकर बिजली का उपयोग करने को मजबूर हैं। इसके कारण लोग अक्सर फाॅल्ट आदि की समस्याओं से जूझते रहते हैं। इसे देखते हुए शासन की तरफ से दो योजनाओं में विद्युतीकरण कर शत-प्रतिशत नई काॅलोनियों, मजरों के घरों में बिजली पहुंचाने की योजना बनाई गई है। एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) ट्रेस फेज 2 और इलेक्टि्रफिकेशन ऑफ इन इलेक्टि्रफाइड हाउस होल्ड योजना के अंतर्गत मजरों और घरों का विद्युतीकरण किया जाएगा।
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लटकते व जर्जर बिजली तार से हो चुके है हादसे
शोहरतगढ़ क्षेत्र के पकड़िहवा गांव में बीते दीपावली के दिन ही दीपक जलाने के दौरान छत पर लटक रहे बिजली तार की चपेट में आने से एक किशोरी की मौत हो गई थी। वहीं शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र सिद्धार्थ तिराहे पर आठ वर्ष पूर्व जर्जर बिजली तार टूट कर गिरने से एक बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई थी। बांसी कस्बा में लटक रहे बिजली तार की चपेट में आकर एक ट्रक पर सामान लाद रहे मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि जिले के विभिन्न स्थानों में खेतों में टूट कर गिरे जर्जर बिजली तार की चपेट में आकर कई पशुओं की मौत हो चुकी है।
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टूटे पोल से बिजली की आपूर्ति, हादसे का खतरा
भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के पिपरा कानूनगो गांव में बिजली पोल के ऊपर का हिस्सा टूट कर लटक रहा है। उसी टूटे आर्म से ही गांव में बिजली की सप्लाई की जाती है। बारिश और तेज हवा के दौरान आपस तार लड़ कर स्पार्क करतें हैं तो डर लगता है कहीं तार गिर ना जाए। इसको लेकर बिजली निगम के जेई को पत्र के माध्यम से बदलवाने की मांग की। मगर अभी तक इस बिजली के खंभे को बदलवाया नहीं गया है। गांव के आशीष चौरसिया, राम ललित, मंगरे, ज्ञान दास आदि ने टूटे पोल को बदलवाने की मांग की है।
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वर्जन
बांस बल्ली वाले क्षेत्रों का सर्वे करवाया जा रहा हैं। इससे जिले के सभी नए मजरे और मोहल्ले के लोगों को बांस बल्ली के बजाए पोल से बिजली आपूर्ति कराई जाएगी। इससे लोकल फाॅल्ट से लोगों को छुटकारा मिलेगा। सर्वे का कार्य पूरा होते ही सभी जगहों पर पोल लगाने का काम शुरू किया जाएगा।
- अजय कुमार, एसई, बिजली निगम
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- गांव से लेकर शहर तक बिजली निगम करा रहा सर्वे, जल्द शुरू होगा कार्य
सिद्धार्थनगर। शहर से गांव तक में लोगों को बांस-बल्ली वाले पोल और जर्जर तार से हादसे का डर नहीं सताएगा। 20 करोड़ की लागत से जिले के शहर और कस्बों समेत दो सौ अधिक गांवों के बांस-बल्ली वाले पोल और जर्जर तार बदले जाएंगे। इससे 2.5 लाख से अधिक आबादी लाभान्वित होगी। इसके अलावा जिन मजरों का अब तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। वहां भी बिजली पहुंचाई जाएगी। इसके लिए बिजली निगम के कर्मचारी सर्वे में जुट गए हैं।
शहर के पुरानी नौगढ़ में भगतसिंह नगर के कई घरों में बांस बल्ली के सहारे बिजली सप्लाई होने से हर समय लोगों को हादसे का डर सताता है। यहां बिजली पोल से डेढ़ सौ मीटर से अधिक दूरी पर लोगों के घर तक सप्लाई देने के लिए तार को बांस-बल्ली के सहारे पहुंचाया गया है, जिससे इस मार्ग से गुजरने के दौरान लटक रहे बिजली के तार से हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसा ही हाल शहर के खजुरिया मोहल्ले का है, जहां पर कई उपभोक्ताओं के घर तक बांस बल्ली के सहारे बिजली सप्लाई दी जा रही है। जिले के अन्य कस्बों और गांवों में भी जर्जर बिजली पोल और तार से सप्लाई हो रही है। अब इन समस्याओं से लोगों को जल्द ही छुटकारा मिल जाएगा।
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बिजली निगम की ओर से बांस-बल्ली से निर्गत लंबी दूरी के कनेक्शनों पर लोहे, पत्थर के पोल लगाए जाएंगे। शासन के निर्देश के बाद बिजली निगम विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पोल लगाने वाले क्षेत्रों का विवरण दर्ज करने के लिए निर्देशित किए हैं। विद्युत एक्सईएन ज्ञान प्रकाश ने बताया कि कई जगहों पर लोग जुगाड़ से बांस-बल्ली के सहारे केबल खींचकर बिजली जला रहे हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद योजना के तहत जिले के ऐसे मजरों के घरों तक बिजली पहुंचाने की कवायद शुरू की गई। इसके बाद केंद्रीय विद्युत मंत्रालय से स्वीकृति मिलने पर यहां विद्युतीकरण का कार्य शुरू हुआ। इस चरण में मजरे और मकानों का सर्वे शुरू किया जा रहा है। इस कार्य के लिए टीमें के हर बिजली घर पर टीमें बनाई गईं हैं।
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नई कॉलोनियों और मजरों का भी होगा विद्युतिकरण
जिले में तीन खंडीय कार्यालय हैं। इन वितरण खंडों में विभिन्न भार के लगभग चार लाख से अधिक उपभोक्ता हैं। समय के साथ आबादी बढ़ने से गांव और शहर में नए मजरे और काॅलोनियां बनती जा रही हैं। विद्युतीकरण न होने से लोग कनेक्शन लेने के बाद खुद बांस बल्ली के सहारे तार खींचकर बिजली का उपयोग करने को मजबूर हैं। इसके कारण लोग अक्सर फाॅल्ट आदि की समस्याओं से जूझते रहते हैं। इसे देखते हुए शासन की तरफ से दो योजनाओं में विद्युतीकरण कर शत-प्रतिशत नई काॅलोनियों, मजरों के घरों में बिजली पहुंचाने की योजना बनाई गई है। एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) ट्रेस फेज 2 और इलेक्टि्रफिकेशन ऑफ इन इलेक्टि्रफाइड हाउस होल्ड योजना के अंतर्गत मजरों और घरों का विद्युतीकरण किया जाएगा।
लटकते व जर्जर बिजली तार से हो चुके है हादसे
शोहरतगढ़ क्षेत्र के पकड़िहवा गांव में बीते दीपावली के दिन ही दीपक जलाने के दौरान छत पर लटक रहे बिजली तार की चपेट में आने से एक किशोरी की मौत हो गई थी। वहीं शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र सिद्धार्थ तिराहे पर आठ वर्ष पूर्व जर्जर बिजली तार टूट कर गिरने से एक बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई थी। बांसी कस्बा में लटक रहे बिजली तार की चपेट में आकर एक ट्रक पर सामान लाद रहे मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि जिले के विभिन्न स्थानों में खेतों में टूट कर गिरे जर्जर बिजली तार की चपेट में आकर कई पशुओं की मौत हो चुकी है।
टूटे पोल से बिजली की आपूर्ति, हादसे का खतरा
भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के पिपरा कानूनगो गांव में बिजली पोल के ऊपर का हिस्सा टूट कर लटक रहा है। उसी टूटे आर्म से ही गांव में बिजली की सप्लाई की जाती है। बारिश और तेज हवा के दौरान आपस तार लड़ कर स्पार्क करतें हैं तो डर लगता है कहीं तार गिर ना जाए। इसको लेकर बिजली निगम के जेई को पत्र के माध्यम से बदलवाने की मांग की। मगर अभी तक इस बिजली के खंभे को बदलवाया नहीं गया है। गांव के आशीष चौरसिया, राम ललित, मंगरे, ज्ञान दास आदि ने टूटे पोल को बदलवाने की मांग की है।
वर्जन
बांस बल्ली वाले क्षेत्रों का सर्वे करवाया जा रहा हैं। इससे जिले के सभी नए मजरे और मोहल्ले के लोगों को बांस बल्ली के बजाए पोल से बिजली आपूर्ति कराई जाएगी। इससे लोकल फाॅल्ट से लोगों को छुटकारा मिलेगा। सर्वे का कार्य पूरा होते ही सभी जगहों पर पोल लगाने का काम शुरू किया जाएगा।
- अजय कुमार, एसई, बिजली निगम