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Siddharthnagar News: कंस के अत्याचार के बीच कारागार में गूंजा कान्हा के जन्म का उल्लास

Tue, 27 Oct 2026 11:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 27 Oct 2026 11:20 PM IST
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Siddharthnagar News: Amidst Kansas tyranny, the joy of Kanhas birth resonates within the prison
डुमरियागंज के बहेरिया गांव में श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन, श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
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कंस के अत्याचार, देवकी-वसुदेव की पीड़ा और यमुना पार कर गोकुल पहुंचने का प्रसंग सुनाया
डुमरियागंज। क्षेत्र के बहेरिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार रात कथावाचक आचार्य सतीश मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाया। कंस के अत्याचार, कारागार में देवकी-वसुदेव की पीड़ा और आधी रात को भगवान के प्राकट्य की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथावाचक ने कहा कि मथुरा के राजा कंस को अपनी बहन देवकी के विवाह के बाद विदाई के समय आकाशवाणी सुनाई दी कि देवकी का आठवां पुत्र उसका वध करेगा। यह सुनते ही कंस भयभीत हो गया और उसने देवकी तथा वसुदेव को कारागार में डाल दिया। भविष्यवाणी के भय से वह देवकी की संतानों का वध करता रहा, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म को रोक नहीं सका।
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कथा के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात में कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। भगवान के प्राकट्य से देवकी-वसुदेव आनंदित हुए, लेकिन कंस के भय से चिंतित भी थे। भगवान ने अपने दिव्य स्वरूप में दर्शन देकर माता-पिता को आश्वस्त किया और फिर नवजात शिशु का रूप धारण कर लिया।
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इसके बाद कथावाचक ने वसुदेव के भगवान श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर गोकुल ले जाने का प्रसंग सुनाया। भगवान की लीला से कारागार के द्वार खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वसुदेव नन्हे कान्हा को लेकर अंधेरी रात में यमुना नदी की ओर चल पड़े। तेज बारिश और उफनती नदी के बीच शेषनाग ने अपने फनों से बालक की रक्षा की।
मान्यता के अनुसार, भगवान के चरणों का स्पर्श पाकर यमुना ने भी वसुदेव को मार्ग दिया। वसुदेव गोकुल पहुंचे और नंद बाबा के घर बालकृष्ण को सुलाकर वहां जन्मी कन्या को लेकर वापस कारागार लौट आए। उधर, नंद बाबा और यशोदा के घर कान्हा के आगमन से आनंद छा गया।

आचार्य सतीश मिश्र ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है। जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं।
इस दौरान ज्ञानदास प्रजापति, डॉ. रजनीश, दिलीप पांडेय, चिनमुन यादव, सुरेश गुप्ता, प्रदीप समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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