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Siddharthnagar News: शिविर में 118 गर्भवतियों की जांच, 12 उच्च जोखिम और 34 में खून की कमी
Sat, 01 Aug 2026 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 01 Aug 2026 11:33 PM IST
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- भनवापुर के सीएचसी सिरसिया में पीएसएमए के तहत आयोजित हुआ शिविर
भवानीगंज/भनवापुर। क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में शनिवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। इसमें 118 गर्भवतियों को चिकित्सीय इलाज व परामर्श दिया गया, जिसमें से 12 गर्भवतियों में उच्च जोखिम के लक्षण पाए गए। स्वास्थ्य शिविर में 34 गर्भवतियों में खून की कमी होने के कारण आयरन सुक्रोज की डोज दी गई।
अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने बताया कि इस शिविर का आयोजन प्रत्येक माह के एक, नौ, 16 और 24 तारीख को किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षण जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, फीटस के बेड़े होने, गंभीर एनिमिया, प्लेसेंटा का विकृत व नीचे होना आदि की समय रहते पहचान करते हुए चिकित्सीय प्रबंधन से जच्चा व बच्चे को सुरक्षित किया जाता है। अधीक्षक ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षण पाए जाने पर गर्भवतियों को कम से कम तीन बार चिकित्सीय सलाह जरूरी होती है।
उन्होंने शिविर में आई गर्भवतियों को संतुलित भोजन खाने की सलाह दी, जिससे गर्भावस्था के दौरान गर्भवती का वजन मानक के अनुसार लगभग 11 किलो बढ़ सके और जन्म के समय नवजात का वजन 2.5 किग्रा या इससे अधिक हो सके। उन्होंने बताया कि गर्भवती अपने क्षेत्र की आशा बहू से संपर्क करते हुए गर्भावस्था की शुरुआती 12 सप्ताह तक फोलिक एसिड की गोली जरूर खाएं, जिससे नवजात शिशु को न्यूरोलॉजिकल परेशानी से बचाया जा सके।
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इस दौरान डॉ. सिद्धार्थ जायसवाल, डॉ. अनवरुद्दीन, डॉ. श्रेया चौधरी, डॉ. सबीहा मलिक, ज्योति, अजय कुमार पांडेय आदि शामिल रहें।
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भवानीगंज/भनवापुर। क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में शनिवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। इसमें 118 गर्भवतियों को चिकित्सीय इलाज व परामर्श दिया गया, जिसमें से 12 गर्भवतियों में उच्च जोखिम के लक्षण पाए गए। स्वास्थ्य शिविर में 34 गर्भवतियों में खून की कमी होने के कारण आयरन सुक्रोज की डोज दी गई।
अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने बताया कि इस शिविर का आयोजन प्रत्येक माह के एक, नौ, 16 और 24 तारीख को किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षण जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, फीटस के बेड़े होने, गंभीर एनिमिया, प्लेसेंटा का विकृत व नीचे होना आदि की समय रहते पहचान करते हुए चिकित्सीय प्रबंधन से जच्चा व बच्चे को सुरक्षित किया जाता है। अधीक्षक ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षण पाए जाने पर गर्भवतियों को कम से कम तीन बार चिकित्सीय सलाह जरूरी होती है।
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उन्होंने शिविर में आई गर्भवतियों को संतुलित भोजन खाने की सलाह दी, जिससे गर्भावस्था के दौरान गर्भवती का वजन मानक के अनुसार लगभग 11 किलो बढ़ सके और जन्म के समय नवजात का वजन 2.5 किग्रा या इससे अधिक हो सके। उन्होंने बताया कि गर्भवती अपने क्षेत्र की आशा बहू से संपर्क करते हुए गर्भावस्था की शुरुआती 12 सप्ताह तक फोलिक एसिड की गोली जरूर खाएं, जिससे नवजात शिशु को न्यूरोलॉजिकल परेशानी से बचाया जा सके।
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इस दौरान डॉ. सिद्धार्थ जायसवाल, डॉ. अनवरुद्दीन, डॉ. श्रेया चौधरी, डॉ. सबीहा मलिक, ज्योति, अजय कुमार पांडेय आदि शामिल रहें।