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27 दिन बाद बीमार नवजात की मौत
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27 दिन बाद बीमार नवजात की मौत
बढ़नी। जन्म के बाद से ही पीलिया से ग्रस्त नवजात की 27 दिन बाद उचित इलाज के अभाव में मौत हो गई। नवजात के नाना ने जिला महिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने की मांग की है ताकि किसी और नवजात की जान न जा सके।
ग्राम ढेकहरी बुजुर्ग निवासी फूलचंद अग्रहरि की बेटी पूजा ने शहर के एक निजी अस्पताल में 21 जनवरी को बेटे को जन्म दिया था। फूलचंद के अनुसार दो दिन बाद ही शिशु ने दूध पीना बंद कर दिया। जांच के बाद पता चला कि शिशु को पीलिया हो गया है। कई दिन इलाज करने के बाद निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने शिशु को गोरखपुर ले जाने की सलाह दी। 11 फरवरी को वह शिशु को लेकर गोरखपुर के जिला महिला अस्पताल स्थित 100 बेड यूनिट पहुंचे।
आरोप है कि वहां सिक नियोनेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) शिशु को भर्ती नहीं किया गया और दो दिन तक इंतजार करवाया गया। मजबूर होकर वह 13 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय गोरखनाथ मंदिर पहुुंचे और अपनी समस्या बताई। फूलचंद अपने गांव में भाजपा के बूथ प्रमुख भी हैं। इसलिए एसआईसी बीआरडी मेडिकल प्रबंधन को पत्र लिख कर उन्हें भेजा गया। मेडिकल कॉलेज में एसआईसी ने उन्हें पीडियाट्रिक विभाग में भेज दिया। आरोप है कि डॉक्टरों ने बच्चे को भर्ती नहीं किया। दवा व परामर्श देकर लौटा दिया। लिहाजा शिशु की 17 फरवरी को मृत्यु हो गई।
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बढ़नी। जन्म के बाद से ही पीलिया से ग्रस्त नवजात की 27 दिन बाद उचित इलाज के अभाव में मौत हो गई। नवजात के नाना ने जिला महिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने की मांग की है ताकि किसी और नवजात की जान न जा सके।
ग्राम ढेकहरी बुजुर्ग निवासी फूलचंद अग्रहरि की बेटी पूजा ने शहर के एक निजी अस्पताल में 21 जनवरी को बेटे को जन्म दिया था। फूलचंद के अनुसार दो दिन बाद ही शिशु ने दूध पीना बंद कर दिया। जांच के बाद पता चला कि शिशु को पीलिया हो गया है। कई दिन इलाज करने के बाद निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने शिशु को गोरखपुर ले जाने की सलाह दी। 11 फरवरी को वह शिशु को लेकर गोरखपुर के जिला महिला अस्पताल स्थित 100 बेड यूनिट पहुंचे।
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आरोप है कि वहां सिक नियोनेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) शिशु को भर्ती नहीं किया गया और दो दिन तक इंतजार करवाया गया। मजबूर होकर वह 13 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय गोरखनाथ मंदिर पहुुंचे और अपनी समस्या बताई। फूलचंद अपने गांव में भाजपा के बूथ प्रमुख भी हैं। इसलिए एसआईसी बीआरडी मेडिकल प्रबंधन को पत्र लिख कर उन्हें भेजा गया। मेडिकल कॉलेज में एसआईसी ने उन्हें पीडियाट्रिक विभाग में भेज दिया। आरोप है कि डॉक्टरों ने बच्चे को भर्ती नहीं किया। दवा व परामर्श देकर लौटा दिया। लिहाजा शिशु की 17 फरवरी को मृत्यु हो गई।
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