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कई दिक्कतों को दूर करता है सेतुबंधासन
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कई दिक्कतों को दूर करता है सेतुबंधासन
विश्व योग दिवस के पहले कर रहे जागरूक
संवाद न्यूूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विश्व योग दिवस के पूर्व आमजन को योग के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में योगाभ्यासी महेश कुमार भी वर्चुअल माध्यम से पहल कर रहे हैं।
महेश कुमार ने बताया कि सेतुबंधासन का नाम दो शब्दों पर रखा गया है। सेतु और बंध। सेतु का मतलब पुल और बंध का मतलब बांधना। इस आसन में आप अपने शरीर को एक सेतु की मुद्रा में बांधकर या रोक कर रखते हैं। इसके लाभ रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। छाती, गर्दन और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव लाता है। मस्तिष्क को शांत करता है और तनाव और हल्के अवसाद को कम करने में मदद करता है। पाचन में सुधार के साथ ही पेट के अंगों, फेफड़ों और थायराइड को उत्तेजित करता है। टांगों को फिर से जीवंत बनाता है। रजोनिवृत्ति के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। मासिक धर्म में होने वाली परेशानी से राहत देता है। अस्थमा (दमा), हाई बीपी, ऑस्टियोपोरोसिस और साइनसाइटिस के लिए चिकित्सीय कार्य के अलावा चिंता, थकान, पीठ दर्द, सिरदर्द, और अनिद्रा कम कर देता है।
सेतुबंधासन का तरीका
अपनी पीठ के बल सीधे लेट जाए। अपने बाजुओं को धड़ के साथ रख लें। टांगों को मोड़ कर पैरों को अपने कूल्हों के करीब ले आयें। जितना करीब हो सके उतना लाएं। हाथों पर वजन डाल कर धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर उठाएं। ऐसा करते वक्त श्वांस अंदर लें। पैरों को मजबूती से टिका कर रखें। पीठ जितनी मोड़ी जाए, उतनी ही मोड़ें।
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सावधानी
अगर आपकी पीठ में चोट हो तो सेतुबंधासन न करें। अगर आपकी गर्दन में चोट हो तो सेतुबंधासन करना कष्टकारी साबित हो सकता है।
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विश्व योग दिवस के पहले कर रहे जागरूक
संवाद न्यूूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विश्व योग दिवस के पूर्व आमजन को योग के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में योगाभ्यासी महेश कुमार भी वर्चुअल माध्यम से पहल कर रहे हैं।
महेश कुमार ने बताया कि सेतुबंधासन का नाम दो शब्दों पर रखा गया है। सेतु और बंध। सेतु का मतलब पुल और बंध का मतलब बांधना। इस आसन में आप अपने शरीर को एक सेतु की मुद्रा में बांधकर या रोक कर रखते हैं। इसके लाभ रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। छाती, गर्दन और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव लाता है। मस्तिष्क को शांत करता है और तनाव और हल्के अवसाद को कम करने में मदद करता है। पाचन में सुधार के साथ ही पेट के अंगों, फेफड़ों और थायराइड को उत्तेजित करता है। टांगों को फिर से जीवंत बनाता है। रजोनिवृत्ति के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। मासिक धर्म में होने वाली परेशानी से राहत देता है। अस्थमा (दमा), हाई बीपी, ऑस्टियोपोरोसिस और साइनसाइटिस के लिए चिकित्सीय कार्य के अलावा चिंता, थकान, पीठ दर्द, सिरदर्द, और अनिद्रा कम कर देता है।
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सेतुबंधासन का तरीका
अपनी पीठ के बल सीधे लेट जाए। अपने बाजुओं को धड़ के साथ रख लें। टांगों को मोड़ कर पैरों को अपने कूल्हों के करीब ले आयें। जितना करीब हो सके उतना लाएं। हाथों पर वजन डाल कर धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर उठाएं। ऐसा करते वक्त श्वांस अंदर लें। पैरों को मजबूती से टिका कर रखें। पीठ जितनी मोड़ी जाए, उतनी ही मोड़ें।
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सावधानी
अगर आपकी पीठ में चोट हो तो सेतुबंधासन न करें। अगर आपकी गर्दन में चोट हो तो सेतुबंधासन करना कष्टकारी साबित हो सकता है।