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Siddharthnagar News: लक्ष्मण को मूर्छित देख भावुक हुए श्रीराम
Sun, 15 Feb 2026 01:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 15 Feb 2026 01:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
शाहपुर। क्षेत्र के धनोहरी गांव में आयोजित रामलीला मंचन में शुक्रवार की रात लक्ष्मण शक्ति और राम विलाप प्रसंग का अत्यंत भावुक और जीवंत मंचन किया गया। मंच पर कलाकारों की अभिनय प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
कलाकारों ने दिखाया कि युद्ध के दौरान रावण पुत्र मेघनाद अपने दिव्य शक्ति बाण का प्रयोग करता है, जिससे लक्ष्मण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ते हैं। लक्ष्मण के अचेत हो जाने से राम की सेना में हाहाकार मच जाता है। मंचन में श्रीराम को अपने प्रिय अनुज की यह अवस्था देख अत्यंत व्यथित और विचलित दिखाया गया। राम का करुण विलाप, उनकी आंखों से बहते अश्रु और भाई के प्रति उनका अटूट स्नेह दर्शकों के हृदय को छू गया। कुछ समय के लिए पूरा पंडाल भावनाओं में डूब गया। इसके बाद वैद्य सुषेण के परामर्श पर हनुमान द्रोण पर्वत से संजीवनी बूटी लाने के लिए प्रस्थान करते हैं। मंच पर हनुमान की उड़ान और पर्वत उठाने का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। संजीवनी बूटी के प्रयोग से लक्ष्मण के होश में आते ही पंडाल जयघोष से गूंज उठा।
इस दौरान वीरेंद्र मणि, नीरज मणि त्रिपाठी, मोहम्मद हुसेन, सहज राम, जगराम, मनोहर, चंद्र प्रकाश यादव, प्रेम शंकर आदि मौजूद रहे।
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शाहपुर। क्षेत्र के धनोहरी गांव में आयोजित रामलीला मंचन में शुक्रवार की रात लक्ष्मण शक्ति और राम विलाप प्रसंग का अत्यंत भावुक और जीवंत मंचन किया गया। मंच पर कलाकारों की अभिनय प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
कलाकारों ने दिखाया कि युद्ध के दौरान रावण पुत्र मेघनाद अपने दिव्य शक्ति बाण का प्रयोग करता है, जिससे लक्ष्मण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ते हैं। लक्ष्मण के अचेत हो जाने से राम की सेना में हाहाकार मच जाता है। मंचन में श्रीराम को अपने प्रिय अनुज की यह अवस्था देख अत्यंत व्यथित और विचलित दिखाया गया। राम का करुण विलाप, उनकी आंखों से बहते अश्रु और भाई के प्रति उनका अटूट स्नेह दर्शकों के हृदय को छू गया। कुछ समय के लिए पूरा पंडाल भावनाओं में डूब गया। इसके बाद वैद्य सुषेण के परामर्श पर हनुमान द्रोण पर्वत से संजीवनी बूटी लाने के लिए प्रस्थान करते हैं। मंच पर हनुमान की उड़ान और पर्वत उठाने का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। संजीवनी बूटी के प्रयोग से लक्ष्मण के होश में आते ही पंडाल जयघोष से गूंज उठा।
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इस दौरान वीरेंद्र मणि, नीरज मणि त्रिपाठी, मोहम्मद हुसेन, सहज राम, जगराम, मनोहर, चंद्र प्रकाश यादव, प्रेम शंकर आदि मौजूद रहे।