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Siddharthnagar News: विद्यालय भवन ध्वस्त, अतिरिक्त कक्ष में किसी तरह बैठ रहे बच्चे

Mon, 23 Jan 2023 10:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jan 2023 10:48 PM IST
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School building demolished, children somehow sitting in extra room
भवन विहीन पूर्व माध्यमिक विद्यालय घोसियारी। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
विद्यालय भवन ध्वस्त, अतिरिक्त कक्ष में किसी तरह बैठ रहे बच्चे
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सिद्धार्थनगर/घोसियारी। खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय घोसियारी और पूरनजोत का जर्जर भवन दो वर्ष पहले ध्वस्त कर दिया गया। लेकिन, अभी तक नये भवन का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। इसलिए बच्चे अतिरिक्त कक्ष में बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र के कुछ प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अपना भवन ना होने के कारण परिसर में बने अतिरिक्त भवन में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। जिससे विद्यालय संचालन में बड़ी सुविधा हो रही है। प्राथमिक विद्यालय पूरनजोत में बना प्राथमिक विद्यालय का भवन दो वर्ष पूर्व ही विभाग के आदेश द्वारा गिरा दिया गया। इसलिए बच्चों को प्राथमिक विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष में बच्चों को पढ़ाना शिक्षकों की मजबूरी हो गई है। प्राथमिक विद्यालय पूरनजोत की प्रधानाध्यापिका प्रियंका शुक्ल का कहना है दो साल से प्राथमिक विद्यालय का भवन गिरा दिया गया। विद्यालय में कुल छात्र संख्या 78 हैं। परिसर में बना आंगनबाड़ी भवन भी जर्जर है। इसलिए बच्चों को पढ़ाने में बड़ी असुविधा हो रही है।
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आंगनबाड़ी के बच्चे भी प्राथमिक विद्यालय के अतिरिक्त भवन में पढ़ते हैं। अपना भवन ना होने के कारण बड़ी असुविधा हो रही है। इसी तरह पूर्व माध्यमिक विद्यालय घोसियारी में पुराना भवन दो साल पहले गिरा दिया गया। बच्चे प्राथमिक विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष में पढ़ते हैं। इस विद्यालय में पूर्व माध्यमिक छात्रों की संख्या संख्या 113 है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक परमहंस मिश्र का कहना है कि विद्यालय में कुल 113 छात्र पंजीकृत हैं। अगर सभी छात्र किसी दिन विद्यालय पढ़ने आ जाएं तो बैठने की जगह तक नहीं है, विभाग को तुरंत नया भवन बनवाना चाहिए। इस संबंध में बीईओ खेसरहा कमला प्रसाद का कहना है कि विभाग के निर्देश पर ही पुराना भवन गिराया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी के यहां इसकी रिपोर्ट भेजी गई है। विभाग से धन अवमुक्त होते ही कार्य शुरू करा दिए जाएंगे। धन के अभाव में कार्य रुका हुआ है।
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