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कटान स्थल पर बह गईं बालू भरी बोरियां
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शोहरतगढ़ क्षेत्र के खैरी शीतल प्रसाद गांव में हो रही कटान। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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कटान स्थल पर बह गईं बालू भरी बोरियां
खैरी शीतल प्रसाद गांव में घोराही नदी में बनाया गया था ठोकर
एक दिन पहले ही विधायक ने डीएम से की थी शिकायत
परसा(सिद्धार्थनगर)। खैरी शीतल प्रसाद गांव में सरयू ड्रेनेज खंड दो की ओर से घोरही नदी के किनारे कटान रोकने के लिए लगवाई गईं बालू भरी बोरियाें में आधी शुक्रवार देर रात नेपाल की पहाड़ियों से आए पानी में बह गईं। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। जबकि विभागीय एई ने ग्रामीणों पर आरोप मढ़ा है कि जिन बांस के खूंटों के सहारे बोरियां लगाई गई थीं, उसे गांव वाले उखाड़ ले गए। इस कारण कम पानी में ही बोरियां बह गईं।
ग्रामीणों ने शुक्रवार को ही विधायक विनय वर्मा से अस्थायी ठोकर बनाने में लापरवाही बरतने की शिकायत की थी। मौके पर पहुंचे विधायक ने डीएम को पत्र भेजकर मानक के अनुसार कार्य कराने की बात कही थी। शुक्रवार देर रात नदी में पानी बढ़ने के बाद बोरियां बह गईं तो ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार खैरी शीतल प्रसाद गांव में सिंचाई विभाग की ओर से टीकर व करौता टोले के बीच घोरही नदी के किनारे कटान रोकने के लिए 300 मीटर की दूरी में करीब 23 लाख रुपये की लागत से अस्थायी ठोकर बनवाया गया था। ग्राम प्रधान शिवकुमार साहनी, क्षेत्र पंचायत सदस्य कोदई साहनी, रामहरीश, राम सिंह, राकेश यादव ने आरोप लगाया है कि टेंडर की लागत के अनुसार कार्य नहीं हुआ है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के एई सादिक अली ने बताया कि ग्रामीण बांस की बैरिकेडिंग को रोकने के लिए लगे खूंटे को उखाड़ ले गए थे। इस वजह से बांस व बालू से भरी बोरियां नदी में बह गईं।
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डीएम ने दिए जांच के आदेश
विधायक विनय वर्मा ने डीएम संजीव रंजन को पत्र लिखकर घोरही नदी के कटान स्थल पर हुए कार्य की जांच कराने की मांग की है। डीएम ने बताया कि नदी के कटान स्थल पर बोरियां के बह जाने के मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
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खैरी शीतल प्रसाद गांव में घोराही नदी में बनाया गया था ठोकर
एक दिन पहले ही विधायक ने डीएम से की थी शिकायत
परसा(सिद्धार्थनगर)। खैरी शीतल प्रसाद गांव में सरयू ड्रेनेज खंड दो की ओर से घोरही नदी के किनारे कटान रोकने के लिए लगवाई गईं बालू भरी बोरियाें में आधी शुक्रवार देर रात नेपाल की पहाड़ियों से आए पानी में बह गईं। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। जबकि विभागीय एई ने ग्रामीणों पर आरोप मढ़ा है कि जिन बांस के खूंटों के सहारे बोरियां लगाई गई थीं, उसे गांव वाले उखाड़ ले गए। इस कारण कम पानी में ही बोरियां बह गईं।
ग्रामीणों ने शुक्रवार को ही विधायक विनय वर्मा से अस्थायी ठोकर बनाने में लापरवाही बरतने की शिकायत की थी। मौके पर पहुंचे विधायक ने डीएम को पत्र भेजकर मानक के अनुसार कार्य कराने की बात कही थी। शुक्रवार देर रात नदी में पानी बढ़ने के बाद बोरियां बह गईं तो ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
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जानकारी के अनुसार खैरी शीतल प्रसाद गांव में सिंचाई विभाग की ओर से टीकर व करौता टोले के बीच घोरही नदी के किनारे कटान रोकने के लिए 300 मीटर की दूरी में करीब 23 लाख रुपये की लागत से अस्थायी ठोकर बनवाया गया था। ग्राम प्रधान शिवकुमार साहनी, क्षेत्र पंचायत सदस्य कोदई साहनी, रामहरीश, राम सिंह, राकेश यादव ने आरोप लगाया है कि टेंडर की लागत के अनुसार कार्य नहीं हुआ है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के एई सादिक अली ने बताया कि ग्रामीण बांस की बैरिकेडिंग को रोकने के लिए लगे खूंटे को उखाड़ ले गए थे। इस वजह से बांस व बालू से भरी बोरियां नदी में बह गईं।
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डीएम ने दिए जांच के आदेश
विधायक विनय वर्मा ने डीएम संजीव रंजन को पत्र लिखकर घोरही नदी के कटान स्थल पर हुए कार्य की जांच कराने की मांग की है। डीएम ने बताया कि नदी के कटान स्थल पर बोरियां के बह जाने के मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।