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दौरों में तेजी पर सुविधाएं नदारद
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 16 Jan 2017 11:11 PM IST
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नौगढ़ रेलवे स्टेशन पर बिना टोटी के वाटर सप्लाई।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। गोरखपुर-गोंडा रूट पर एक माह के भीतर रेलवे के तीन-तीन वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे हो चुके हैं, पर रेलवे स्टेशन पर सुविधा सहूलियत दुरुस्त कराने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई। नौगढ़ रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध सुविधाओं का लाभ यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है। प्रतीक्षालय में लगा एलईडी टीवी बंद तो प्लेटफार्म संख्या दो पर पेयजल व्यवस्था का अभाव बना हुआ है। गोररखपुर-गोंडा रेलमार्ग का हाल जानने दिसंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर 15 जनवरी तक कुल तीन रेलवे अधिकारों ने जायजा लिया पर जांच टै्रक तक सिमट कर रह गया।
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में डीआरएम आलोक सिंह ने रूट और पडने वाले स्टेशनों का दौरा किया वहीं 12 दिसंबर को पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य संरक्षा अधिकारी (सीएसओ) एनके अंबिकेश जायजे को पहुंचे। अंतिम दौरा पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ के रेल प्रबंधक मुकेश ने सेफ्टी प्वाइंट,सिग्नल प्वाइंट और रेल ट्रैक की दुरूस्तता जांची। तीन तीन अधिकारियों के दौरे के बाद भी रूट के स्टेशन बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। लंबी दूरी की गाडिय़ां दौड़ाने के बाद यात्रियों की भारी भीड़ नौगढ़, शोहरतगढ़ और बढनी स्टेशनों पर जुटती है पर इन्हें सुविधा के लिए परेशान ही रहना पड़ता है। नौगढ़ रेलवे स्टेशन के यात्री प्रतीक्षालय में मंहगी एलईडी टीवी लगी हुई है पर आज तक रेलवे इस टीवी को नेटवर्क कनेक्शन नहीं उपलब्ध करा सका। टीवी 24 घंटे आन रहता है पर कोई कार्यक्रम न संचालित होने के कारण शोपीस बन कर रह गया है।
साफ सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे है जिससे यात्रियों को दुर्गंध झेलनी पड़ती है। यात्रियों को शुद्ध पेयजल दे पाने का सपना भी यहां अधूरा है। प्लेटफार्म संख्या दो पर वाटर सप्लाई को बेसिन तो बना है पर टोटियां न लगे होने के कारण सप्लाई नहीं है। यात्रियों को दो नंबर प्लेटफार्म पर पानी नहीं मिलता। जनरेटर की व्यवस्था स्टेशन पर उपलब्ध है जिससे यात्रियों को अंधेरे में न रहना पड़े पर दारोमदार सिर्फ विद्युत आपूर्ति पर निर्भर है। यात्री अंकित चौधरी कहते हैं कि बुद्ध की विश्व में ख्याति है पर नौगढ़ स्टेशन पहुंचने के बाद यह पता चलता है कि बुद्ध की धरती से विकास कार्य नदारद है। अपेक्षित सुविधाओं की कौन कहे खान पान की समुचित सुविधा तक नहीं मिलती। मुख्यालय निवासी खुर्शीद अहमद का कहना है कि नौगढ़ रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं काफी कम हैं दूर से आने वाले यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में असुविधा होती है क्योंकि यहां स्टैंड नहीं है। स्टैंड की मांग लंबे समय से हो रही पर रेलवे ध्यान नहीं देता।
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दिसंबर के अंतिम सप्ताह में डीआरएम आलोक सिंह ने रूट और पडने वाले स्टेशनों का दौरा किया वहीं 12 दिसंबर को पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य संरक्षा अधिकारी (सीएसओ) एनके अंबिकेश जायजे को पहुंचे। अंतिम दौरा पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ के रेल प्रबंधक मुकेश ने सेफ्टी प्वाइंट,सिग्नल प्वाइंट और रेल ट्रैक की दुरूस्तता जांची। तीन तीन अधिकारियों के दौरे के बाद भी रूट के स्टेशन बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। लंबी दूरी की गाडिय़ां दौड़ाने के बाद यात्रियों की भारी भीड़ नौगढ़, शोहरतगढ़ और बढनी स्टेशनों पर जुटती है पर इन्हें सुविधा के लिए परेशान ही रहना पड़ता है। नौगढ़ रेलवे स्टेशन के यात्री प्रतीक्षालय में मंहगी एलईडी टीवी लगी हुई है पर आज तक रेलवे इस टीवी को नेटवर्क कनेक्शन नहीं उपलब्ध करा सका। टीवी 24 घंटे आन रहता है पर कोई कार्यक्रम न संचालित होने के कारण शोपीस बन कर रह गया है।
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साफ सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे है जिससे यात्रियों को दुर्गंध झेलनी पड़ती है। यात्रियों को शुद्ध पेयजल दे पाने का सपना भी यहां अधूरा है। प्लेटफार्म संख्या दो पर वाटर सप्लाई को बेसिन तो बना है पर टोटियां न लगे होने के कारण सप्लाई नहीं है। यात्रियों को दो नंबर प्लेटफार्म पर पानी नहीं मिलता। जनरेटर की व्यवस्था स्टेशन पर उपलब्ध है जिससे यात्रियों को अंधेरे में न रहना पड़े पर दारोमदार सिर्फ विद्युत आपूर्ति पर निर्भर है। यात्री अंकित चौधरी कहते हैं कि बुद्ध की विश्व में ख्याति है पर नौगढ़ स्टेशन पहुंचने के बाद यह पता चलता है कि बुद्ध की धरती से विकास कार्य नदारद है। अपेक्षित सुविधाओं की कौन कहे खान पान की समुचित सुविधा तक नहीं मिलती। मुख्यालय निवासी खुर्शीद अहमद का कहना है कि नौगढ़ रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं काफी कम हैं दूर से आने वाले यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में असुविधा होती है क्योंकि यहां स्टैंड नहीं है। स्टैंड की मांग लंबे समय से हो रही पर रेलवे ध्यान नहीं देता।
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