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Siddharthnagar News: मेडिकल कॉलज में नवजात की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा

Mon, 24 Jul 2023 11:35 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jul 2023 11:35 PM IST
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Relatives created ruckus over the death of a newborn in the medical college
बाल रोग विभाग के एसएनसीयू के बाहर रविवार रात हुआ हंगामा, गंभीर रूप से बीमार नवजात के इलाज में लापरवाही का आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में रविवार रात नवजात की मौत हो गई। आठ दिन से भर्ती नवजात की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है। हंगामा हुआ तो डॉक्टर मौजूद थे। इस मौके पर स्वास्थ्य कर्मियों ने परिजनों को समझाकर वापस किया।

मेडिकल कॉलेज में लक्ष्मी की संतान की इलाज के दौरान मौत हो गई। उसके बाद नवजात के परिजनों ने एक घंटे तक हंगामा किया। वे डॉक्टर को मौके पर बुला रहे थे, लेकिन वे नहीं आए। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल में कोई भी डॉक्टर नहीं था। स्टाफ नर्स के भरोसे इलाज किया जा रहा है। बच्चे की तबीयत बिगड़ी तो बुलाने के बावजूद भी डॉक्टर नहीं आए। लोटन थाना क्षेत्र के परिजन दीपू ने बताया कि इलाज में लापरवाही न हुई होती तो उनके बच्चे की जान नहीं जाती। इस मामले में मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सकी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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हगांमे के बाद भी खाली रहीं कुर्सियां
हंगामें के बाद भी अस्पताल में रात में डॉक्टरों की कुर्सी खाली थी। एसएनसीयू ही नहीं, बल्कि एमसीएच विंग में डॉक्टरों की कुर्सी खाली थी। एक परिजन ने वीडियो बनाया और यह वीडियो वायरल होने लगा। मरीज भर्ती होने के कारण परिजन ने नाम बताने से इन्कार कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे को खून चढ़ाया जा रहा था, इस मौके पर कोई डॉक्टर था और न ही स्टॉफ नर्स। सोमवार को उन्होंने बच्चे को डिस्चार्ज करने की बात कही तो दो घंटे तक फाइल ही नहीं मिली। उन्होंने बताया कि वार्ड से बच्चा बाहर होगा तो वे जिलाधिकारी से शिकायत करेंगे।
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आठ पद में एक ही डॉक्टर
मेडिकल कॉलेज में सीनियर डॉक्टर के आठ पद हैं। एसएनसीयू में एक, पीआईसीयू में दो, एनआरसी में एक, मेडिकल कॉलेज में तीन पद हैं, जिसमें एक ही डॉक्टर हैं। एक डॉक्टर के भरोसे ही ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी, एसएनसीयू, पोस्टमार्टम ड्यूटी एवं एसएनसीयू है। जब इमरजेंसी आती है तो डॉक्टर बुलाए जाते हैं।

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इस कारण बिगड़ी स्थिति
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में डॉक्टरों पर वसूली के आरोप लगे थे तो एनएचएम के डॉक्टर को एसएनसीयू, ओपीडी व अन्य ड्यूटी से हटाकर एमसीएच विंग में भेज दिया गया। इस कारण एक ही डॉक्टर के भरोसे बच्चों का इलाज हो रहा है। सोमवार को 20 बेड के एसएनसीयू में 18 नवजात भर्ती थे।
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