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Siddharthnagar News: एक साल से उड़ रही धूल, सर्द मौसम में बढ़े श्वांस रोगी

Thu, 23 Nov 2023 01:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 23 Nov 2023 01:37 AM IST
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problem of dust
शहर के बुद्ध नगर में सड़क पर उड़ रही धूल में आवागमन कर रहे लोग। संवाद
फोटो--
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नौगढ़-सोहांस मार्ग अधूरा होने का दंश झेल रहे हैं लोग
शहर के बुद्धनगर में रहने से कतराने लगे हैं किरायेदार
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक साल से अधिक समय से धूल के बीच जीने वाले बुद्धनगर के लोग श्वांस और त्वचा के मरीज हो रहे हैं। रेलवे स्टेशन से सटे हुए वार्ड में रहने से अब किरायेदार कतराने लगे हैं। स्थानीय लोगों की शिकायतों के बावजूद सड़क अधूरी रह गई है। दिन-रात धूल उड़ रही है। इस कारण सड़क के आसपास के लोग अपना गेट बंद करके घर के अंदर रहने के लिए मजबूर हैं।

नौगढ़-सोहांस मार्ग पर उड़ती धूल के कारण लोग उधर से जाने से कतरा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत 22 किमी सड़क का निर्माण हो रहा है। इसमें शहरी क्षेत्र में काम अधूरा है। करीब एक किमी सड़क अधूरी होने से शहरी क्षेत्र के अलावा सोहांस क्षेत्र की तीन लाख आबादी को दर्द झेलना पड़ रहा है।
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मौसम बदला हो तो यही धूल श्वांस रोगियाें के लिए ज्यादा तकलीफ देने लगी है। बदलते हुए सर्द मौसम में ही इस तरह के मरीज आते हैं।
शहाबुद्दीन ने बताया कि वह शहर के बुद्धनगर में किराये पर कमरा लेकर रहते हैं। धूल के कारण उनके पिताजी उनके पास नहीं आ रहे हैं। धूल इतनी उड़ रही है कि कमरे की खिड़की, दरवाजा बंद रखना पड़ता है।
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रामचंद्र गौड़ ने बताया कि उन्हें धूल से एलर्जी है। त्वचा में संक्रमण हो गया है। सड़क ठीक होने का इंतजार नहीं दूर हो रहा है। गिट्टियां उजड़ी हैं। हर दिन सैकड़ाें लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


शहर की सड़क खराब होने के करण धूल बहुत उड़ रही है। पराली और गाड़ियों का धुआं का भी असर है। मैं श्वास का रोगी हो गया हूं।
-अब्दुल्लाह हाशमी, बुद्धनगर

एक साल पहले सड़क निर्माण पूरा करने के लिए लोगों ने धरना दिया था, लेकिन अब अब सड़क नहीं बन पाई। धूल के बीच रहते रहते मैं श्वास का रोगी हो गया।
-मो. असगर, बुद्धनगर

धूल और धुएं से बढ़ गए मरीज
सिद्धार्थनगर। सर्द मौसम में धूल और धुआं के बीच रहने वाले लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे मौसम में अस्थमा, सीओपीडी, टीबी के मरीज बढ़ जाते हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती करने की नौबत आ रही है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि ओपीडी में 70 फीसदी से अधिक मरीज श्वांस के रोगी हैं। हर दिन 10-12 मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। अस्पताल में 26 मरीज श्वांस वाले ही भर्ती हैं। इसमें धूल, पराली और पटाखे के धुआं का भी असर है। इस मौसम में श्वांस के मरीज बढ़ जाते हैं।

श्वांस नली हो रही है संकरी
डॉ. पूनम चौधरी ने बताया कि अस्थमा, सीओपीडी और टीबी के मरीज बढ़ गए हैं। अस्थमा में मौसम में बदलाव, धूल, मिट्टी, धुआं के कारण श्वांस नली संकरी हो रही है। मरीजों की सांस फूल रही है। कफ बनने से टीबी मरीजों की समस्या बढ़ रही है। सीओपीडी के मरीजों को धुएं के बीच रहने से परेशानी बढ़ जाती है। चूल्हे पर भोजन पकाने, ईंट भट्ठे पर काम करने, कारखाने में काम करने, बीड़ी पीने एवं पराली व पटाखे के बीच धुआं में रहने वाले मरीजों को तकलीफ होती है। श्वांस नली संकरी होने से सर्द मौसम में दिक्कत और बढ़ जाती है।
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